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जो इतिहास अब लिखा जाएगा क्या वह विवादों से दूर रह पाएगा…………

UB India News by UB India News
June 13, 2022
in Lokshbha2024, खास खबर, राष्ट्रीय, संपादकीय
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जो इतिहास अब लिखा जाएगा क्या वह विवादों से दूर रह पाएगा…………
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किसी देश का इतिहास उसके अपने ही विद्वानों का लिखा हुआ हो तो इससे बेहतर क्या हो सकता है। लेकिन दुनिया के भारत सरीखे अधिकांश देशों की विडम्बना रही है कि उनका अधिकांश समय किसी अन्य बाहरी शक्ति के आधिपत्य में बीता है। इसके अलावा, रजवाड़ों और नवाबों का क्षेत्रीय आधिपत्य भी था। ऐसी स्थिति में जो इतिहास लिखा जाता है वह आधिपत्यकारी शक्तियों की सहमति से और उन्हें खुश करने के लिए लिखा जाता है।

ऐसी सूरत में बहुत से तथ्य उपेक्षित कर दिए जाते हैं। खासकर तब जब आधिपत्य से मुक्ति के बाद किसी देश के विद्वान खुद इतिहास लेखन शुरू करते हैं। इस लेखन पर भी विचारधारा और राजनीति का असर रहता है। ऐसा इतिहास सबको संतुष्ट नहीं कर सकता। ऐसी सूरत में देश की सत्ता पर काबिज दल की भूमिका महत्त्वपूर्ण हो जाती है। वर्तमान में यह जिम्मेदारी उठा रही भाजपा भारत के पूर्व लिखित इतिहास से संतुष्ट नहीं है। यह बात समय-समय पर जाहिर होती रही है।

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के वक्तव्य से इसका इशारा मिलता है। पिछले शुक्रवार को ‘महाराणा: सहस्र वर्षो का धर्मयुद्ध’ पुस्तक का विमोचन करने के बाद अपने संबोधन में उन्होंने लेखकों व इतिहासकारों का आह्वान किया कि वे इतिहास पर टीका -टिप्पणी छोड़कर देश के गौरवशाली इतिहास को संदर्भ ग्रंथ के रूप में जनता के सामने रखें। ‘हमें कोई नहीं रोकता है, हमारा इतिहास लिखने से। अब हम स्वाधीन हैं।

किसी के मोहताज नहीं हैं। हम हमारा इतिहास खुद लिख सकते हैं।’ उनके अनुसार इतिहास की कई गौरवशाली घटनाओं से समय की धूल को ढंग से हटाकर तेजस्विता को लोगों के सामने लाने का काम इस किताब के माध्यम से किया गया है। इससे गलत धारणाएं समाज से निकल जाएंगी। इतिहास लिखने वालों ने साम्राज्यों का जब भी जिक्र किया तो मुगल साम्राज्य की ही चर्चा की।

पांड्य साम्राज्य 800 साल, अहोम साम्राज्य 650 साल, पल्लव साम्राज्य 600 साल, चालुक्य साम्राज्य 600 साल, मौर्य साम्राज्य 500 साल और गुप्त साम्राज्य 400 साल तक चले। मगर इन सब पर कोई संदर्भ ग्रंथ नहीं लिखा गया। अब इन पर संदर्भ ग्रंथों की रचना की जानी चाहिए। जो इतिहास हम मानते हैं गलत है, वह अपने आप निकल जाएगा। बाजीराव पेशवा और सावरकर सहित कई लोगों के साथ न्याय नहीं हुआ। देखना है कि जो इतिहास अब लिखा जाएगा क्या वह विवादों से दूर रह पाएगा।

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