ADVERTISEMENT
Friday, July 24, 2026
No Result
View All Result
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

गुलामी के प्रतीकों से ‘आजादी‘

UB India News by UB India News
September 11, 2022
in खास खबर, ब्लॉग
0
गुलामी के प्रतीकों से ‘आजादी‘
  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

हर देश की विकास यात्रा में एक समय ऐसा आता है जब देश खुद को नये सिरे से परिभाषित करता है। खुद को नये संकल्पों के साथ आगे बढ़ाता है। आज के भारत के संकल्प और लक्ष्य अपने हैं और अब ये अपने लिए नये प्रतीक भी गढ़ रहा है। गुजरे हुए कल को छोड़कर नया भारत आत्मविश्वास की आभा के साथ आने वाले कल की तस्वीर में नया रंग भर रहा है। तभी तो प्रधानमंत्री ने इसे निरंतर चलने वाली संकल्प यात्रा बताया है। वैसे देखा जाए तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दरअसल उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है‚ जिसकी बुनियाद स्वामी विवेकानंद और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जैसे महान विचारकों ने अपने समय में औपनिवेशिक दृष्टि के प्रभुत्व को चुनौती देकर रखी थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से लेकर श्री अरबिंदो तक लगभग सभी राष्ट्रवादी विचारकों ने इस परंपरा की ज्योति को प्रज्ज्वलित रखा। बापू का ‘हिंद स्वराज’ इसका एक बड़ा प्रमाण है ।

आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा देश अब गुलामी के प्रतीकों से भी आजाद हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इसी हफ्ते नाम बदलने के साथ ही उपनिवेशवाद का एक बड़ा प्रतीक राजपथ भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। राजपथ‚ जिसे पहले किंग्स–वे यानी राजा के मार्ग के नाम से जाना जाता था। इसे मूल रूप से ब्रिटिश राज के दौरान राजा के वायसराय हाउस से निकलकर जाने के लिए तैयार किया गया था। आजादी के बाद जब इसका नाम बदलकर राजपथ किया गया तब भी इसमें से राज करने वालों के पथ का भाव दूर नहीं हो सका था। अब प्रधानमंत्री ने सत्ता के इस प्रतीक को कर्तव्य पथ का नाम देकर इसे सार्वजनिक स्वामित्व और लोकतांत्रिक मूल्यों के सशक्तीकरण की नई पहचान दी है।

RELATED POSTS

गुजरात में बाढ़ का कहर!

पेपर लीक और नकलचियों के खिलाफ मोदी कैबिनेट में आज कड़ा प्रस्ताव लाने की तैयारी……….

पीएम मोदी ने इसी साल १५ अगस्त को लाल किले की प्राचीर से ‘पंच प्रण’ लिए थे‚ जिसमें एक प्रण गुलामी की निशानी को खत्म करना भी है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था कि हमें हर उस निशानी को मिटाना है जो अंग्रेजों से जुड़ी है‚ जो गुलामी की प्रतीक हैं। देश से उस आग्रह के एक महीने से भी कम समय में प्रधानमंत्री इस दिशा में आगे बढ़े हैं। वैसे सच्चाई तो यह है कि सत्ता में आने के बाद से ही मोदी सरकार ब्रिटिश उपनिवेश काल के चिह्नों को हटा रही है। इस साल की शुरु आत में‚ बीटिंग द रिट्रीट समारोह के पारंपरिक ईसाई भजन ‘एबाइड बाई मी’ को सदाबहार ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ से बदल दिया गया था। पिछले हफ्ते‚ भारतीय नौसेना के झंडे पर सेंट जॉर्ज के क्रॉस को शिवाजी के प्रतीक की मुहर से बदल दिया गया था। जनवरी में जब अमर जवान ज्योति को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में लौ में मिला दिया गया था तब भी सरकार की ओर से कहा गया था कि इंडिया गेट पर अंकित नाम केवल कुछ शहीदों के हैं जो प्रथम विश्व युद्ध और एंग्लो–अफगान युद्ध में अंग्रेजों के लिए लड़े थे और इस तरह वे हमारे औपनिवेशिक अतीत के ही प्रतीक हैं।

२०१४ से लेकर अब तक सरकार अंग्रेजों के बनाए हुए १‚५०० से ज्यादा ऐसे कानून समाप्त कर चुकी है जिनकी अब देश को जरूरत नहीं है। इतने समय से ये कानून क्यों चले आ रहे थे‚ ये अपने आप में एक बड़ा सवाल है। इसके अलावा कई शहरों से लेकर सड़कों के नाम तक भी बदले गए हैं। गुड़गांव अब गुरु ग्राम हो गया है। वहीं कर्जन मार्ग को कस्तूरबा मार्ग‚ रेस कोर्स को लोक कल्याण मार्ग‚ औरंगजेब मार्ग को एपीजे अब्दुल कलाम मार्ग‚ डलहौजी मार्ग को दारा शिकोह मार्ग कर दिया गया। वैचारिक गुलामी की जंजीरों से निकलने की दिशा में पहला व्यापक और सार्थक प्रयास दरअसल हमारी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी है। अफसोस की बात है कि भारत में शिक्षा के मूल तत्व इतने वर्षों तक लॉर्ड मैकाले की काली छाया में बने रहे। यह एक तथ्य है कि औपनिवेशिक युग की शिक्षा सामग्री स्वतंत्रता के बाद भी कई दशकों तक विरासत की तरह पीढ़ी–दर–पीढ़ी हम पर थोपी गई। इसका परिणाम ये हुआ कि आजादी के ७५ साल बाद भी हम आत्म–संदेह और हीन भावना से पीडि़़त मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाए हैं। आज वैश्विक राजनीति से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक भारत का महkव ब्रिटेन से कहीं अधिक है‚ लेकिन मानसिक दासता की बीमारी का इलाज अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। शायद यही वजह है कि देश में एक पक्ष ऐसा भी है जो नाम बदलने और गुलामी के प्रतीक हटाने की प्रक्रिया को निरर्थक‚ समय–धन का अपव्यय और मुद्दों से ध्यान भटकाने की कवायद बताकर इसका विरोध करता रहा है। दलील ये है कि किसी राष्ट्र के इतिहास को मिटाया जाना ठीक नहीं है क्योंकि भले ही यह हमें अपनी गुलामी की याद दिलाता हो‚ लेकिन इसका भी एक सकारात्मक मूल्य है जो हमें शोषण का डटकर सामना करने और अपने काले अतीत को सुनहरे भविष्य में बदलने की प्रेरणा देता है। आने वाला कल यदि गुजरे हुए कल के संदर्भ में देखा जाएगा‚ तो यह और भी अधिक सार्थक होगा।

इस सबके बीच गुलामी की यादें मिटाने वाले तमाम फैसले ‘कमजोर अतीत’ के अवशेषों को दूर करने के साथ ही एक नये भारत के आत्मगौरव को पुनर्जीवित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के समूचे सार्वजनिक जीवन का विश्लेषण किया जाए तो यह बात स्पष्ट हो जाती है कि भारत को लेकर वो जिस तरह की बातें करते हैं‚ वह एक ऐसे नये भारत की बातें होती हैं जो पहले से कहीं अधिक मजबूत‚ अधिक आत्मनिर्भर है और जिस पर अब आसानी से किसी तरह की राय नहीं थोपी जा सकती। हर देश की विकास यात्रा में एक समय ऐसा आता है जब देश खुद को नये सिरे से परिभाषित करता है। खुद को नये संकल्पों के साथ आगे बढ़ाता है। आज के भारत के संकल्प और लक्ष्य अपने हैं और अब ये अपने लिए नये प्रतीक भी गढ़ रहा है। गुजरे हुए कल को छोड़कर नया भारत आत्मविश्वास की आभा के साथ आने वाले कल की तस्वीर में नया रंग भर रहा है। तभी तो प्रधानमंत्री ने इसे निरंतर चलने वाली संकल्प यात्रा बताया है।

वैसे देखा जाए तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दरअसल उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है‚ जिसकी बुनियाद स्वामी विवेकानंद और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जैसे महान विचारकों ने अपने समय में औपनिवेशिक oष्टि के प्रभुत्व को चुनौती देकर रखी थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से लेकर श्री अरबिंदो तक लगभग सभी राष्ट्रवादी विचारकों ने इस परंपरा की ज्योति को प्रज्ज्वलित रखा। बापू का ‘हिंद स्वराज’ इसका एक बड़ा प्रमाण है।

बहरहाल आजादी के ७५ साल बाद ही सही‚ लेकिन उपनिवेशवाद और उसके प्रतीक अब चर्चा के केंद्र में हैं। यह आजादी हमें आसानी से नहीं मिली है। देश ने इसके लिए सदियों तक संघर्ष किया‚ गुलामी की कसक और आजादी की ललक के बीच कई जय–पराजय देखी है‚ लेकिन आजादी की आकांक्षा को कभी खत्म नहीं होने दिया। संघर्षो और बलिदानों की पराकाष्ठा से हासिल आजादी में बेशक हमने राजनीतिक और आर्थिक उपनिवेशवाद पर काबू पा लिया है‚ लेकिन सांस्कृतिक और बौद्धिक गुलामी आज भी चुनौती बनी हुई है। इस मायने में हमारी स्वतंत्रता अभी भी अधूरी ही कही जाएगी। इस मानसिकता से मुक्ति में ही सही मायनों में आजादी के अमृत महोत्सव की सार्थकता है।

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

गुजरात में बाढ़ का कहर!

गुजरात में बाढ़ का कहर!

by UB India News
July 24, 2026
0

दक्षिण गुजरात के एक बड़े हिस्से में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। प्रभावित इलाकों...

पेपर लीक और नकलचियों के खिलाफ मोदी कैबिनेट में आज कड़ा प्रस्ताव लाने की तैयारी……….

पेपर लीक और नकलचियों के खिलाफ मोदी कैबिनेट में आज कड़ा प्रस्ताव लाने की तैयारी……….

by UB India News
July 24, 2026
0

पेपर लीक और नकल के खिलाफ मौजूदा कानून को और सख्त करने की तैयारी की जा रही है. सूत्रों के...

रात 11.04 से 12.32 तक… 88 मिनट में NEET पेपर लीक पर 4 बड़े एक्शन…………

रात 11.04 से 12.32 तक… 88 मिनट में NEET पेपर लीक पर 4 बड़े एक्शन…………

by UB India News
July 24, 2026
0

नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच गुरुवार...

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण की बड़ी बातें ……………..

क्या है ‘सेक्शन 301’ जिसके सहारे डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के 17 देशों पर फोड़ा टैरिफ बम………….

by UB India News
July 24, 2026
0

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडिल ईस्ट तनाव के बीच बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने फोर्स्ड लेबर (जबरन मजदूरी) से जुड़े उत्पादों...

पीएम मोदी ने सांसदों से महिला आरक्षण बिल के समर्थन में वोट मांगा, संसद में बहस जारी , शाम चार बजे होगी वोटिंग………

पीएम का रात 12 बजे छात्रों के लिए वीडियो संदेश , आज की कैबिनेट बैठक में होगा सख्त कार्रवाई का फैसला……….

by UB India News
July 24, 2026
0

प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार आधी रात 12 बजे छात्रों के लिए वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि सरकार पेपर...

Next Post
नीतीश को फ्रंट पर कर बैक से बैटिंग कर रहे आरजेडी प्रमुख

नीतीश को फ्रंट पर कर बैक से बैटिंग कर रहे आरजेडी प्रमुख

कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव से पहले चुनाव प्रक्रिया में बदलाव के क्या है मायने ………

कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव से पहले चुनाव प्रक्रिया में बदलाव के क्या है मायने .........

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend