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TMC के 20 बागी सांसदों का NCPI में विलय ,क्या है एनसीपीआई और इसका इतिहास ?…………….

UB India News by UB India News
June 15, 2026
in खास खबर, पश्चिम बंगाल
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TMC के 20 बागी सांसदों का NCPI में विलय ,क्या है एनसीपीआई और इसका इतिहास ?…………….
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तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने रविवार को दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलकर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय का एलान किया। इसके बाद अचानक से देशभर में नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया की चर्चा शुरू हो गई। जो एनसीपीआई पार्टी त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में महज 822 वोट पाई और जिसका नाम भी लोग नहीं जानते, वह अचानक से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। तो आइए जानते हैं कि आखिर क्या है ये एनसीपीआई और क्यों इसकी इतनी चर्चा हो रही है।

तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के विलय के बाद नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) चर्चा में है। रिकॉर्ड के अनुसार, 3 साल पहले 2023 में बंगाल के उत्तिया कुंडू और शेउली कुंडू नाम के कपल ने पार्टी की नींव रखी थी। पार्टी के डॉक्यूमेंट्स में उत्तिया कुंडू पार्टी के अध्यक्ष हैं। पत्नी शेउली का नाम कोषाध्यक्ष के रूप में दर्ज है। NCPI अध्यक्ष उत्तिया ने 13 मई को फेसबुक पर बंगाल CM शुभेंदु अधिकारी के साथ अपनी फोटो शेयर करते हुए उन्हें मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी थी। हावड़ा में NCPI का ऑफिस है, जहां सोमवार को सुरक्षाबलों की तैनाती दिखी। ऑफिस के गेट पर उत्तिया ने खुद को बंगाली न्यूजपेपर का एडिटर और टीचर बताया है। वहीं उनकी पत्नी शेउली को कलकत्ता हाईकोर्ट की वकील बताया गया है।

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क्या कहते हैं एनसीपीआई के बारे में चुनाव आयोग के रिकॉर्ड?

चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, एनसीपीआई को 20 जनवरी 2023 को गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (RUPP) के रूप में पंजीकरण मिला था। दिलचस्प बात यह है कि पश्चिम बंगाल में पंजीकृत होने के बावजूद पार्टी ने अपना पहला चुनावी दांव साल 2023 में हुए त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में खेला। आयोग के दस्तावेजों के मुताबिक, पार्टी को कुल मिलाकर केवल 1.13 लाख रुपये का चंदा प्राप्त हुआ था।

दस्तावेजों के अनुसार, पार्टी की कोषाध्यक्ष श्वेली कुंडू हैं। वह दो अन्य संस्थाओं, बिस्वाबाजार प्राइवेट लिमिटेड और पश्चिम बंग असंगठित महिला कर्मी एसोसिएशन में भी निदेशक हैं। एनसीपीआई के साथ ही इन दोनों संस्थाओं का पंजीकृत पता भी पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के बनिपुर क्षेत्र में दर्ज है। पार्टी के अध्यक्ष उत्तिया कुंडू हैं, जो शेउली कुंडू के पति हैं।

बंगाल में पंजीकृत, फिर त्रिपुरा में क्यों लड़ा विधानसभा चुनाव?
एनसीपीआई का पंजीकरण पश्चिम बंगाल के पते पर है, लेकिन पार्टी ने पहला चुनाव त्रिपुरा विधानसभा का लड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एनसीपीआई के नेता शांतनु डे ने बताया कि पार्टी ने त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) क्षेत्र के वंचित आदिवासी समुदायों का प्रतिनिधित्व करने के लिए त्रिपुरा विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला लिया था। त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पार्टी ने सात विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन चार सीटों पर नामांकन पत्र खारिज हो गए। ऐसे में पार्टी केवल दो सीटों पर अपने चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ सकी। वहीं एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन दिया गया।

त्रिपुरा चुनाव में पार्टी को सिर्फ 822 वोट फिर 20 सांसद कैसे हुए?
एनसीपीआई के उम्मीदवारों ने त्रिपुरा की चावमानू सीट पर 536 वोट हासिल किए और कैलाशहर सीट पर पार्टी को 286 वोट मिले। दोनों सीटों को मिलाकर पार्टी को कुल 822 वोट मिले। एक अन्य उम्मीदवार कृष्ण कुमार देबबर्मा ने अंबासा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा और 376 वोट हासिल किए। इस तरह एनसीपीआई या उसका समर्थित कोई भी उम्मीदवार जीत के करीब नहीं पहुंच सका। वहीं रविवार को हुए राजनीतिक घटनाक्रम के बाद एकाएक एनसीपीआई देश की बड़ी राजनीतिक ताकत बन गई है और उसके पास अब 20 लोकसभा सांसद हैं। टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने एनसीपीआई में विलय का एलान किया है।

बंगाल में क्यों नहीं लड़ा एनसीपीआई ने चुनाव?
एनसीपीआई नेता शांतनु डे के मुताबिक, पार्टी ने 2023 में पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव लड़ने की भी योजना बनाई थी, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि त्रिपुरा चुनाव के बाद वित्तीय मामलों को लेकर पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेद उभर आए, जिससे संगठनात्मक गतिविधियां लगभग ठप पड़ गईं और पार्टी गुमनामी के अंधेरे में खो गई। बाद में पार्टी ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारी करने पर भी विचार किया, लेकिन संसाधनों की कमी यहां भी रोड़ा बनी।

लोकसभा स्पीकर से क्यों मिली टीएमसी के बागी सांसदों का दल?
तृणमूल कांग्रेस के लगभग दो-तिहाई सांसदों के एनसीपीआई में विलय के एलान के बाद पार्टी देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों की कतार में खड़ी हो गई है। बागी सांसदों ने तृणमूल कांग्रेस से अलग होने की घोषणा के बाद रविवार शाम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इस मुलाकात में बागी सांसदों ने सदन में अलग बैठने की व्यवस्था करने की भी मांग की। बैठक के बाद सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने बताया कि अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता देने के लिए पत्र सौंपा गया है।

क्या टीएमसी पर दावा करेगा बागी गुट?
बागी गुट में शामिल सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय भी शामिल हैं, जो टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के करीबी माने जाते थे। सुदीप बंद्योपाध्याय ने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात के बाद कहा कि एनसीपीआई में विलय पहला कदम है और जुलाई में बागी गुट टीएमसी पर दावा पेश करेगा।

बागी सांसदों ने क्यों चुना एनसीपीआई में विलय का विकल्प?
सूत्रों के अनुसार, तृणमूल के बागी सांसद अभी अलग गुट बनाने का जोखिम नहीं ले सकते। ऐसा करने पर वे दल-बदल कानून के दायरे में आ सकते हैं। इसलिए बागी सांसदों ने एनसीपीआई में विलय का विकल्प चुना। साथ ही भाजपा भी ये नहीं चाहती कि टीएमसी में टूट का आरोप उस पर लगे।

बागी TMC सांसद बोले- NDA के साथ काम करेंगे

TMC के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने रविवार को त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय की घोषणा की। बागी सांसदों ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की। लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि TMC के दो-तिहाई लोकसभा सांसदों ने अलग गुट के रूप में मान्यता देने के लिए पत्र सौंपा है। उन्होंने कहा- हम PM मोदी के नेतृत्व में NDA के साथ काम करेंगे। बिरला से TMC के बागी सांसदों की मुलाकात की जो फोटो सामने आई है, उसमें 17 TMC सांसद दिख रहे हैं। स्पीकर से मुलाकात से पहले सांसदों ने बंगाल भाजपा प्रभारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ बैठक की थी

संसद में अलग बैठने की मांग, 5 बड़ी बातें

1. TMC के बागी सांसदों ने स्पीकर से संसद में अलग बैठने की जगह देने की मांग की। 2. काकोली घोष के मुताबिक, नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी NDA को समर्थन देगी। 3. काकोली के अनुसार, बागी गुट के पास दो-तिहाई सांसदों का समर्थन है। 4. ममता बनर्जी गुट ने स्पीकर को पत्र देकर अलग गुट को मान्यता न देने की मांग की। 5. सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा- असली TMC कौन है, इसका फैसला अदालत करेगी। बागी गुट TMC के चुनाव चिन्ह ‘जुड़वा फूल’ पर भी दावा करेगा।

 बागी सांसदों ने नई पार्टी में विलय का कदम क्यों उठाया?

दल-बदल विरोधी कानून से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है। बागी गुट के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा- हम नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी में विलय कर चुके हैं। नियम के तहत जब आप पार्टी के 2/3 सदस्यों के साथ अलग होते हैं, तो आप पहले ही दिन उस पार्टी का नाम नहीं मांग सकते। जुलाई में, हम तृणमूल का नाम हमें देने की मांग करेंगे, क्योंकि हमारे पास तृणमूल का 2/3 बहुमत है। फिर कोर्ट तय करेगा।

बागी सांसद अभी क्या करेंगे?

बागी सांसदों ने स्पीकर से लोकसभा में TMC के अन्य सांसदों से अलग बैठने की जगह देने की मांग की है। TMC के 28 सांसद हैं। 20 सांसद अलग हो गए हैं। ऐसे में बागी सांसदों को NDA को समर्थन देने की वजह से सत्तापक्ष के पास सिटिंग मिल सकती है।

ममता बनर्जी का गुट क्या करेगा?

TMC पर अपना दावा पेश करेगा। राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रविवार को ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भेजा और बागी गुट को मान्यता नहीं देने की मांग की।

ममता से अलग हुए 20 बागी सांसदों के नाम…

लोकसभा सीट सांसद लोकसभा सीट सांसद
बारासात काकोली घोष दस्तीदार घाटाल दीपक अधिकारी (देव)
कूचबिहार जगदीश चंद्र बसुनिया झाड़ग्राम कालीपद सोरेन
जांगीपुर खलीलुर रहमान मेदिनीपुर जून मालिया
बहरामपुर यूसुफ पठान बांकुड़ा अरूप चक्रवर्ती
मुर्शिदाबाद अबू ताहेर खान बर्धमान पूर्व डॉ. शर्मिला सरकार
बैरकपुर पार्थ भौमिक हावड़ा प्रसून बंधोपाध्याय
मथुरापुर बापी हलदार बोलपुर असित कुमार माल
जादवपुर सायोनी घोष बीरभूम शताब्दी रॉय
कोलकाता दक्षिण माला रॉय हुगली रचना बनर्जी
आरामबाग मिताली बाग कोलकाता उत्तर सुदीप बंद्योपाध्याय

 

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