आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दुनिया में बढ़ते तनाव को लेकर बयान दिया है। नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि आखिर क्यों दुनिया में शांति नहीं हो पा रही है। भागवत ने स्वार्थ और दूसरों पर काबू पाने की इच्छा को इन विवादों की जड़ बताया। उन्होंने कहा कि जब तक लोग अपनी सोच नहीं बदलेंगे, तब तक शांति संभव नहीं है। भारत के प्राचीन ज्ञान को उन्होंने दुनिया की समस्याओं का समाधान बताया। उनका कहना है कि पूरी दुनिया को एक परिवार की तरह देखना ही सुख का रास्ता है।
भागवत के बयान की बड़ी बातें…
- धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्म परिवर्तन और ऊंच-नीच की भावनाएं आज भी मौजूद हैं। भारत का प्राचीन ज्ञान हमें सिखाता है कि सभी आपस में जुड़े हुए हैं और एक हैं।
- धर्म केवल शास्त्रों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि लोगों के व्यवहार में भी झलकना चाहिए।
- अनुशासन और नैतिक मूल्यों के पालन के लिए लगातार अभ्यास जरूरी है और इसमें अक्सर निजी परेशानियां भी आती हैं।
नागपुर में एक मराठी अखबार के 100 साल पूरे होने पर गुरुवार को भागवत ने बताया कि स्वयंसेवकों को मजबूत बनाने और काम बेहतर करने के लिए संगठन में बदलाव किए गए हैं। भागवत ने कहा कि RSS का काम बहुत तेजी से बढ़ रहा है और लोगों की उम्मीदें भी बढ़ रही हैं, इसलिए अब काम को अलग-अलग हिस्सों में बांटने विकेंद्रीकरण की शुरुआत की जा रही है।
उन्होंने कहा कि पहले RSS में 46 प्रांत थे, अब इन्हें बढ़ाकर छोटी-छोटी इकाईयों यानी 86 संभागों में बांटा जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर काम आसानी और अच्छे तरीके से हो सके।
भागवत कहा कि संघ के काम करने का तरीका नहीं बदलेगा। दोस्ती बनाकर और अच्छे उदाहरण देकर समाज में बदलाव लाना ही संघ का मुख्य तरीका है, और यह आगे भी चलता रहेगा।







