किसका पलड़ा भारी है?
1. BJP के लिए: SIR में कुल 91 लाख नाम कटे हैं। इसमें 47 लाख मृत लोगों के हैं। अगर इन्हें आधार बनाकर सीटों का गणित समझें तो इस बार BJP को बहुमत मिलता नजर आ रहा है। उसे 150 से 170 सीटें मिल सकती हैं। वहीं TMC 110-140 सीटों पर सिमट सकती है। इसी गणित के आधार पर BJP के नेता बंगाल में सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं।
2. TMC के लिए: पश्चिम बंगाल के वोटर्स में SIR का डर TMC के पक्ष में जा सकता है। असल में ग्राउंड पर ऐसी अफवाह फैली है कि वोटर लिस्ट से नाम कटने के बाद नागरिकता भी जा सकती है। जिनके नाम वोटर लिस्ट में बच गए, उन्होंने इसी डर से हर कीमत पर 100% वोट डालने की कोशिश की। इस बंपर वोटिंग का फायदा TMC को मिल सकता है। पार्टी 160 से 190 सीटें जीत सकती है।
साउथ बंगाल में इंडियन सेक्युलर फ्रंट यानी ISF 1 या दो सीटों पर मजबूत हो सकता है। वहीं, CPI(M) 2 से 3 सीटों पर दूसरी पोजिशन पर हो सकती है या फिर ज्यादा से ज्यादा 1 सीट जीत सकती है। वहीं, TMC से बाहर हुए हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) का कोई असर नहीं दिख रहा है।
BJP की जीत के लिए बड़े फैक्टर…
SIR में 47 लाख वोटर्स डिलीट होने का फायदा BJP को
पॉलिटिकल एनालिस्ट देबांजन बनर्जी ने BJP की जीत का गणित समझाया। उनके मुताबिक, पिछले दो चुनावों में TMC को करीब 2.86 करोड़ और BJP को 2.26 करोड़ वोट मिले थे। यानी TMC लगभग 60 लाख वोट से आगे थी। अब SIR में करीब 47 लाख मृत लोगों के नाम लिस्ट से हट गए हैं। माना जा रहा है कि इनमें से ज्यादातर TMC के समर्थक थे। अगर ऐसा है, तो TMC का वोट बैंक घटेगा और BJP को सीधा फायदा होगा।’
असली खेल उन सीटों पर है, जहां बहुत कम अंतर से जीत-हार होती है। 2021 विधानसभा चुनाव के लिहाज से देखें, तो करीब 30 सीटों पर 1000 से कम वोटों से जीत-हार तय हुई थी, जबकि करीब 50 सीटों पर दो से पांच हजार वोटों का अंतर था। 100 सीटों पर वोट का अंतर करीब 5 हजार से 10 हजार के बीच था। 47 लाख वोट कम होने पर ऐसी सीटों के नतीजे पलट सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो BJP 150 से 170 सीट जीत सकती है।
डर से आजादी और दूसरे राज्यों के नेता बूथ पर सक्रिय
चुनाव में डर का माहौल है। मालदा, मुर्शिदाबाद और संदेशखाली में पैरा मिलिट्री फोर्सेज पोलिंग बूथ के साथ-साथ घरों के बाहर गलियों में भी तैनात हैं। लोग बिना डरे पोलिंग बूथ जा रहे हैं। ये फैक्टर BJP के पक्ष में है। वहीं, हर बूथ पर यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और असम समेत BJP सरकार वाले राज्यों के मंत्री, विधायक और सांसदों की टीम काम कर रही है, ताकि जीत उनके पक्ष में हो।
BJP के पक्ष में ये फैक्टर भी…
1. BJP ने TMC के भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी का मुद्दा बढ़ा-चढ़ाकर उठाया। 2. TMC की लक्ष्मी भंडार योजना के तहत 1500 रुपए की जगह 3000 रुपए देने का वादा किया है।
पश्चिम बंगाल में बंपर वोटिंग यानी सत्ता बदलाव
- 2026 में 93% वोटिंग: ममता सरकार के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी BJP के पक्ष में जाने का अनुमान
- 2011 में 85.55% वोटिंग: TMC ने कम्युनिस्ट पार्टी को सत्ता से हटाकर सरकार बनाई
- 1977 में 56.15% वोटिंग: कांग्रेस को हटाकर कम्युनिस्ट पार्टी ने सरकार बनाई
TMC की जीत के लिए बड़े फैक्टर…
SIR में नाम कटने से नागरिकता छिनने का डर, TMC को फायदा
राज्य में SIR में ज्यादा नाम ग्रामीण इलाकों में कटे। इसे लेकर पॉलिटिकल एनालिस्ट कहते हैं, ‘वोटर लिस्ट से नाम कटने पर चुनाव आयोग ने सिर्फ इतना कहा था कि मामला सिर्फ SIR से जुड़ा है। BJP ने इसे घुसपैठिया शब्द से जोड़ दिया। इससे लोगों में मन में नागरिकता जाने का डर है। बांग्लादेशी बताकर देश से बाहर कर दिया जाएगा।‘
‘ये खौफ भी है कि उनका ड्राइविंग लाइसेंस और राशन कार्ड छिन जाएगा। फिर वो बंगाल से बाहर जाकर कैसे काम करेंगे।‘
‘TMC के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी के साथ भ्रष्टाचार नेगेटिव पॉइंट हैं, लेकिन अब अस्मिता के सामने ये मुद्दे दूसरे और तीसरे नंबर पर चले गए हैं। ऐसे में लगता है कि TMC को 160 से 190 सीटें और BJP को ज्यादा से ज्यादा 80 से 110 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस महज 1 से 3 सीटें ही जीत सकेगी।‘
SIR की वजह से वोट प्रतिशत पिछली बार से बढ़ा है। अबकी BJP 85 सीटों से ज्यादा जीतेगी, लेकिन बहुमत नहीं मिल पाएगा। TMC को 180 से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं, लेकिन ये 2021 से कम होंगी।‘
बंगाल की ज़मीनी माहौल क्या है?
BJP की बढ़त, लेकिन नजर आती है कई चुनौतियां
वोटरों के व्यवहार को प्रभावित करने वाले मुख्य मुद्दे
- रोजगार और आर्थिक दबाव: रोजगार के अवसरों की कमी और आय को लेकर अस्थिरता शहरी और ग्रामीण दोनों वर्गों के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है.
- कल्याण बनाम विकास की बहस: यह चुनाव TMC के कल्याणकारी मॉडल और BJP के विकास-केंद्रित एजेंडे के बीच स्पष्ट मुकाबले के रूप में उभर रहा है.
- पहचान की राजनीति: सांस्कृतिक प्रतीक, क्षेत्रीय गर्व और बंगाली पहचान जैसे मुद्दे दोनों पक्षों के प्रचार में अहम भूमिका निभा रहे हैं.
- वोटर लिस्ट विवाद: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के आरोपों ने चुनावी माहौल में तनाव और अविश्वास की एक नई परत जोड़ दी है.







