दिल्ली से करीब साढ़े सात हजार किलोमीटर दूर स्थित मध्य अफ्रीकी देश कांगो के लिए इस समय भारत संकटमोचक बनकर खड़ा हुआ है। कांगो इस समय इबोला वायरस के प्रकोप से बचने के लिए हाथ-पांव मार रहा है और भारत ने बिना देर किए अफ्रीका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) को इससे बचने के लिए आपातकालीन दवाइयां और अन्य सहायक चीजें भेज दी हैं।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इथियोपिया स्थित अफ्रीका सीडीसी के एक सोशल मीडिया पोस्ट को शेयर किया है, जिसमें बुधवार को उसने भारत से खुद ये आपातकालीन दवा मिलने की पुष्टि की है। इसके एक्स पोर्ट के मुताबिक भारत से पहुंची इमरजेंसी दवाओं की खेप युगांडा में ईस्टर्न अफ्रीका रीजनल कोऑर्डिनेटिंग सेंटर ने प्राप्त किया है।
‘आपातकालीन मदद के लिए भारत का आभार’
कॉन्टिनेंटल पब्लिक हेल्थ एजेंसी ने भारत से मिली आपातकालीन मदद के बारे में कहा है,’अफ्रीका सीडीसी, डीआरसी में बुंडिबुग्यो इबोला के प्रकोप के समाधान के लिए चल रही कोशिशों में मदद के लिए भारत सरकार और इसकी जनता की ओर से उदारतापूर्ण तरीके से दी गई आपातकालीन दवाइयों की खेप के पहुंचने का स्वागत करती है।’
पूरे कॉन्टिनेंट में लोगों की जान बचाने और स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति निरंतर समर्थन और प्रतिबद्धता के लिए भारत का आभार।
कॉन्टिनेंटल पब्लिक हेल्थ एजेंसी
भारत ने इबोला पीड़ित कांगो को क्या भेजा
भारत ने कांगो में इबोला वायरस के प्रकोप से बचाव के लिए जो सप्लाई भेजी है, उनमें-
डायग्नोस्टिक्स के लिए जरूरी चीजें
इलाज के लिए जरूरी सामान
संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण से जुड़े सामान
इबोला संक्रमित केस मैनेजमेंट में सहायक चीजें शामिल हैं।
कांगो की करीब 12 करोड़ आबादी पर संकट
भारत से भेजी गई आपातकालीन चीजें पूर्वी डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला वायरस की चपेट में आए लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की आबादी 11.6 करोड़ से ज्यादा है।
अगर इतनी बड़ी आबादी में इबोला वायरस फैल गया तो वहां बहुत बड़ी विपदा आ सकती है।
पड़ोस के रिपब्लिक ऑफ कांगो की आबादी भी 66 लाख के करीब है।
जल्दी रोकथाम नहीं होने पर वो भी इबोला वायरस की चपेट में आ सकता है।
बुंडीबुग्यो इबोला वायरस की वैक्सीन नहीं
बुंडीबुग्यो इबोला इस वायरस की 6 ज्ञात स्पेसीज में से एक है।
2007 में युगांडा में पहली बार यह वायरस सामने आया था।
तब से यह अफ्रीका के अलग-अलग हिस्सों में समय-समय फैला है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार बुंडीबुग्यो इबोला वायरस स्ट्रेन का अभी तक कोई अप्रूव्ड दवा या वैक्सीन नहीं है।
यह संक्रमित शारीरिक द्रव्य, दूषित चीजों या संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।
इसके सामान्य लक्ष्णों उल्टी, दस्त, बुखार शामिल है।
गंभीर मामलों में इंटर्नल या एक्सटर्नल ब्लीडिंग हो सकती है।
इबोला से होने वाली बीमार अक्सर गंभीर और जानलेवा हो सकती है।
इबोला वायरस का मृत्यु दर 50% तक है।







