मिडिल ईस्ट में जारी तनाव पर आज (23 मार्च) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर 2 बजे लोकसभा में बोलेंगे। वे इस दौरान ताजा हालातों के बारे में देश को जानकारी दे सकते हैं। पीएम मोदी जंग के बीच गैस और तेल की किल्लत को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं। पीएम मोदी देश को यह भी बता सकते हैं कि सरकार मौजूदा समय में इस संकट से निपटने के लिए क्या-क्या कदम उठा रही है?
इससे पहले सोमवार (23 मार्च) सुबह पीएम मोदी ने संसद भवन परिसर में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बड़ी बैठक की थी। इस मीटिंग में सचिव स्तर के अधिकारियों ने यहां सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों को मौजूदा हालात की जानकारी दी।
वहीं, रविवार (22 मार्च) शाम भी प्रधानमंत्री ने दिल्ली में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की एक हाईलेवल मीटिंग की थी।
जेडीयू सांसद संजय कुमार झा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में पश्चिम एशिया के हालात की समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि अगर स्थिति नियंत्रण में है और एलपीजी स्थिरता को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। अगर भविष्य में हालात बिगड़ते हैं, तो सरकार जरूरी कदम उठाएगी।
CAPF से जुड़े गृह मंत्रालय के इस विधेयक का मकसद क्या है?
बिल के उद्देश्यों के अनुसार, यह कानून सीएफीएफ में ग्रुप ‘ए’ सामान्य ड्यूटी अधिकारियों और अन्य अधिकारियों की भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति और सेवा शर्तों को एकसमान ढंग से विनियमित करेगा। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने 2025 के अपने फैसले में सीएफीएफ में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति कम करने और कैडर रिव्यू करने का निर्देश दिया था। केंद्र की पुनर्विचार याचिका को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
सेवानिवृत्त सीएपीएफ अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट का किया है रुख
सेवानिवृत्त सीएपीएफ अधिकारियों के एक समूह ने हाल ही में गृह सचिव गोविंद मोहन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका भी दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। सरकार का कहना है कि सीएपीएफ देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमा सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं और आईपीएस अधिकारियों की तैनाती से केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित होता है।







