तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए आज गुरुवार को मतदान हो रहा है । चुनाव आयोग ने मतदाताओं से लोकतंत्र के पर्व में मतदान कर शामिल होने की अपील की है। तमिलनाडु में सभी 234 सीटों के लिए एक ही चरण में मतदान हो रहा है । वहीँ बंगाल की कुल 294 विधानसभा सीटों में से 16 जिलों की 152 सीटों के लिए आज पहले चरण का मतदान होगा। दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को प्रस्तावित है।
तमिलनाडु में सभी 234 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में मतदान होगा। वहीं, बंगाल की कुल 294 विधानसभा सीटों में से 16 जिलों की 152 सीटों के लिए गुरुवार को पहले चरण का मतदान होगा। दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को प्रस्तावित है। जानकारी के अनुसार, मतदान सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक जारी रहेगा। दोनों राज्यों में मंगलवार से पोलिंग पार्टियों के मतदान केंद्रों पर पहुंचने लगी हैं। तमिलनाडु में 5.67 करोड़ जबकि बंगाल में पहले चरण के लिए 3.5 करोड़ से अधिक मतदाता वोटिंग करेंगे। दस से अधिक देशों के प्रतिनिधि चुनाव प्रक्रिया को नजदीक से देखेंगे। बंगाल में वोटिंग के लिए आयोग ने 2,407 कंपनियां तैनात करने का निर्णय लिया।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026
बंगाल में ट्रिब्यूनल से मंजूर मतदाताओं की सूची जारी : बंगाल में पहले चरण के मतदान से पहले चुनाव आयोग ने उन मतदाताओं की सूची जारी कर दी है, जिन्हें जांच के बाद ट्रिब्यूनल ने मतदान की मंजूरी दे दी है। 139 लोगों के नाम सूची में शामिल किए गए हैं, जो गुरुवार को वोट डाल सकेंगे। मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि ट्रिब्यूनल ने राज्य में मतदाता सूचियों के गहन विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) पर विवादों से संबंधित 657 मामलों का निपटारा किया है।
बंगाल चुनाव में 43% उम्मीदवार ऐसे हैं, जिन पर आपराधिक और गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। खास बात यह है कि 192 प्रत्याशियों पर महिलाओं से जुड़े अपराधों के मामले चल रहे हैं। एडीआर की एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है।
एडीआर ने बंगाल चुनाव में 2920 उम्मीदवारों के चुनावी हलफनामों के विश्लेषण पर रिपोर्ट तैयार की है। 683 (23%) उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की घोषणा की है, जबकि 589 (20% ) ने गंभीर आपराधिक मामलों की घोषणा की है। 192 ने कहा, उन पर महिलाओं के विरुद्ध अपराधों से जुड़े केस दर्ज हैं।
पश्चिम बंगाल में गुरुवार (23 अप्रैल) को विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान है। इस चरण में राज्य की 294 में से 152 सीटों पर वोटिंग है। राज्य में पिछली बार की तरह इस बार भी सीधा मुकाबला सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच होने का अनुमान है। हालांकि, कभी बंगाल की सत्ता पर राज करने वाली कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) भी मुकाबले में हैं। इन दलों ने भी अलग-अलग चुनाव लड़ते हुए कई सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर बंगाल में इस बार मतदाताओं और मतदान केंद्रों की क्या संख्या है? इस बार राज्य में कौन से खास चेहरे उतरे हैं? बंगाल में इस बार कड़ी टक्कर किस-किस सीट पर होने के आसार हैं? राज्य में पिछले चुनाव के क्या नतीजे थे?
इस बार चुनाव में कौन से खास चेहरे और खास मुकाबले?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में कई हाई-प्रोफाइल और दिग्गज नेता चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से लेकर विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और कांग्रेस के पांच बार के सांसद अधीर रंजन चौधरी तक का नाम है।
शुभेंदु अधिकारी: नंदीग्राम में 2021 की ऐतिहासिक जीत के बाद भाजपा के मुख्य चेहरे शुभेंदु अधिकारी इस बार नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। नंदीग्राम में पहले चरण में मतदान है। यहां उनका सीधा मुकाबला कभी उनके करीबी रहे और अब टीएमसी उम्मीदवार पबित्रा कर से है।
अधीर रंजन चौधरी: कांग्रेस के दिग्गज नेता और पांच बार के सांसद अधीर रंजन चौधरी 2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद अब विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। वह बहरामपुर सीट से भाजपा के मौजूदा विधायक सुब्रत मैत्रा को चुनौती दे रहे हैं।
दिलीप घोष: भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष खड़गपुर सदर से अपनी वापसी की कोशिश कर रहे हैं। उनका कड़ा मुकाबला टीएमसी के प्रदीप सरकार से है, जिन्होंने 2019 के उपचुनाव में यह सीट जीती थी।
अग्निमित्रा पॉल: भाजपा की एक और प्रमुख नेता, जो अपनी मौजूदा आसनसोल दक्षिण सीट बचाने के लिए मैदान में हैं। उनके खिलाफ टीएमसी ने वरिष्ठ नेता तापस बनर्जी को उतारा है।
निशीथ प्रमाणिक: पूर्व केंद्रीय मंत्री और उत्तर बंगाल में भाजपा के प्रभावशाली नेता। उन्होंने अपनी पुरानी सीट दिनहाटा छोड़ दी है और इस बार माथाभांगा सीट से टीएमसी के सब्लू बर्मन के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।
उदयन गुहा: टीएमसी के राज्य मंत्री, जो निशीथ प्रमाणिक के जाने के बाद दिनहाटा सीट पर पार्टी का कब्जा बनाए रखने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।
हुमायूं कबीर: टीएमसी के पूर्व मंत्री, जिन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था। अब वह अपनी नई पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी के बैनर तले डोमकल सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
जाकिर हुसैन: ‘बीड़ी किंग’ के नाम से मशहूर टीएमसी उम्मीदवार जाकिर हुसैन जंगीपुर से मैदान में हैं। घोषित 133 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ वह इस चुनाव के सबसे अमीर उम्मीदवार हैं।
कृष्णा कल्याणी: रायगंज सीट से टीएमसी के उम्मीदवार। उन्होंने 2024 में भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी लेकिन बाद में पाला बदल लिया। उनका मुकाबला भाजपा के कौशिक चौधरी से है।
सुब्रत दत्ता: टीएमसी के टिकट पर ओन्दा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, वह उन उम्मीदवारों में शामिल हैं जिन पर सबसे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनके अलावा बालुरघाट, ओन्दा, दार्जिलिंग और जंगीपुर सीटों पर भी सीमावर्ती मुद्दों, गोरखालैंड की क्षेत्रीय मांग और आपराधिक व धनबल वाले उम्मीदवारों की वजह से कड़ी और दिलचस्प टक्कर देखने को मिल सकती है।
पश्चिम बंगाल में पिछले चुनाव के क्या नतीजे थे?
पश्चिम बंगाल में पिछले विधानसभा चुनाव 2021 में हुए थे, जिसमें ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने भारी बहुमत से जीत हासिल कर लगातार तीसरी बार सरकार बनाई थी।
2021 के चुनावों में लेफ्ट फ्रंट, कांग्रेस और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के गठबंधन का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। पश्चिम बंगाल के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि कांग्रेस और माकपा अपना खाता भी नहीं खोल पाए। इस गठबंधन में सिर्फ आईएसएफ को एक सीट पर जीत मिली।
दूसरी तरफ पिछले चुनाव में सबसे चर्चित मुकाबला नंदीग्राम सीट पर था। यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सामना भाजपा के शुभेंदु अधिकारी (जो पहले टीएमसी में ही उनके करीबी थे) से हुआ था। इस कड़े मुकाबले में शुभेंदु ने ममता बनर्जी को लगभग 1,956 वोटों से हरा दिया था। हालांकि, ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की थी।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदाताओं और मतदान केंद्रों के संदर्भ में चुनाव आयोग की तरफ से विस्तृत आंकड़े और व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
मतदान केंद्रों से जुड़ी विशेष व्यवस्थाएं
इस बार राज्य में कुल 75,032 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतदान के दिन भीड़ कम करने के लिए हर एक केंद्र पर अधिकतम 1200 मतदाताओं की सीमा तय की गई है।
चुनाव प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता के लिए 100% मतदान केंद्रों के अंदर और बाहर वेबकास्टिंग की जाएगी। इसे लगातार जारी रखने के इंतजाम भी किए गए हैं।
हर मतदान केंद्र पर पीने का पानी, वेटिंग शेड, पानी युक्त शौचालय, पर्याप्त रोशनी और दिव्यांग व बुजुर्ग मतदाताओं की सुविधा के लिए व्हीलचेयर हेतु 1:12 के ढलान वाले स्थायी रैंप की व्यवस्था की गई है।
महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक मतदान केंद्र ऐसा होगा जिसे पूरी तरह से महिलाओं की ओर प्रबंधित किया जाएगा। – इसमें पुलिस और सुरक्षाकर्मी भी महिलाएं ही होंगी। इसी तरह हर एक विधानसभा में कम से कम एक केंद्र का प्रबंधन विशेष रूप से दिव्यांग कर्मियों की किया जाएगा।
जिले के सबसे कम उम्र के पात्र कर्मचारियों द्वारा प्रबंधित कम से कम एक मतदान केंद्र होगा। साथ ही इको-फ्रेंडली और स्थानीय कला-संस्कृति को दर्शाने वाले मॉडल मतदान केंद्र भी बनाए गए हैं।
मतदाता अपना मोबाइल फोन मतदान केंद्र के अंदर नहीं ले जा सकेंगे, लेकिन उनकी सुविधा के लिए प्रवेश द्वार के ठीक बाहर मोबाइल फोन (स्विच-ऑफ़ मोड में) जमा करने की व्यवस्था होगी, जिसके बदले उन्हें एक टोकन दिया जाएगा।
वोट की पूर्ण गोपनीयता के लिए एकसमान 30x24x24 इंच आकार वाले अपारदर्शी स्टील-ग्रे रंग के वोटिंग कंपार्टमेंट का इस्तेमाल किया जाएगा।
मतदाता सूची में अपना क्रमांक और बूथ सही से ढूंढने में मदद करने के लिए मतदान परिसरों में विशेष सहायता बूथ भी स्थापित किए जाएंगे।
इस बार राज्य में कौन से खास चेहरे चुनावी मैदान में?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में कई दिग्गज राजनेता और चर्चित चेहरे चुनावी मैदान में उतरे हैं। इनमें मुख्यमंत्री स्टालिन से लेकर विपक्षी दल अन्नाद्रमुक के प्रमुख नेता ई. पलानीस्वामी और अभिनेता से नेता बने विजय तक शामिल हैं।
एमके. स्टालिन: तमिलनाडु के मौजूदा मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष, इस बार कोलाथुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
एदापद्दी के. पलानीस्वामी: मुख्य विपक्षी दल के नेता और एआईएडीएमके गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। वे एदापद्दी सीट से चुनाव मैदान में हैं।
दलपति विजय: दक्षिण भारतीय सिनेमा के मशहूर अभिनेता विजय अपनी नई पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के साथ पहली बार राजनीतिक मैदान में उतरे हैं और वे पेरम्बूर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
उदयनिधि स्टालिन: मुख्यमंत्री स्टालिन के बेटे और वर्तमान सरकार में प्रमुख चेहरा, जो चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
ओ. पन्नीरसेल्वम: एआईएडीएमके से निष्कासित होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम ने द्रमुक का दामन थाम लिया है और अब वे द्रमुक के टिकट पर बोडिनायक्कनूर से चुनाव लड़ रहे हैं।
तमिलिसाई सुंदरराजन: पूर्व राज्यपाल और भाजपा की प्रमुख नेता, जो मैलापुर सीट से चुनाव लड़ रही हैं।
एल. मुरुगन: भाजपा के एक और बड़े नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री इस बार अविनाशी सुरक्षित सीट से मैदान में हैं।
नायनार नागेंद्रन: भाजपा के वरिष्ठ नेता जो सत्तूर से चुनाव लड़ रहे हैं।
प्रेमलता विजयकांत: डीएमडीके की नेता, जो इस बार विरुधाचलम से चुनाव लड़ रही हैं।
सौम्या अंबुमणि: पत्तली मक्कल कच्ची (पीएमके) के प्रमुख अंबुमणि रामदौस की पत्नी सौम्या अंबुमणि धर्मपुरी सीट से चुनाव लड़ रही हैं।
वी. सेंथिल बालाजी: कुछ समय पहले ही केंद्रीय एजेंसियों की जांच में घिरे और द्रमुक सरकार में मंत्री रहे वी. सेंथिल बालाजी कोयंबटूर दक्षिण से चुनावी मैदान में हैं।
वीके. शशिकला: इन्होंने अपनी एक नई पार्टी ‘ऑल इंडिया पुरत्ची थलैवर मक्कल मुनेत्र कझगम बनाई है और पीएमके के एक गुट के साथ गठबंधन करके 120 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं।
तमिलनाडु में इस बार किस सीट पर और क्यों कड़ी टक्कर की संभावना?
तमिलनाडु चुनाव में किसी एक या दो सीट पर नहीं, बल्कि राज्य की कई सीटों पर कड़ी टक्कर होने के आसार हैं। इस बार राज्य में डीएमके गठबंधन, एआईएडीएमके गठबंधन, अभिनेता विजय की नई पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम और सीमान की नाम तमिझर काची (एनटीके) के बीच एक कड़ा चार-तरफा मुकाबला देखने को मिल रहा है। अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके सत्ता-विरोधी जगह पर कब्जा करने के लिए सीधे द्रमुक पर हमला कर रही है। माना जा रहा है कि टीवीके उन अल्पसंख्यक (ईसाई और मुस्लिम) वोटों में भी बड़ी सेंध लगा सकती है, जो पारंपरिक रूप से द्रमुक के पक्के समर्थक माने जाते रहे हैं। जिन क्षेत्रों में एआईएडीएमके कमजोर है, जैसे चेन्नई, उसके आसपास के इलाके और कावेरी डेल्टा क्षेत्र, वहां विजय की टीवीके मजबूती से प्रचार में उभरी है और बड़ी संख्या में लोगों को जुटाने में सफल रही है। ऐसे में इन सीटों पर मुकाबला बेहद कड़ा हो गया है।
तमिलनाडु में पिछले चुनाव के क्या नतीजे थे?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2021 में द्रमुक के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (एसपीए) ने शानदार जीत दर्ज की थी और एआईएडीएमके के लगातार 10 साल के शासन को खत्म कर सरकार बनाई थी।
राज्य की कुल 234 विधानसभा सीटों में से डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 159 सीटें जीतीं। वहीं मुख्य विपक्षी गठबंधन एनडीए (एआईएडीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन) को 75 सीटें मिलीं।
चुनाव नतीजों को देखा जाए तो सामने आता है कि द्रमुक ने 234 सीट वाली विधानसभा में अकेले 133 सीटें जीतकर पिछले 25 वर्षों में पहली बार अपने दम पर पूर्ण बहुमत (118 का जादुई आंकड़ा) हासिल किया। द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन को कुल मिलाकर 45.38% वोट मिले, जिसमें अकेले द्रमुक का वोट शेयर 37.70% रहा, जबकि एनडीए गठबंधन 39.71% वोट मिले, जिसमें एआईएडीएमके का हिस्सा 33.29% रहा।
इन दो प्रमुख गठबंधनों के अलावा कोई भी अन्य पार्टियां, जैसे- कमल हासन की मक्कल निधी मय्यम, टीटीवी. दिनाकरन की एएमएमके या सीमान की एनटीके और यहां तक कि निर्दलीय उम्मीदवार एक भी सीट नहीं जीत सका। इस चुनाव परिणाम के बाद एमके. स्टालिन तमिलनाडु के 12वें मुख्यमंत्री बने। चुनाव में एक बड़ा उलटफेर यह रहा कि पलानीस्वामी सरकार के 11 मंत्री अपनी-अपनी सीटों से चुनाव हार गए थे।







