अलीगढ में पिछले दिनों रेल हादसे में जान गंवाने वाले पीडि़़त परिवार को मुआवजा देने में रेल प्रशासन की ‘संवेदनहीनता’ चर्चा में है। रेलवे की घोर लापरवाही के चलते जान गंवाने वाले शख्स के घर वालों को जितनी तकलीफ अपने के जाने की हुई‚ शायद उतनी ही पीड़़ा और क्षोभ परिवार के लोगों को रेलवे की ओर से जारी मुआवजा राशि से हुई होगी। किसी की जान की कीमत अगर अरबों की संपत्ति वाला सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम–रेलवे–१५ हजार लगाए तो इससे ज्यादा शर्म और गुस्से की बात कुछ और नहीं हो सकती है॥। सरकार के स्तर पर जब भी मुआवजा देने की बारी आती है तो सरकारी तंत्र बेहद क्रूर और संवेदनहीनता के चरम पर पहुंच जाता है। ऐसे एक नहीं कई उदाहरण हैं‚ जब सरकार द्वारा दी गई मदद राशि को पीडि़़त परिवार अपनी बेइज्जती समझता है। जिस शख्स की अलीगढ़ में नीलांचल एक्सप्रेस में मौत हुई‚ वह परिवार का कमाऊ सदस्य था और उसकी उम्र बहुत ज्यादा नहीं थी। क्या रेलवे के अधिकारी इतनी समझ भी नहीं रखते कि किसी की जान की कीमत कम–से–कम १५ हजार तो कतई नहीं होती। वैसे तो जान बेशकीमती है‚ फिर भी परिवार को अपने अभिन्न के जाने का गम न हो; इसलिए उन्हें सहायता राशि उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे मौकों पर भी महकमा ‘छोटा मन’ दिखाएगा तो जनता का भरोसा कैसे मजबूत होगा। क्या रेल प्रशासन को इस बात का इल्म नहीं कि परिवार के किसी सदस्य की मौत हो जाती है तो पीडि़़त परिवार भावनात्मक रूप से तो टूटता ही है‚ आर्थिक रूप से भी छिन्न–भिन्न हो जाता है। उस वक्त उसे भावनात्मक और आर्थिक‚ दोनों तरह के संबल देने की जरूरत होती है। मगर पीड़़ा की बात है कि अधिकांश मामलों में सरकारी अमला आचरण के तौर पर बेहद निकृष्टता का उदाहरण पेश करता है। क्या अरबों रुपये की संपत्ति से परिपूर्ण रेलवे का यह व्यवहार शोभनीय माना जाएगाॽ मुआवजे की रकम देने में भी अगर ‘तोलमोल’ किया जाता है‚ तो इससे बुरी और बदनीयती की बात दूसरी नहीं हो सकती। रेलवे को अगर अपने गौरवमयी अतीत का संरक्षण करना है तो सबसे पहले मुआवजा देने की अपनी नीति में ईमानदारी दिखानी चाहिए। वैसे‚ देश में हादसे को लेकर ‘एक देश‚ एक मुआवजा’ की नीति जल्द–से–जल्द बननी चाहिए।
समृद्धि यात्रा में आज दरभंगा दौरे पर सीएम नीतीश, 145 करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के तहत आज वे दरभंगा पहुंचेंगे, जहां 105 करोड़ की 50 योजनाओं का शिलान्यास...







