भारतीय नौसेना के स्वदेशी स्टेल्थ युद्धपोत आई.एन.एस. ‘तारागिरी’ को आज विशाखापत्तनम में बेडे में शामिल किया जाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज विशाखापत्तनम के नौसेना डॉकयार्ड में अत्याधुनिक स्टील्थ युद्ध पोत आई.एन.एस तारागिरी के कमीशनिंग समारोह में शामिल होंगे। पूर्वी तट पर इसकी तैनाती हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निगरानी और परिचालन क्षमता को और मजबूत करेगी।
आई.एन.एस तारागिरी में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। रक्षामंत्री भारतीय नौसेना और रक्षा अनुसंधान से संबंधित कई आधिकारिक कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे। वे परिचालन तैयारियों का आकलन करने के प्रयासों के अंतर्गत शहर में प्रमुख नौसेना सुविधाओं का निरीक्षण करेंगे। इसके अलावा, वे नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला का दौरा भी करेंगे।
- प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सात नीलगिरी क्लास के युद्धपोतों में से पहला एडवांस स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरी को जनवरी 2025 में नौसेना में शामिल किया गया था. इसके बाद इसी वर्ष हिमगिरी और उदयगिरी को भी शामिल कर लिया गया. अब तारागिरी की बारी है.
- गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है. यह एंटी-सर्फेस और एंटी-शिप युद्ध में अत्यंत सक्षम है. एंटी-एयर वॉरफेयर के लिए इसमें लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल ‘बराक-8’, एयर डिफेंस गन, तथा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए स्वदेशी टॉरपीडो ‘वरुणास्त्र’ और रॉकेट लॉन्चर लगाए गए हैं.
- तारागिरी लंबी दूरी से आने वाले हमलों का पता लगाने, ट्रैक करने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए आधुनिक सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और मल्टी-फंक्शन डिजिटल रडार से लैस है. इस फ्रिगेट में हेलिकॉप्टर हैंगर भी है, जिसमें दो हेलिकॉप्टर आसानी से लैंड कर सकते हैं.
- प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सभी सात फ्रिगेट में लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी कंपनियों से लिए गए हैं. इसका डिजाइन और स्टील भी स्वदेशी है. इसका डिजाइन नौसेना के वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। 6700 टन वजनी यह फ्रिगेट 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है.
- प्रोजेक्ट 17ए के तहत सात नीलगिरी क्लास गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे हैं. इनमें से चार फ्रिगेट मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) और तीन गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा बनाए गए हैं. वर्ष 2019 से 2022 के बीच इन सभी को लॉन्च किया जा चुका है.
- तारागिरी नीलगिरी क्लास का चौथा फ्रिगेट है, जो अब नौसेना में शामिल होने जा रहा है, जबकि बाकी तीन के समुद्री परीक्षण जारी हैं. इन सभी स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट के शामिल होने के बाद समुद्र में भारत की ताकत में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.
- नीलगिरी क्लास के सभी युद्धपोतों का डिज़ाइन नेवल डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा किया गया है. प्रोजेक्ट 17 और 17ए के सभी फ्रिगेट के नाम भारत की पर्वत शृंखलाओं पर रखे गए हैं, जैसे- शिवालिक, सह्याद्रि, सतपुड़ा, नीलगिरी, हिमगिरी, तारागिरी, उदयगिरी, दूनागिरी, महेंद्रगिरि और विंध्यगिरि.
स्वदेशी युद्धपोत है INS तारागिरी
यह युद्धपोत मेड इन इंडिया प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया गया है। यह 6,670 टन का ‘मेक इन इंडिया’ की भावना और हमारे स्वदेशी शिपयार्ड की इंजीनियरिंग क्षमताओं का प्रतीक है। अधिकारियों ने बताया कि 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से बना यह युद्धपोत घरेलू औद्योगिक तंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है।
एमडीएल ने 28 नवंबर को नौसेना को सौंपा था
नीलगिरी श्रेणी (प्रोजेक्ट 17ए) का चौथा जहाज और मझगांव डॉक शिपबिल्डिंग लिमिटेड (एमडीएल) द्वारा निर्मित तीसरा जहाज ‘तारागिरी’ पिछले साल 28 नवंबर को एमडीएल, मुंबई में नौसेना को सौंप दिया गया था। तारागिरी डीजल या गैस (सीओडीओजी) द्वारा संचालित किया जा सकेगा। युद्धपोत का हथियार भंडार विश्व स्तरीय है।
नीलगिरी की क्या है खासियत
तारागिरी में सतह से सतह पर मार करने वाली सुपरसोनिक मिसाइलें, सतह से हवा में मार करने वाली मध्यम दूरी की मिसाइलें और एक विशेष पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली हैं। ये प्रणालियां अत्याधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से निर्बाध रूप से एकीकृत हैं जिससे चालक दल पलक झपकते ही खतरों का जवाब दे सकता है। नौसेना ने कहा कि इसका आकार अधिक सुव्यवस्थित है और इसमें कम ‘रडार क्रॉस-सेक्शन’ है, जिससे यह घातक ‘स्टील्थ’ (छिपकर वार करने की क्षमता) के साथ काम कर सकता है। इसे मानवीय संकटों की जटिलताओं से निपटने के लिए भी बनाया गया है। इसकी लचीली मिशन प्रोफ़ाइल इसे उच्च-तीव्रता वाले युद्ध से लेकर ‘मानवीय सहायता और आपदा राहत’ तक हर तरह के कार्यों के लिए आदर्श बनाती है।
बता दें कि भारतीय नौसेना विश्वसनीय और ‘आत्मनिर्भर’ शक्ति के रूप में लगातार विकसित हो रही है। यह एक ऐसे ‘विकसित और समृद्ध भारत’ के लिए समुद्रों की रक्षा कर रही है, जिसकी सुरक्षा उन जहाजों द्वारा की जाती है जिन्हें भारतीयों द्वारा ही डिज़ाइन किया गया है। तारागिरी एक उभरती हुई समुद्री शक्ति का प्रतीक है।







