राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (AAP) से अलग होकर आए गुट के विलय को अपनी मंजूरी दे दी है. AAP के 7 सांसदों का एक गुट पिछले हफ्ते पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गया था. AAP की ओर से इन बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की गई थी, लेकिन सभापति ने इस गुट के बीजेपी में विलय की मंजूरी दे दी. इस संबंध में राज्यसभा सचिवालय ने अधिसूचना भी जारी कर दी है.
पिछले हफ्ते छोड़ दी थी पार्टी
आप आदमी पार्टी को पिछले हफ्ते शुक्रवार को तब बड़ा झटका लगा जब राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, विक्रम साहनी, राजेंद्र गुप्ता और स्वाति मालीवाल ने एक साथ पार्टी छोड़ दी तथा बीजेपी में शामिल हो गए. इन सांसदों ने पार्टी छोड़ने के दौरान आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली पार्टी अपने सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों से भटक गई है.
वहीं आम आदमी पार्टी के एक अन्य सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल का दावा है कि राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने उनसे आजाद समूह में शामिल होने के लिए संपर्क किया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया था.
सदस्यता रद्द करने की गुहार
इससे पहले आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कल रविवार को सभापति राधाकृष्णन को पत्र भेजकर ऊपरी सदन के उन 7 सांसदों को अयोग्य घोषित करने का अनुरोध किया था, जिन्होंने हाल ही में AAP छोड़कर BJP में विलय करने का ऐलान किया था. संजय सिंह ने दावा किया कि राज्यसभा के 7 सदस्यों द्वारा उठाया गया कदम दल-बदल के समान है. उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर पार्टी इस मामले में कानूनी कदम उठाएगी.
AAP ने पार्टी छोड़ने वाले 7 सांसदों की सदस्यता खत्म करने का अनुरोध राज्यसभा सभापति से किया है और दावा है कि वे (सांसद) AAP की टिकट पर उच्च सदन के लिए निर्वाचित हुए थे लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी छोड़ दिया और बीजेपी में शामिल होने का फैसला किया. संजय सिंह ने दावा किया कि उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश से संबंधित मामलों सहित सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में यह साफ किया गया है कि दलबदल के ऐसे मामलों में किस तरह पद से अयोग्य ठहराया जा सकता है.







