जम्मू–कश्मीर में आतंकी घटनाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है। गैर कश्मीरियों की हत्याओं के बाद केंद्र सरकार एक्शन में आ गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आदेश के बाद नागरिकों की हालिया हत्याओं की जांच के लिए कश्मीर से शनिवार को दिल्ली लौटी विशेष खुफिया टीम को फिर से घाटी में भेज दिया गया है। सूत्रों ने बताया कि अमित शाह ने सभी संबंधित अधिकारियों से यह समझने को कहा है कि ऐसी आतंकी घटनाएं बार–बार क्यों हो रही हैं। केंद्र द्वारा भेजी गई ये टीम डीजीपी दिलबाग सिंह के साथ मिलकर काम करेगी।
हाल के दिनों में हुई टारगेट किलिंग के बाद घाटी में प्रवासी मजदूर खौफजदा हैं। वे यहां से पलायन की कोशिश में हैं। बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर जम्मू रेलवे स्टेशन पर मौजूद मिले। वह सभी अपने–अपने घरों को लौट रहे हैं। प्रवासी मजदूरों का कहना है कि पहले तो आतंकी हमले का खतरा था‚ लेकिन अब वहां हमारे सिर पर मौत मंडरा रही है। यदि हम बचेंगे तो नौकरी फिर कहीं भी कर लेंगे। हाल के दिनों में ५ प्रवासी मजदूरों की आतंकियों ने टारगेट किलिंग की है। विगत दिवस दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में अज्ञात आतंकियों ने एक घर में घुसकर ३ प्रवासी मजदूरों पर अंधाधुन फायरिंग की। जिसमें २ की मौके पर मौत हो गई। एक गंभीर रूप से जख्मी है। उसका उपचार चल रहा है। मारे गए मजदूरों में एक उत्तर प्रदेश तथा ४ बिहार के प्रवास कामगार थे। घाटी में झारखंड‚ बिहार‚ उड़ीसा‚ उत्तर प्रदेश‚ छत्तीसगढ़ राज्यों के सर्वाधिक मजदूर है। प्रदेश के श्रमिक विभाग के मुताबिक मौजूदा वक्त में करीब एक लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूर घाटी में मौजूद हैं। जो कृषि‚ बागवानी‚ बढ़ाई‚ राजमिस्त्री‚ पलम्बर‚ नाई‚ ईट भट्टे‚ रेहडी लगाने से लेकर दिहाड़ी मजदूर का काम करते हैं। ये प्रवासी मजदूर जम्मू–कश्मीर में न हो तो यहां का विकास ठप हो जाएगी और आर्थिक स्थिति भी चरमरा जाएगी।







