ईरान और इजराइल की जंग में तेल और गैस ठिकाने निशाने पर हैं. इजराइल ने बुधवार को ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया, जिसका जवाब देते हुए ईरान ने कतर, UAE और सऊदी अरब में गैस और तेल ठिकानों पर स्ट्राइक की. ईरान और इजराइल की इस लड़ाई में पूरा अरब धधक रहा है. हालात बेकाबू हो चुके हैं. कोई नहीं जानता ये आग कैसे और कब बुझेगी.
ईरान ने कहां-कहां किया हमला?
ईरान ने पलटवार करते हुए कतर में कतरएनर्जी के LNG एक्सपोर्ट सेंटर रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी को निशाना बनाया है. ये दुनिया का सबसे बड़ा LNG एक्सपोर्ट प्लांट है. रास लफान से हर साल लगभग 77 से 80 मिलियन टन LNG का निर्यात होता है. यह ग्लोबल LNG व्यापार का लगभग 20% है, जिसकी आपूर्ति मुख्य रूप से एशिया और यूरोप को की जाती है.
UAE में गैस ऑपरेशन्स पर भी असर पड़ा है. हबशान गैस प्रोसेसिंग प्लांट ने अपना काम रोक दिया है. यह UAE के गैस नेटवर्क का एक अहम प्रोसेसिंग हब है, जहां हर दिन अरबों क्यूबिक फीट गैस प्रोसेस की जाती है. इस रुकावट से खाड़ी क्षेत्र में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बड़े खतरे का संकेत मिलता है.
क्या भारत की सप्लाई पर पड़ेगा असर?
ईरान ने सबसे बड़ा हमला कतर पर किया है. इन हमलों के बाद सवाल उठता है कि क्या इसका भारत में LNG की सप्लाई पर असर पड़ेगा. भारत की पाइप वाली गैस सप्लाई घरेलू उत्पादन और LNG के इंपोर्ट का एक मिश्रण है. भारत की PNG आपूर्ति का लगभग आधा हिस्सा घरेलू गैस है, जिसे ज़मीन और समुद्र में स्थित गैस क्षेत्रों से निकाला जाता है, जैसे ONGC और Reliance जैसी कंपनियों द्वारा. बाकी ज़रूरत LNG के इंपोर्ट से पूरी की जाती है.
जानकार कहते हैं कि पाइप वाली गैस का इस्तेमाल करने वाले घरों और गाड़ियों के लिए किसी भी तरह की रुकावट की उम्मीद नहीं है. सरकार ने इन दोनों क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है.
हाल के वर्षों में LNG ने देश में उपलब्ध कुल गैस का लगभग आधा हिस्सा सप्लाई कराया है. वर्ष 2025 में इंपोर्ट लगभग 24-25 मिलियन टन रहा, जिससे भारत दुनिया के सबसे बड़े LNG खरीदारों में से एक बन गया. और इसका एक बड़ा हिस्सा एक ही जगह से आता है और वो है कतर.
भारत के आधे से ज्यादा LNG इंपोर्ट कतर के सप्लायर्स के साथ लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े हुए हैं. LNG अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, रूस और अफ्रीका के कुछ हिस्सों से भी आती है, लेकिन कम मात्रा में. देश का 50 से 55 फीसदी LNG इंपोर्ट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है, जिसे ईरान ने बंद कर रखा है. हालांकि भारत के जहाजों को जाने की उसने इजाजत दी है. कच्चे तेल के विपरीत भारत LNG का कोई रणनीतिक भंडार नहीं रखता है. गैस को मुख्य रूप से वर्किंग इन्वेंट्री के रूप में स्टोर किया जाता है.
भारत और कतर के बीच हुई थी डील
फरवरी 2024 में भारत की पेट्रोनेट LNG ने कतरएनर्जी के साथ 7.5 मिलियन टन प्रति वर्ष LNG इंपोर्ट करने के लिए 20 साल के समझौते को रिन्यू किया, जिसकी कीमत लगभग USD 78 बिलियन है. Kpler के डेटा के अनुसार, पिछले साल US भारत का तीसरा सबसे बड़ा LNG सप्लायर था. कतर और संयुक्त अरब अमीरात के बाद अमेरिका ने कुल 25 मिलियन टन इंपोर्ट में 12% का योगदान दिया.






