पूर्व कानून मंत्री के अग्रिम जमानत याचिका पर आज पटना हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई। जस्टिस सुनील कुमार पंवार ने इस मामले में पुलिस से केस डायरी की मांग कर दी है। अब केस डायरी की स्टडी करने के बाद ही कार्तिकेय सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर आगे की सुनवाई होगी।
बिहार सरकार के पूर्व कानून मंत्री कार्तिकेय कुमार पटना के दानापुर व्यवहार न्यायालय में 12 नवंबर बुधवार को उपस्थित नहीं हुए। पूर्व मंत्री के अधिवक्ता अनमोल कुमार सिंह ने इस मामले में न्यायालय में अपना पक्ष रखा। कोट की अगली सुनवाई अगले तारीख को की जाएगी। न्यायालय द्वारा अभी अगले तारीख की घोषणा नहीं की गई है। अगले तारीख की घोषणा शाम 5:00 बजे तक होने की उम्मीद है।
मामला बिल्डर राजू सिंह के अपहरण से जुड़ा है। बिहटा थाने में दर्ज इस केस में नामजद तो मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह समेत कई लोग थे। पर कार्तिक सिंह का नाम बाद में जांच के दौरान सामने आया था। लेकिन, आरोप है कि पुलिस ने उन्हें बाद में क्लीन चीट दे दी थी। इसी के बाद बिल्डर का परिवार कोर्ट के शरण में पहुंचा था।
इसी आधार पर कार्तिक सिंह के ऊपर फिर से अपहरण मामले में शामिल होने का आरोप लगा। पहले तो कोर्ट ने 1 सितंबर तक किसी तरह की कार्रवाई पर रोक लगा रखी थी। पर जब उस दिन इस मामले में सुनवाई हुई तो पूर्व मंत्री के वकील जनार्दन शर्मा के लंबी बहस करने के बाद भी जमानत नहीं मिली थी।
पटना पुलिस की हो चुकी है फजीहत
इस मामले में पटना पुलिस की काफी फजीहत हो चुकी है। पहले पुलिस कहती रही कि कार्तिक सिंह फरार हैं। सुरक्षा के लिए मिला बॉडीगार्ड घर पर है, पर जब पुलिस टीम उनके पटना और मोकामा वाले घर पर छापेमारी की तो वो फरार मिले। बॉडीगार्ड को भी उनके बारे में जानकारी नहीं है। लेकिन, दशहरे के दिन का एक वीडियो सामने आया। जिसमें कार्तिकेय सिंह मोकामा में जेल में बंद पूर्व बाहुबली विधायक अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी के साथ उनके काफिले में दिखे।
इस वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस की काफी किरकिरी हुई। तब पटना पुलिस के सुर भी बदल गए। तब पुलिस की ओर से दावा किया गया कि पूर्व मंत्री ने कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर कर रखी है। सुनवाई तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकती है। पढ़ें पूरी खबर…
हाईकोर्ट से खारिज हो चुका है एंटी सिपेट्री बेल पिटिशन
जब भाजपा से अलग होकर महागठबंधन की सरकार बनी तो राजद कोटे से MLC कार्तिक सिंह को मंत्री बनाया गया था। शपथ लेने के बाद उन्हें कानून मंत्री का पदभार मिला था। पर वो ज्यादा दिन टीक नहीं पाए। क्योंकि, बिहटा थाना में दर्ज बिल्डर राजू सिंह का पुराना केस सामने आ गया। इस केस में वो नामजद आरोपी नहीं है। लेकिन, पुलिस की जांच में उनका नाम सामने आया था। हालांकि, बाद में पुलिस ने अपनी जांच में से उनका नाम हटा दिया था। जिसे दानापुर कोर्ट में बिल्डर के परिवार वालों की तरफ से चैलेंज किया गया। इसके बाद ही मामले की कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। 1 सितंबर तक कोर्ट ने नो कोर्सिव लगा रखा था।
जब कोर्ट से कार्तिक सिंह को राहत नहीं मिली तो उन्हें मंत्री पद से अपना इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद दानापुर कोर्ट में लगातार तारीख पर तारीख ही मिल रही है। अब 12 अक्टूबर को इस केस में सुनवाई होनी है। दूसरी तरफ, पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए कार्तिकेय सिंह ने अपने वकील के माध्यम से पटना हाईकोर्ट में एंटी सिपेट्री बेल पिटिशन फाइल किया था। जिसे हाईकोर्ट ने रिजेक्ट कर दिया था।





