मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोरोना वायरस को प्राकृतिक नहीं‚ बल्कि आर्टिफिशियल बताया और कहा कि इसका समाधान निकालना नितांत आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने रविवार को उप राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और राज्यपाल फागू चौहान की उपस्थिति में नालंदा विश्वविद्यालय के सुषमा स्वराज ऑडिटोरियम में नालंदा विश्वविद्यालय एवं इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ‘धर्म–धम्म सम्मेलन’ में कहा‚ ‘पूरी दुनिया दो वर्षों तक कोरोना की चपेट में थी। अब देखना है कि यह आगे न हो। सम्मेलन में इस पर गंभीरता से चर्चा की जायेगी। यह नेचुरल नहीं‚ बिल्कुल आर्टिफिशियल बीमारी है। इसकी शुरुआत चीन के वुहान से हुई। चीन जितनी बात बतायेगा‚ लोग तो उतना ही न जानेंगे। मुझे पूरा भरोसा है कि इस विषय पर सम्मेलन में सकारात्मक चर्चा होगी।’
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल कोरोना का समाधान निकालना नितांत आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड एक विचित्र तरह की बीमारी है‚ जिसकी चपेट में पूरी दुनिया थी। आज तक ऐसी बीमारी नहीं हुई। इस प्रकार की बीमारी के बारे में न तो बुजुर्गों से कभी सुनने को और न ही इतिहास में पढ़ने को मिला। कोविड महामारी से बचाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हमेशा दिशा–निर्देश प्राप्त होता रहा। सभी राज्यों से भी बातचीत होती रही। इस महामारी की दो लहर समाप्त हो गई‚ लेकिन तीसरी लहर का खतरा बना रहता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस धर्म–धम्म सम्मेलन में कोविड महामारी से बचाव को लेकर चर्चा होगी कि कैसे इस समस्या का समाधान निकाला जाये। पूरी दुनिया मे इतना टीकाकरण नहीं हुआ‚ जितना अब तक भारत में हो चुका है। भारत में १०७ करोड़ से अधिक लोगों का टीकाकरण हो चुका है।
बिहार में पांच करोड़ से अधिक लोगों को पहला डोज लगाया जा चुका है और दो करोड़ लोगों का दूसरे राउंड का टीकाकरण हो चुका है। उन्होंने कहा कि २८ तारीख को और आज भी टीकाकरण के लिए विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब २६ नवम्बर २००५ को हमें काम करने का मौका मिला‚ तो मैंने वर्ष २००७ में अंतर्राष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय को पुनस्र्थापित करने का निर्णय लिया। वर्ष २०१६ में तत्कालीन राष्ट्रपति ने इसका शिलान्यास किया था। आज उन्हें यहां आकर देखने के बाद काफी खुशी हो रही है। मैं तो चाहूंगा कि शेष काम भी जल्दी से पूरा हो जाये। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य विश्वविद्यालय नहीं है। प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय में दुनिया भर के दस हजार से अधिक छात्र अध्ययन करते थे। मैं चाहता हूं कि यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर का हो। काफी प्रयास के बाद हमने यहां स्थल का चयन किया था। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय अंतर्राष्ट्रीय स्तर का होगा और पुनः दुनिया भर के लोग यहां पढ़ेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजगीर एक पौराणिक स्थल है। दुनिया के एक बड़े हिस्से की यहां पंच पर्वत के बीच राजधानी थी। महात्मा बुद्ध ज्ञान प्राप्ति के क्रम में यहां से गुजरे थे और ज्ञान प्राप्ति के बाद यहां आकर लोगों को उपदेश देते थे। यहां के पर्वतों पर भगवान महावीर का सबसे ज्यादा मंदिर है। सूफी संत मखदूम साहब ने यहां के पर्वतों पर २२ वर्षों तक अध्ययन किया था‚ जहां मखदूम कुंड अवस्थित है। जरासंध का अखाड़ा भी यहीं है। गुरुनानक देव जी यहां आये और लोगों के आग्रह पर उन्होंने यहां शीतल कुंड स्थापित किया था। हर तीन साल बाद यहां मलमास मेला लगता है‚ जिसमें मान्यता है कि इस दौरान पूरे एक माह तक ३३ करोड़ देवी–देवता प्रवास करते हैं। सीएम ने कहा कि ऐसा कॉन्फ्रेंस हो कि अपने देश के साथ–साथ पूरी दुनिया के लिए उपयोगी हो। उन्होंने कहा‚ ‘हम सभी को हमेशा यही प्रयत्न करना चाहिए कि समाज में प्रेम एवं सद्भाव का माहौल कायम रहे। इस अवसर पर मैं उप राष्ट्रपति का विशेष तौर पर अभिनंदन एवं स्वागत करता हूं।
समारोह को श्रीलंका की परिवहन मंत्री पविथ्रा वनियारच्ची एवं नालंदा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुनैना सिंह ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार‚ सांसद कौशलेंद्र कुमार‚ निदेशक इंडिया फाउंडेशन की निदेशक ललिता कुमार मंगलम एवं ध्रुप कटोच‚ इंडिया फाउंडेशन के पूर्व निदेशक राम माधव‚ मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार‚ आयुक्त पटना प्रमंडल संजय कुमार अग्रवाल‚ नालंदा के जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह‚ मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह‚ पुलिस अधीक्षक हरि प्रसाथ एस. सहित अन्य अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।







