राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा ‘हमने उन्हें सुरक्षित निकाल लिया! पिछले कुछ घंटों में अमेरिकी सेना ने इतिहास के सबसे साहसी खोज और बचाव अभियानों में से एक सफलतापूर्वक अंजाम दिया। हमारे अद्भुत क्रू मेम्बर अधिकारी, जो एक सम्मानित कर्नल हैं, अब पूरी तरह सुरक्षित हैं।’
दो अमेरिकी विमानों को बनाया था निशाना
गौरतलब है कि ईरान ने भी अमेरिकी विमानों और नागरिक लक्ष्यों पर हमला किया। यह F-15E पहला अमेरिकी विमान था जो ईरानी क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हुआ। ट्रंप ने पहले कहा था कि अमेरिका ने ईरान को ध्वस्त कर दिया है और युद्ध बहुत जल्दी खत्म हो जाएगा। अमेरिकी-ईरानी संघर्ष में A-10 हमले वाला दूसरा अमेरिकी विमान भी गिरा। दुर्घटना के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के कोहगिलुए और बायर अहमद प्रांत में पहाड़ी क्षेत्र में खोज और बचाव अभियान चलाया।
ईरान ने इसके लिए नागरिकों को इनाम की पेशकश की थी और दावा किया कि उसने दो अमेरिकी ब्लैकहॉक हेलिकॉप्टरों पर भी हमला किया। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एफ-15ई एयरक्राफ्ट को सेंट्रल ईरान के ऊपर टारगेट किया गया था और माना जा रहा है कि यह कोगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत में गिरा। हालांकि, ईरानी अधिकारियों की तरफ से फिलहाल कोई पुष्टि नहीं की गई है।
100 कमांडर, 12 हेलीकॉप्टर …अमेरिका ने झोंकी ताकत
अमेरिकी के लिए क्यों ‘नाक का सवाल’ था ये ऑपरेशन
- दरअसल 44 साल पहले 1979-80 में ईरान में अमेरिकी दूतावास में 52 अमेरिकी बंधक बनाए गए थे. तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने ऑपरेशन ईगल क्लॉ नाम का रेस्क्यू मिशन चलाया, लेकिन वहां पहुंचे हेलीकॉप्टर क्रैश हो गए.
- अप्रैल 1980 में अमेरिकी कमांडो ईरान के रेगिस्तान में उतरे. खराब मौसम और तकनीकी खराबी के कारण कई हेलीकॉप्टर काम नहीं कर पाए.मिशन के दौरान एक हेलीकॉप्टर और विमान टकरा गए, जिसमें 8 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई.
- मिशन बीच में ही रद्द करना पड़ा और बंधकों को नहीं छुड़ाया जा सका. यह अमेरिका के लिए बड़ी सैन्य और राजनीतिक असफलता मानी गई. ऑपरेशन बुरी तरह से फेल हो गया और पूरी दुनिया में अमेरिका की छवि खराब हुई थी. इसके बाद अमेरिका ने अपनी स्पेशल फोर्सेज और रेस्क्यू ऑपरेशन की रणनीति में बड़े बदलाव किए.
- ईरान के IRGC प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फकारी ने कहा था कि 2 अप्रैल, 2026 अमेरिका के लिए ‘बेइज्जती का ब्लैक फ्राइडे’ था. उन्होंने दावा किया कि उनका नया सिस्टम इतना शक्तिशाली है कि दुश्मन के जेट, ड्रोन और हेलीकॉप्टर आसानी से मार गिराए जा रहे हैं. ऐसे में अमेरिका के लिए येऑपरेशन नाक का सवाल बन गया था.







