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सारण में अब तक 13 लोगों की मौत, पांच का आइसीयू में इलाज, परिजनों का दावा- शराब पीने से गयी है जान

UB India News by UB India News
August 7, 2022
in Lokshbha2024, खास खबर, दुर्घटना
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सारण में अब तक 13 लोगों की मौत, पांच का आइसीयू में इलाज, परिजनों का दावा- शराब पीने से गयी है जान
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मकेर थाना क्षेत्र के भाथा और सोनहों में संदिग्ध स्थिति में बीमार छह और लोगों की मौत शुक्रवार को हो गयी. इनका इलाज पीएमसीएच में चल रहा था. इस मामले में और डेढ़ दर्जन लोग बीमार बताये जा रहे हैं, जिनमें पांच पीएमसीएच के आइसीयू में भर्ती हैं. इस तरह दो दिनों में 13 लोगों की मौत हो गयी है. मृतकों के परिजनों का दावा है कि सभी मौत शराब पीने से हुई है. इधर, एसपी ने मकेर के थानाध्यक्ष नीरज मिश्रा और फुलवरिया के चौकीदार मुन्ना मांझी को जहरीला पेय पदार्थ की बिक्री रोकने के प्रति उदासीनता और लापरवाही मानते हुए निलंबित कर दिया है.

दो दिनों में 13 लोगों की संदिग्ध स्थिति में मौत
डीएम राजेश मीणा व एसपी संतोष कुमार ने भाथा गांव में 11 लोगों की मौत की पुष्टि की है. इसमें भाथा गांव के मृतकों में विश्वनाथ महतो, चंदेश्वर महतो, कामेश्वर महतो और लखन महतो शामिल हैं. सभी की उम्र 30 से 50 वर्ष के बीच बतायी जा रही है. वहीं, दो अन्य मृतक मकेर के सोनहों गांव के हैं. हालांकि, प्रशासन उनकी मौत की सूचना नहीं होने की बात कह रहा है. सोनहों के मृतकों में जगरनाथ साह के पुत्र नंदकिशोर प्रसाद व सत्यनारायण साह के पुत्र जितेंद्र साह शामिल हैं. इस तरह दो दिनों में 13 लोगों की मौत हो गयी है.

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पांच शराब धंधेबाजों पर दर्ज करायी प्राथमिकी
इस घटना के बाद भाथा गांव के मृत राजनाथ महतो के पुत्र अमरजीत कुमार ने मकेर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है. उसने भेल्दी थाने के किचपुर गांव के पांच शराब धंधेबाजों को अपने पिता व अन्य लोगों की मौत का जिम्मेदार बताया है. उधर, एक के बाद लोगों की मौत की खबर पटना से पहुंचने के बाद भाथा गांव में लगातार दूसरे दिन भी कोहराम मचा रहा. वहीं, पटना से मद्य निषेध के आइजी अमृत राज, मद्य निषेध के संयुक्त आयुक्त कृष्णा पासवान, एसपी विनय तिवारी ने पहुंच कर डीएम व एसपी से स्थिति का जायजा लिया. साथ ही वरीय पदाधिकारियों ने डीएम व एसपी को कई आवश्यक निर्देश दिये.

पेट दर्द के बाद आंखों की रोशनी हुई कमजोर
पीएमसीएच के प्रिंसिपल डॉ विद्यापति चौधरी ने बताया कि छपरा जिला अस्पताल से आने वाले मरीजों में एक तरह के लक्षण दिखे. सभी के पेट में दर्द, बेचैनी, आंखों में पीलापन था. इसके अलावा कुछ मरीज आंखों की रोशनी कमजोर होने की बात भी कह रहे थे. हालांकि सभी मरीजों की मौत कैसे हुई पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पुष्टि की जायेगी. उन्होंने बताया कि आइसीयू में भर्ती मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है. विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में इलाज चल रहा है.

संयुक्त आयुक्त कर रहे जांच, रिपोर्ट आज
सारण जिले में संदिग्ध मौत के मामले की जांच मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग भी कर रहा है. अपर मुख्य सचिव केके पाठक के निर्देश पर विभाग के संयुक्त आयुक्त श्रीकृष्ण पासवान को मामले की जांच के लिए भेजा गया है. वे शनिवार को अपनी रिपोर्ट देंगे, जिस पर विभाग के स्तर से आगे निर्णय लिया जायेगा. इस मामले में सारण जिला प्रशासन से भी रिपोर्ट मांगी गयी है.

पुलिस का इंटेलिजेंस फेल रहा

जहरीली शराबकांड की पड़ताल में एक बड़ा खुलासा भी हुआ है। पुलिस ने शराब को लेकर 5 महीने में 1710 केस तो दर्ज किया, लेकिन तस्करों की जड़ खंगालने में वह फेल रही है। पुलिस का सूचना तंत्र फेल होने से शराबबंदी कानून पर सवाल खड़े हुए हैं। सावन के अंतिम सप्ताह में हर साल पूजा होती है, जिसमें प्रसाद के रूप में शराब का सेवन होता है।

ऐसे इनपुट के बाद भी पुलिस का इंटेलिजेंस फेल रहा। जहरीली शराब कांड के बाद अफसरों ने थानेदार को सस्पेंड कर दिया है, लेकिन चूक कहां से हुई यह अब तक साफ नहीं हो पाया है। भास्कर की पड़ताल में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हर साल सावन में शराब चढ़ती है, लेकिन पुलिस का सूचना तंत्र फेल है।

सारण में पुलिस की बड़ी लापरवाही

जहरीली शराब कांड में सारण पुलिस की बड़ी चूक सामने आई है। पुलिस कागजों में कार्रवाई करती रही, लेकिन जमीनी स्तर पर कानून की सख्ती को लेकर कोई काम नहीं किया गया। पटना हाई कोर्ट के सीनियर एडवोकेट मणिभूषण प्रताप सेंगर ने बिहार पुलिस से शराब से होने वाली मौत और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सूचना मांगी थी। इस क्रम में छपरा पुलिस अधीक्षक कार्यालय से दी गई जानकारी में बताया गया है कि 1 जनवरी 2022 से 25 मई 2022 तक शराब के व्यापार और निर्माण में 1710 मुकदमा दर्ज किया गया है।

इतना ही 1 जनवरी 2020 से 25 मई 2022 तक 7753 मुकदमा दर्ज किया गया है। एडवोकेट का कहना है कि बिहार में शराबबंदी है, लेकिन पुलिस सिर्फ केस दर्ज कर औपचारिकता पूरी करती है। सरकार संसाधन दे रही है, शराबबंदी कानून का पालन कराने के लिए पुलिस को सुविधाएं दी जा रही हैं। इसके बाद भी जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।

जहां शराब से हो रही मौत, वहां तस्करों की सक्रियता

  • 2020 में शराब के व्यापार और निर्माण में 2363 मुकदमा
  • 2021 में शराब के व्यापार और निर्माण में 3680 मुकदमा
  • 1 जनवरी 2022 से 25 मई 2022 तक 1710 मुकदमा
  • 1 जनवरी 2020 से 25 मई 2022 तक 7753 मुकदमा

शराबबंदी में पुलिस का इंटेलिजेंस देखिए

छपरा के फुलवरिया पंचायत स्थित भाथा नोनिया टोली में शराब के कहर के पीछे पुलिस की लापरवाही की बड़ी वजह सामने आई है। हर साल सावन के अंतिम बुधवार को गांव की देवी की पूजा होती है, जिसमें शराब चढ़ाया जाता है। इस साल भी प्रसाद वाले शराब को पीकर 11 लोगों की जान चली गई और 15 लोगों के आंखों की रोशनी चली गई।

अब सवाल यह है कि हर साल सावन में पूजा के दौरान शराब चढ़ाया जाता है, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। पुलिस का सूचना तंत्र पूरी तरह से फेल रही है। गांव के लोगों का कहना है कि सावन के अंतिम बुधवार को हर घर में पूजा होती है और अधिकतर लोग शराब चढ़ाते हैं। पुलिस को भी इसकी जानकारी होती है, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

एक के बाद एक मौत ने खोला राज

छपरा में जहरीली शराब से मौत ने शराबबंदी कानून का राज खुल गया है। शराब से मौत का सिलसिला जारी हुआ तो पुलिस के होश उड़ गए। मौत का आंकड़ा 11 पहुंचा तो थानेदार को सस्पेंड कर दिया गया। जबकि ऐसे मामलों में थानेदार ही नहीं बल्कि लापरवाही का पूरा नेटवर्क होता है।

बीट के सिपाही लेकर लोकल इंटेलिजेंस के फेल होने का बड़ा मामला है और ऐसे मामलों में सीधे अफसरों की जवाबदेही होती है। घटना के बाद अब पुलिस अधीक्षक भी मान रहे हें कि पूजा में शराब का सेवन किया गया। अब जहरीली शराब कांड में उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा रही है। बताया जा रहा है कि पुलिस मौत की संख्या बढ़ने तक गंभीर नहीं थी।

गांव में बंट रही थी प्रसाद वाली शराब

छपरा के गांव में प्रसाद वाली शराब बांटी जा रही थी लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लग। जब तक मौत का आंकड़ा नहीं बढ़ा पुलिस मौन पड़ी रही। गांव वालों का पुलिस के प्रति आक्रोश बता रहा है कि पुलिस ने बड़ी मनमानी की है। पुलिस पर पथराव से यह साफ हो गया है कि इस घटना में पुलिस की बड़ी चूक है। पुलिस अगर गंभीर रहती तो जहरीली शराब कांड से बचा जा सकता था। अस्पताल में पीड़ितों ने बताया कि गांव में पूजा के बाद शराब बांटी जा रही थी लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस कारण ही मौत का तांडव हुआ है।

 

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