सूबे में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता वाली स्थिति पैदा हो गयी है। सेना में भर्ती की नयी योजना ‘अग्निपथ’ को वापस लेने की मांग को लेकर मंगलवार को विधानमंड़ल के दोनों सदनों में विपक्षी दलों के सदस्यों ने जमकर हंगामा किया। इस बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता धर्मेन्द्र प्रधान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण जहां विधानसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़़ी‚ वहीं विधान परिषद की कार्यवाही दोपहर के बाद दिनभर के लिए स्थगित कर दी गयी। विधानसभा में भोजनावकाश के बाद उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गयी‚ जब राजद नेताओं के साथ जदयू के सदस्यों ने भी सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। सदन में सिर्फ भाजपा के ही सदस्य रह गये थे। जदयू के शीला मंड़ल‚ सुनील कुमार एवं विधायक गोपाल मंड़ल सदन में आये‚ किंतु उन्हें तत्काल बुला लिया गया। इसके बाद जदयू विधायकों एवं मंत्रियों की बैठक श्रवण कुमार के कक्ष में हुई। सदन के इतिहास में १६ वर्षों में पहली बार सत्ताधारी जदयू ने ऐसा कदम उठाया। सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राजद और कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष के सदस्यों ने अपनी मांग को लेकर शोर–शराबा शुरू कर दिया। सभाध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने सदस्यों से अपनी सीट पर बैठने की अपील करते हुए कहा कि विपक्षी सदस्यों द्वारा उठाया जा रहा मुद्ा इस सदन से संबंधित नहीं है। विधानसभा में इस पर कोई अराजकता पैदा करना अनुचित है। उन्होंने सदस्यों से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने देने का अनुरोध किया‚ लेकिन सदस्य नहीं माने और लगातार सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। हंगामे के बीच सभाध्यक्ष ने प्रश्नकाल शुरू किया‚ लेकिन लगातार हंगामा जारी रहने के कारण उन्होंने कार्यवाही दोपहर १२ बजे तक के लिए स्थगित कर दी। उन्होंने विधायक दलों के सभी नेताओं को अपने कक्ष में मिलने के लिए कहा। १२ बजे जब दोबारा सदन की कार्यवाही शुरू हुई‚ तो विपक्षी सदस्यों ने सभाध्यक्ष के कक्ष में हुई बैठक के परिणाम के बारे में जानना चाहा। उनके शोर के बीच अध्यक्ष ने भाकपा–माले के सदस्य महबूब आलम और अन्य के कार्यस्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इस बीच‚ विपक्षी सदस्य केंद्र और राज्य सरकार के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए सदन के बीच में आ गये। हंगामा करने वाले सदस्यों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस मुद्े पर अपनी चुप्पी तोड़ने की मांग की। सदन को अव्यवस्थित होते देख सभाध्यक्ष ने कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। कार्यवाही जब पुनः शुरू हुई‚ तो राजद के साथ जदयू ने भी कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। महज भाजपा के ही सदस्य सदन में पहुंचे। सिर्फ भाजपा सदस्यों की उपस्थिति में ही स्पीकर ने कार्यवाही शुरू की। उन्होंेने सामान्य लोकहित के विषय उत्कृष्ट विधानसभा एवं विधायक के स्वरूप निर्धारण पर विमर्श शुरू किया। संजय सरावगी ने विमर्श की शुरुआत की। कुछ ही देर बाद अध्यक्ष को एहसास हुआ कि केवल भाजपा के ही सदस्य सदन में हैं‚ तो उन्होंने बुधवार तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी।
30 सालों तक तक भगवा रंग रंगी बांकीपुर कैसे पीले रंग से सरोबार हो गई ……………….
बिहार की राजनीति लंबे समय से राजद के हरे और भाजपा के भगवा रंग के इर्द-गिर्द घूमती रही है। अब,...







