प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीदरलैंड पहुंच गए हैं. भारत का फोकस पिछले कुछ समय से यूरोप के साथ व्यापारिक संबंध बढ़ाने पर रहा है. प्रधानमंत्री मोदी की नीदरलैंड यात्रा यूरोप के साथ संबंधों को गहरा करने के भारत के प्रयासों का ही हिस्सा है, जो पिछले कुछ वर्षों से जारी है. इस दौरान पीएम मोदी का पूरा फोकस, ट्रेड, टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने पर होगा. इस दौरान पीएम मोदी, डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ बातचीत करेंगे और कई समझौते पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे, जो दोनों देशों के भविष्य के रिश्तों का रास्ता तय करेगा. नीदरलैंड पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का हवाईअड्डे पर एडजुटेंट-जनरल और महामहिम राजा के सैन्य परिवार के प्रमुख रियर एडमिरल लुडगर ब्रुमेलार, डच विदेश मंत्री टॉम बेरेंडसेन और नीदरलैंड में भारत के राजदूत कुमार तुहिन व डच सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वागत किया.
क्यों खास है पीएम मोदी का नीदरलैंड दौरा
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा यूरोप के साथ संबंधों को गहरा करने के भारत के प्रयासों का हिस्सा है, जो पिछले कुछ वर्षों से जारी है. इस प्रयास के परिणामस्वरूप इस वर्ष की शुरुआत में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) हुआ, और यह ऐसे समय में गठबंधनों को बड़ा बनाने का एक बड़ा प्रयास है, जब अमेरिका अब वह स्थिर साझेदार नहीं रह गया है जैसा पहले माना जाता था.
PM मोदी का नीदरलैंड में ग्रैंड वेलकम
प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड पहुंचने के तुरंत बाद सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “(मैं) एम्स्टर्डम पहुंचा हूं. नीदरलैंड की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ने व्यापार और निवेश संबंधों को रफ्तार दी है. यह सेमीकंडक्टर, जल, स्वच्छ ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में भारत-नीदरलैंड संबंधों को गहरा करने का अवसर प्रदान करता है.” पीएम मोदी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री जेटेन से बातचीत करेंगे और राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से मुलाकात करेंगे. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वह इस यात्रा के दौरान एक सामुदायिक कार्यक्रम को संबोधित करने के लिए उत्सुक हैं. पीएम मोदी की 15 से 17 मई तक नीदरलैंड की यह यात्रा 2017 की उनकी यात्रा के बाद दूसरी यात्रा है.
सेमीकंडक्टर पर अहम समझौता…
सेमीकंडक्टर को लेकर भारत और नीदरलैंड के बीच अहम समझौता हो सकता है. यह दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है. भारत सरकार ने भी इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. कुछ ही समय पहले भारत में AI समिट का आयोजन हुआ था, उसमें नीदरलैंड के प्रधानमंत्री शामिल हुए थे. उसके पहले भी भारत में सेमीकॉन की एग्जीबिशन हुई थी. उस दौरान भी नीदरलैंड की कई कंपनियां भारत पहुंची थीं. इसको देखते हुए लगता है कि इस क्षेत्र में फोकस दोनों देशों के लिए साथ मिलकर काम करने का एक बहुत अच्छा मौका है.
पीएम के स्वागत में सांस्कृतिक कार्यक्रम
इसके अलावा प्रधानमंत्री हेग के होटल में पहुंचते ही पेश किए सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद लेते नजर आए। इसमें महिलाओं-पुरुषों की एक टीम को सांस्कृतिक नृत्य पेश करते देखा गया। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान कार्यक्रम पेश करने वाले कलाकारों के दल में शामिल गौतम ने कहा, ‘हमने प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में गरबा प्रस्तुत किया। हमने उनसे बातचीत की। हम सभी उनकी नीदरलैंड यात्रा को लेकर बहुत खुश और उत्साहित हैं।’ एक अन्य कलाकार कलाकार रीमा ने कहा कि हम सभी को प्रधानमंत्री मोदी के सामने प्रस्तुति देकर बहुत खुशी हुई… पूरा अनुभव अद्भुत था।
हेग में आध्यात्मिक प्रस्तुति, पीएम मोदी ने की सराहना
प्रधानमंत्री मोदी हेग शहर में एक आध्यात्मिक प्रस्तुति के साक्षी भी बने। गायन और संगीत के साथ कई गई खास तैयारी की उन्होंने सराहना भी की।
दोनों देशों के रिश्ते में नागरिकों की भी अहम भूमिका
द्विपक्षीय संबंधों में नागरिकों की भी अहम भूमिका रही है। नीदरलैंड में भारतीय मूल और एनआरआई (नॉन रेसिंडेंड इंडियंस) समुदाय के 90,000 से अधिक लोग रहते हैं। यहां सूरीनाम-हिंदुस्तानी समुदाय के भी 2,00,000 से अधिक सदस्य रहते हैं। डच विश्वविद्यालयों में वर्तमान में लगभग 3,500 भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।
पीएम मोदी का नीदरलैंड दौरा इतना अहम क्यों?
प्रधानमंत्री मोदी के दौरे की अहमियत समझाते हुए विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि नीदरलैंड यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक गंतव्यों में से एक है। वित्त वर्ष 2024-25 में 27.8 अरब अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ। भारत में निवेश के मामले में ये चौथा सबसे बड़ा देश भी है। इसका कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 55.6 अरब अमेरिकी डॉलर है।
नॉर्वे में भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन: 18 मई को पीएम नॉर्वे पहुंचेंगे, समिट में करेंगे शिरकत
प्रधानमंत्री अपनी यूरोप यात्रा के दौरान नॉर्वे भी जाएंगे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 43 वर्षों में पहली नॉर्वे यात्रा होगी। वहां वह पीएम योनास गार स्टोरे के साथ व्यापार, निवेश, ब्लू अर्थव्यवस्था, हरित प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष सहयोग पर चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री भारत-नॉर्वे बिजनेस एंड रिसर्च समिट को भी संबोधित करेंगे। 19 मई को ओस्लो में तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन आयोजित होगा, जिसमें नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के पीएम भाग लेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार नॉर्डिक देश प्रौद्योगिकी, नवाचार, डिजिटलीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के अहम साझेदार बनकर उभरे हैं।
स्वीडन में यूरोपीय गोलमेज सम्मेलन में होंगे मुख्य अतिथि
नीदरलैंड के बाद पीएम स्वीडन जाएंगे, जहां वह भारत-स्वीडन नवाचार साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। वार्ता में एआई, हरित परिवर्तन, रक्षा सहयोग, जलवायु कार्रवाई और उभरती तकनीकों पर विशेष ध्यान रहेगा। पीएम मोदी यूरोपीय उद्योग गोलमेज सम्मेलन में मुख्य अतिथि भी होंगे, जहां यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेन भी मौजूद रहेंगी।
यात्रा के अंत में इटली प्रवास…
यूरोपीय देशों की यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री 19-20 मई को इटली जाएंगे। वहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से होगी। दोनों नेता व्यापार, निवेश और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री रोम स्थित संयुक्त राष्ट्र की संस्था फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन के मुख्यालय का भी दौरा करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि 2023 के बाद से प्रधानमंत्री मोदी और मेलोनी के बीच सात मुलाकातें हो चुकी हैं।
नीदरलैंड यात्रा का मुख्य फोकस व्यापार और निवेश, नागरिकों के संपर्क पर भी जोर
पीएम मोदी की यूरोप यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को इस वर्ष अंतिम रूप दिया गया है। यात्रा का मुख्य फोकस व्यापार, निवेश, हरित प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्टार्टअप और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना होगा। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के संबंध अब पारंपरिक व्यापार और कृषि से आगे बढ़कर सेमीकंडक्टर, रक्षा, समुद्री सहयोग और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों तक पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय को भी संबोधित करने के अलावा शीर्ष कारोबारी नेताओं से भी बातचीत करेंगे।







