ADVERTISEMENT
Saturday, August 1, 2026
No Result
View All Result
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

भारत की आजादी में दांड़ी मार्च की रही है खास अहमियत

UB India News by UB India News
March 12, 2021
in Lokshbha2024, आज का इतिहास, खास खबर, दिन विशेष, ब्लॉग
0
भारत की आजादी में दांड़ी मार्च की रही है खास अहमियत

RELATED POSTS

19 साल बाद कोलकाता लौटने पर भावुक हुईं तस्लीमा नसरीन, बोलीं- यह घर वापसी

‘अरे यार पापा’ बोलने वाली जेन जी की भाषा पर चर्चा क्यों?

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

भारत की आजादी में दांड़ी मार्च की खास अहमियत रही है। यही वजह है कि दांड़ी मार्च के आगाज के खास दिन को ही‚ भारत की स्वतंत्रता के ७५ वर्ष के भव्य समारोह के शुभारंभ के लिए चुना गया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में दांड़ी मार्च सबसे प्रभावशाली प्रतीकात्मक आन्दोलन रहा है। दांड़ी यात्रा के बाद की घटनाओं को हम देखें तो ब्रितानी हुकूमत की औपनिवेशिक सत्ता दबाव में आने लगी थी। इस आन्दोलन के माध्यम से महात्मा गांधी ने एक बार फिर दुनिया को सत्य और अहिंसा की ताकत का परिचय कराया। भारत में नमक बनाने की परम्परा प्राचीन काल से रही है। परम्परागत ढंग से नमक बनाने का काम किसानों द्वारा किया जाता रहा है‚ जिन्हें नमक किसान भी कहा जाता था। बिहार और कई अन्य प्रान्तों में यह कार्य खास जाति के हवाले था। धीरे–धीरे नमक बनाने की तकनीक में सुधार आरंभ हुआ था लेकिन समय के साथ नमक जरूरत की वस्तु की बजाय व्यापार की वस्तु बनने लगा था। २ मार्च १९३० को लॉर्ड़ इरविन को लिखे एक पत्र में गांधी जी कहते हैं‚ ‘राजनीतिक दृष्टि से हमारी स्थिति गुलामों से अच्छी नहीं है‚ हमारी संस्कृति की जड़ ही खोखली कर दी गयी है। हमारा हथियार छीनकर हमारा सारा पौरुष अपहरण कर लिया गया है।’ इसी पत्र में वे आगे लिखते हैं‚ ‘इस पत्र का हेतु कोई धमकी देना नहीं है। यह तो सत्याग्रही का साधारण और पवित्र कर्तव्य मात्र है। इसलिए मैं इसे भेज भी खासतौर पर एक ऐसे युवा अंग्रेज मित्र के हाथ रहा हूं‚ जो भारतीय पक्ष का हिमायती है‚ जिसका अहिंसा पर पूर्ण विश्वास है और जिसे शायद विधाता ने इसी काम के लिए मेरे पास भेजा है।’ जिस अंग्रेज युवक का गांधी जी जिक्र कर रहे हैं उसका नाम रेजिनाल्ड़ रेनाल्ड़ था। यह युवक गांधी जी के साथ आश्रम में रह चुका था और गांधी जी की नीतियों में पूरा यकीन रखता था। लॉर्ड़ इरविन को पत्र लिखने के पीछे गांधी जी का उद्’ेश्य चेतावनी की बजाय सूचना देना था क्योंकि वे गरीबों की दृष्टि से इस कानून को सबसे अधिक अन्यायपूर्ण मानते थे। ॥ तय कार्यक्रम के अनुसार दिनांक १२ मार्च को साबरमती आश्रम से दांड़ी मार्च प्रारंभ हुआ। ठीक साढ़े छह बजे गांधी जी ने अपने ७९ अनुयायियों के साथ आश्रम छोड़ा और मार्च आरंभ किया। दांड़ी तक की २४१ मील की दूरी उन्होंने २४ दिन में पूरी की। इस दौरान गांधी जी जहां पर विश्राम करते थे‚ वहीं जनसमूह को सम्बोधित करते थे। उनके भाषणों ने लोगों में अंग्रेजों के जुल्म के विरुद्ध माहौल पैदा कर दिया था। दांड़ी यात्रा के दौरान यह तय किया गया कि नमक कानून पर ही लोग अपनी शक्ति केंद्रित रखें और साथ ही यह चेतावनी भी दी गई कि गांधी जी के दांड़ी पहुंचकर नमक कानून तोड़ने से पहले सविनय अवज्ञा शुरू नहीं की जाएगी। गांधी जी की अनुमति से सत्याग्रहियों के लिए एक प्रतिज्ञा पत्र बनाया गया। इस पत्र की शर्तों में शामिल था कि मैं जेल जाने को तैयार हूं और इस आंदोलन में और जो भी कष्ट और सजाएं मुझे दी जाएंगी‚ उन्हें मैं सहर्ष सहन करूंगा।
४ अप्रैल १९३० को रात्रि में पदयात्रा ने दांड़ी में प्रवेश किया। ५ अप्रैल की प्रातः खादी धारण किए हुए सैकड़ों गांधीवादी सत्याग्रही दांड़ी तट पर एकत्र हुए। दांड़ी में प्रेस वार्ता भी आयोजित की गई। सरोजिनी नायड़ू‚ ड़ॉ. सुमंत‚ अब्बास तैयब जी‚ मिू बेन पेटिट भी गांधी जी से मिलने आए। अपने संबोधन में गांधी जी ने अगले दिन सुबह नमक कानून तोड़ने की जानकारी दी। ६ अप्रैल को प्रातः दांड़ी तट पर नमक हाथ में लेकर गांधी जी ने नमक कानून तोड़ा। ब्रिटिश कानून के तहत उन्हें हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी से पूर्व गांधी जी ने अपने संदेश में कहा था‚ ‘त्याग के बिना मिला हुआ स्वराज टिक नहीं सकता। अतः संभव है‚ जनता को असीम बलिदान करना पड़े। सच्चे बलिदान में एक ही पक्ष को कष्ट झेलने पड़ते हैं अर्थात बिना मारे मरना पड़ता है।‘ दांड़ी यात्रा का वर्णन करते हुए लन्दन टेलीग्राफ के संवाददाता अश्मीद बार्टलेट ने लिखा था‚ ‘कौन जाने यह घटना आगे चलकर ऐतिहासिक बन जाएॽ एक ईश्वर दूत की गिरफ्तारी कोई छोटी बात हैॽ सच्चे–झूठे की भगवान जानें‚ परन्तु इसमें कोई शक नहीं‚ गांधी आज करोड़ों भारतीयों की दृष्टि में महात्मा और दिव्य पुरुष हैं।’
भारत की आजादी का यह सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव था‚ जो दांड़ी यात्रा के बीज से निकला था। गांधी जी की दांड़ी यात्रा के साथ भारत भर में राष्ट्रीय चेतना की लहर चल पड़ी। भारत की स्वतंत्रता के लिए गांधी जी का दांड़ी मार्च आज भी मुश्किल वक्त में सही फैसला करने की राह दिखाता है और लोगों को त्याग की अहमियत समझाता है। यही वजह है कि करीब ९१ साल बाद जब मैं उसी मिट्टी पर आजादी के ७५ साल के अमृत उत्सव के मौके पर पदयात्रा करूंगा तब देश के हालात बदले हुए हैं। अब हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि भारत का सफर अब स्वावलंबन और स्वाभिमान के साथ तय होगा। हम दुनिया के सामने अब याचक नहीं होंगे। हमारी छवि अब दुनिया अपने केनवास पर दाता के रूप में बनाएगी। हमने विश्व में संकट के समय में दवा हो या वैक्सीन –दूसरे देशों को अपना कुटुंबी मानकर पहुंचाई है। हम श्रम की भाषा इसलिए बोलना चाहते हैं कि हमारी आने वाली नस्लें दीनता की भाषा न बोलें। प्रधानमंत्री का कहना है कि देश जब आजादी का सौवां महोत्सव मनाएगा तो पूरी दुनिया के सामने हम एक ऐसा उदाहरण होंगे‚ जिसके विजय गीत दुनिया के हर आंगन में दोहराए जाएंगे और हमारी संस्कृति का वैभव गान हर दिल में होगा।

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

20 साल बाद कोलकाता क्यों जा रही हैं बांग्लादेशी लेखक तसलीमा नसरीन?

19 साल बाद कोलकाता लौटने पर भावुक हुईं तस्लीमा नसरीन, बोलीं- यह घर वापसी

by UB India News
July 31, 2026
0

बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन शुक्रवार को 19 साल बाद कोलकाता पहुंचीं। कोलकाता पहुंचने पर तस्लीमा नसरीन बेहद खुश दिखाई दीं।...

‘अरे यार पापा’ बोलने वाली जेन जी की भाषा पर चर्चा क्यों?

‘अरे यार पापा’ बोलने वाली जेन जी की भाषा पर चर्चा क्यों?

by UB India News
July 31, 2026
0

बदलाव प्रकृति का नियम है. पीढ़ियों के बदलने के साथ बहुत कुछ बदल जाता है. पहनावा, खान-पान और भाषा यानी...

CJP प्रदर्शन में घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों का दर्द…………..

CJP प्रदर्शन में घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों का दर्द…………..

by UB India News
July 31, 2026
0

दिल्ली के जंतर मंतर पर सीजेपी और दिल्ली पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद अब पुलिसकर्मियों का परिवार सामने...

सरकारी नौकरी की आस में वर्षों वक्त बर्बाद …………………

नीट-यूजी पेपर लीक के बाद परीक्षा प्रणाली को जड़ से बदलने का अवसर……………

by UB India News
July 31, 2026
0

भारत की परीक्षा व्यवस्था इन दिनों अपने सबसे बड़े मंथन के दौर से गुजर रही है। गत दिनों नीट-यूजी 2026...

सार्वजनिक विमर्श में गालियों का महिमामंडन एक गंभीर मुद्दा…………….

सार्वजनिक विमर्श में गालियों का महिमामंडन एक गंभीर मुद्दा…………….

by UB India News
July 31, 2026
0

गाली इन दिनों राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में हैं। जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री मोदी को लेकर दी गईं खुलेआम गंदी गालियां...

Next Post
उपेंद्र कुशवाहा पहुंचे CM नीतीश कुमार से मिलने, विलय की बात खारिज

रालोसपा का जदयू में विलय : 14 मार्च को हो सकता इसका आधिकारिक ऐलान

दो से अधिक बच्चे होने पर नहीं लड़ पाएंगे बिहार पंचायत चुनाव !

दो से अधिक बच्चे होने पर नहीं लड़ पाएंगे बिहार पंचायत चुनाव !

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend