पूर्वोत्तर के सबसे प्रमुख राज्य असम में हालांकि नदियों का जलस्तर उतार पर है लेकिन बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। राज्य के करीब २५ लाख लोग अब भी बाढ़ग्रस्त हैं‚ और राहत की कोई उम्मीद बारिश न होने और बाढ़ का पानी घटने पर ही टिकी हुई हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित कछार जिले के सिलचर का दौरा किया है‚ और बराक घाटी शहर में बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया। बाढ़ प्रभावित २७ जिलों में २५ लाख से अधिक लोग अभी भी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं‚ जिनमें २‚८९४ गांव शामिल हैं। २.३३ लाख लोगों ने पिछले दो सप्ताह से बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहे राज्य के ६३७ राहत शिविरों में शरण ले रखी है। एनड़ीआरएफ‚और एसड़ीआरएफ‚ दमकल और आपातकालीन सेवाओं के कर्मचारी‚ पुलिस और एएसड़ीएमए के स्वयंसेवक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। राज्य में इस साल बाढ़ और भूस्खलन में जान गंवाने वालों की संख्या १२१ हो गई है। नगांव के धरमतुल में कोपिली नदी‚ करीमगंज में बीपी घाट पर बराक और कछार में एपी घाट तथा करीमगंज शहर में इसकी सहायक कुशियारा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। अपने सिलचर दौरे में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने स्वीकार किया कि प्रशासन अब तक सभी प्रभावित लोगों तक नहीं पहुंच सका है। इससे राज्य की जनता के कष्टों का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह संभव नहीं है कि सभी व्यक्तियों तक पहुंचा जाए‚ मुख्यमंत्री बाढग्रस्त लोगों के इन आरोपों का सामना कर रहे हैं कि जब हमें मदद की जरूरत है‚ उस समय असम सरकार गुवाहाटी के पांच सितारा होटल में डे़रा जमाए महाराष्ट्र के बागी शिवसेना विधायकों की आवभगत और सुरक्षा में व्यस्त है। असम में हर साल मानसून राज्य पर बाढ़ और भूस्खलन का कहर बरपाता है लेकिन इस बार की बाढ मानसून नहीं अपितु जलवायु परिवर्तन के कारण बिगड़़ रही परिस्थितियों का प्रमाण है। इस बाढ़ के लिए लोग तैयार नहीं थे। एकाएक बाढ़ आना और लंबे समय तक सूखे की स्थिति बनी रहना इस पूरे इलाके की पहचान बन रही है। ये हालात तो तब हैं जब अभी मानसून ठीक से आया भी नहीं है। कहना न होगा कि अभी असम को मानसूनी वर्षा की बाढ़ के लिए तैयार रहना है।
धरना-प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर की जगह कोई और स्थान हो?
सुप्रीम कोर्ट में आज दाखिल एक याचिका में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का मुद्दा भी उठ गया. दरअसल, याचिका में अपील...







