देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से बड़ी खबर सामने आई है. राज्य में सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी ने भूपेंद्र सिंह चौधरी ( Bhupendra Singh appointed as Uttar Pradesh BJP president ) के यूपी भाजपा का नया अध्यक्ष बनाया है. भूपेंद्र सिंह चौधरी की पहचान जाट नेता के रूप में होती है। भूपेंद्र चौधरी की जाट बिरादरी और पश्चिमी यूपी में मजबूत पकड़ है। भूपेंद्र सिंह की पकड़ का ही नतीजा रहा कि यूपी के पिछले चुनाव में बीजेपी ने भले ही पूर्वांचल में उम्मीद के अनुसार सफलता नहीं हासिल की लेकिन पश्चिमी यूपी मे किसान आंदोलन के बाद भी शानदार जीत मिली थी। इस जीत का भूपेंद्र चौधरी को इनाम भी मिला।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश (जेपी) नड्डा ने गुरुवार को भूपेन्द्र सिंह को भाजपा उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष नियुक्त किया है। भूपेन्द्र सिंह को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने बुधवार को नई दिल्ली बुलाया था। इसके बाद से ही उनके इस पद पर आसीन होने की अटकलें लगने लगी थीं।
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भपेन्द्र सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ ही रुहेलखंड क्षेत्र की राजनीति में काफी सक्रिय हैं। इन्होंने 1989 में भाजपा सदस्यता ली थी। इसके बाद से ही पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में लगे रहे। धीर-गंभीर स्वाभाव के भूपेन्द्र सिंह का विवादों से कोई नाता नहीं है। पार्टी लाइन पर चलने वाले चौधरी भूपेन्द्र सिंह को भाजपा के थिंक टैंक माने जाने वाले अमित शाह का करीबी माना जाता है।
- भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह के बारे में जानें
- -भूपेंद्र सिंह का जन्म मुरादाबाद की कांठ तहसील के गांव महेंद्री सिकंदरपुर में तीन जून, 1967 को किसान परिवार में हुआ
- -प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राइमरी स्कूल से हुई। 12वीं तक पढ़ाई उन्होंने आरएन इंटर कालेज मुरादाबाद में की
- -बीए प्रथम वर्ष हिंदू कालेज मुरादाबाद से की।
- -राम मंदिर आंदोलन के दौरान 1989-90 में भाजपा से जुड़े। इस दौरान कई बार जेल भी गए।
- -1993 में भाजपा जिला कार्य समिति में सदस्य बनाए गए।
- -1994 में जिला कार्यकारिणी के कोषाध्यक्ष बने और फिर 1995 में जिला महामंत्री।
- -1996 से 2000 तक भाजपा जिलाध्यक्ष रहे।
- -1999 में सम्भल संसदीय सीट से मुलायम सिंह के मुकाबले चुनाव लड़े, हालांकि जीत नहीं सके।
- -2000 में विभाग संयोजक और 2007 में क्षेत्रीय मंत्री बनाए गए।
- -2009 में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के रूप में मुरादाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ा, पर जीत नहीं पाए।
- -2010 से 2018 तक वह चार बार क्षेत्रीय अध्यक्ष रहे।
- -2016 में उन्हें विधान परिषद भेजा गया, छह जुलाई,2022 को कार्यकाल पूरा होने पर दोबारा विधा्नपरिषद निर्वाचित हुए।
- -2017 के चुनाव में उनके नेतृत्व में पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शानदार प्रदर्शन किया
- – 2017 में योगी सरकार बनने पर पर पंचायती राज राज्य मंत्री बनाए गए। 2019 में इसी विभाग के कैबिनेट मंत्री बने। मौजूदा सरकार में भी वह पंचायती राजमंत्री हैं
चौधरी भूपेन्द्र सिंह ने विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता के रूप में भी काफी काम किया है।
बता दें कि स्वतंत्र देव सिंह के मंत्री बनने और उनके इस्तीफे के बाद से ही यूपी प्रदेश अध्यक्ष का पद खाली चल रहा था. इस बात के संकेत बुधवार शाम को ही मिल गए थे जब उन्हें अचानक दिल्ली तलब किया गया. दिल्ली में उनकी मुलाक़ात राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ ही तमाम बड़े नेताओं से भी हुई. दरअसल, भारतीय जनता पार्टी में एक पद एक व्यक्ति का सिद्धांत है. पिछले दिनों स्वतंत्र देव सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था.
पश्चिम के सियासी समीकरणों को साधने की कोशिश
भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व पश्चिम के सियासी समीकरणों को साधने के लिए उन्हें अध्यक्ष बनाया है. पश्चिमी यूपी में समाजवादी पार्टी के गठबंधन को कमजोर करने की भी यह रणनीति है. 2022 के विधानसभा चुनाव में भी कहा जा रहा था कि पश्चिम में जाट विरादरी बीजेपी से नाराज है, तब भूपेंद्र चौधरी ने ही अहम भूमिका निभाई थी और जब परिणाम आया तो पार्टी को कुछ खास नुकसान नहीं हुआ.
कौन हैं भूपेंद्र चौधरी?
भूपेंद्र चौधरी अमित शाह के करीबी माने जाते हैं. आरएसएस की पृष्ठभूमि से आने वाले भूपेंद्र चौधरी बीजेपी के पश्चिम क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष भी रहे हैं. भूपेंद्र चौधरी ने विश्व हिंदू परिषद से अपनी राजनीति शुरू की थी. मुरादाबाद के रहने वाले भूपेंद्र चौधरी बीजेपी की जिला कार्यकारिणी के सदस्य भी रहे हैं. अमित शाह जब यूपी में प्रभारी बनकर आए इसके बाद भूपेंद्र चौधरी को अपने साथ तमाम चुनावी अभियानो में लगाया. वहीं महामंत्री संगठन सुनील बंसल के भी भूपेंद्र चौधरी काफी करीबी माने जाते हैं. पिछले दिनों पश्चिमी यूपी में जाट आंदोलन को खत्म करने के लिए भूपेंद्र चौधरी ने कमान संभाली थी. भूपेन्द्र चौधरी बीजेपी से एमएलसी और योगी सरकार में दूसरी बार पंचायती राज मंत्री हैं.







