कृषि मंत्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने मंगलवार को राज्यस्तरीय खरीफ कर्मशाला का उद्घाटन करते हुए कहा कि खरीफ महाभियान का उद्ेश्य किसानों को खरीफ फसलों की तकनीकी जानकारी देना‚ फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करना‚ मौसम के अनुकूल कृषि कार्यक्रम के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना तथा जैविक खेती को प्रोत्साहन देना है। इसके अतिरिक्त खरीफ मौसम में कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी देने के साथ–साथ विशेष दलहन एवं तेलहन बीज वितरण कार्यक्रम का प्रचार–प्रसार करना है। उन्होंने कहा कि २६ मई को सभी जिला मुख्यालय में जिलास्तरीय खरीफ कर्मशाला–सह–प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। इसी क्रम में २७ मई से १० जून तक सभी प्रखण्ड मुख्यालय में प्रखण्डस्तरीय प्रशिक्षण–सह–उपादान वितरण कार्यक्रम का आयोजन होगा। प्रखण्ड स्तर पर प्रथम दिन लाभार्थी–किसान को कृषि की उन्नत तकनीकी से संबंधित प्रशिक्षण एवं कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के संबंध में जानकारी दी जायेगी और दूसरे दिन कृषि योजनाओं के लिए अनुदान पर उपादान वितरण किया जायेगा। मंत्री द्वारा बामेती के सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय खरीफ कर्मशाला का उद्घाटन किया। साथ ही‚ उनके द्वारा दलहन की वैज्ञानिक खेती‚ तेलहन की वैज्ञानिक खेती तथा समेकित कृषि प्रणाली पुस्तिका का विमोचन किया।
उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा ६ से ३१ मई तक अभियान चलाकर मिट्टी नमूनों का संग्रहण कर जांच के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया जायेगा। मंत्री ने बताया कि १४ मई से खरीफ मौसम २०२२ में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत बीज प्राप्ति के लिए किसानों से ऑन–लाईन आवेदन लिया जा रहा है‚ जो २५ मई तक चलेगा तथा २८ मई तक बीज वितरण किया जायेगा। उन्होंने कहा कि जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत राज्य के १९० गांवों में २२‚६१० एकड में जलवायु अनुकूल कृषि तकनीक का प्रत्यक्षण आयोजित किया जायेगा।
जलावायु अनुकूल कृषि संबंधित गाँव में इस खरीफ मौसम में ५०‚००० किसानों का परिभ्रमण आयोजित किया जायेगा। श्री सिंह ने कहा कि यांत्रिकरण योजना के अंतर्गत इस वर्ष पॉयलट आधार पर ब्रिकेट मेेकिंग मशीन को शामिल किया गया है‚ जिससे फसल अवशेष प्रबंधन करने में मदद मिलेगी। राज्य में कृषि विभाग द्वारा “जल–जीवन–हरियाली” अभियान में शामिल सूक्ष्म सिंचाई कार्यक्रम एवं भूमि संरक्षण की योजनाओं को बढावा दिया जा रहा है। बागवानी विकास के लिए खरीफ मौसम में ११‚०२५ एकड में वैज्ञानिक तरीके से बागवानी करने के लिए किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जायेगी‚ जिसमें से ५‚१२५ एकड में केला‚ ६६२ एकड में पपीता‚ १७५० एकड में आम‚ २६२ एकड में लीची का नया बागवान लगाने के लिए निःशुल्क पौध सामग्री उपलब्ध कराई जायेगी।
इस कार्यक्रम में कृषि विभाग के विशेष सचिव रवीन्द्रनाथ राय‚ विशेष सचिव बिजय कुमार‚ षि निदेशक डॉ आदित्य प्रकाश‚ निदेशक उद्यान नन्द किशोर‚ निदेशक‚ अपर निदेशक (शष्य) धनंजयपति त्रिपाठी‚ भूमि संरक्षण बैंकटेश नारायण सिंह‚ निदेशक पीपीएम अशोक प्रसाद‚ निदेशक बसोका सुनील कुमार पंकज सहित मुख्यालय एवं क्षेत्र के अन्य पदाधिकारीगण उपस्थित थे।







