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क्या भारत विरोधी बालेन शाह के PM बनने पर सुधरेंगे रिश्ते………..

UB India News by UB India News
March 8, 2026
in खास खबर, संपादकीय
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क्या भारत विरोधी बालेन शाह के PM बनने पर सुधरेंगे रिश्ते………..
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रैपर से राजनेता बने बालेन (बालेंद्र) शाह नेपाल के प्रधानमंत्री बनने की राह में हैं. उनकी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने 129 में से 100 सीटें जीतकर पुरानी पार्टियों को करारी शिकस्त दी है. हिप-हॉप कलाकार बालेन इंस्टाग्राम और यूट्यूब के जरिए नेपाल के युवाओं के दिल में बस और जुबान पर चढ़ गए. उनके गीतों में भ्रष्टाचार विरोध की गूंज थी. 2022 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर काठमांडू के मेयर चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की थी. जाहिर तौर पर यह छोटा चुनाव था लेकिन इस जीत को पारंपरिक राजनीति के खिलाफ व्यवस्था विरोध के वोट के तौर पर दर्ज किया गया. 2025 में नेपाल के भ्रष्टाचार विरोधी युवाओं के Gen-Z आंदोलन ने नेपाल की अगुवाई के लिए उनका रास्ता साफ कर दिया.

कम वक्त में वे परिपक्व राजनेता बन चुके थे. आगे की उनकी चालें सधी हुई थीं. अंतरिम सरकार की अगुवाई की जगह उन्होंने चुनाव के इंतजार का फैसला किया. अपदस्थ प्रधानमंत्री के.पी.ओली के खिलाफ मैदान में उतरे. सिर्फ उनके निर्वाचन क्षेत्र में नहीं बल्कि पूरे नेपाल में चली बालेन वेब में विरोधी दिग्गज नेताओं के तम्बू उखड़ गए. बालेन की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी बड़ी जीत की ओर है. नेपाल के चुनाव और वहां की नई सरकार को लेकर भारत में स्वाभाविक उत्सुकता है. बालेन की भारत-नेपाल रिश्तों को लेकर अब तक कैसी सोच रही है ? एक नज़र.

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नेपाल की अस्थिरता ने बालेन की राह की आसान

कर्नाटक की विश्वेश्वरैया टेक्निकल यूनिवर्सिटी से एम.टेक.की डिग्री हासिल करके नेपाल पहुंचे बालेन ने नेपाल के युवाओं के बीच रैपर के तौर पर गीतों के जरिए अपनी जगह बनाई. उन्होंने काठमांडू का 2022 में मेयर बनने के लिए किसी परंपरागत राजनीतिक दल से जुड़ने की जगह निर्दलीय उम्मीदवारी का फैसला लिया. यह पद इतना बड़ा नहीं था कि वह किसी व्यक्ति की राष्ट्रीय पहचान का जरिया बन जाए. लेकिन एक रैपर के रूप में प्राप्त लोकप्रियता और भ्रष्टाचार विरोधी गीतों – भाषणों के जरिए जल्दी ही वे नेपाल में व्यवस्था विरोध की मुखर युवा आवाज बन गए. बालेन की कामयाबी में नेपाल में जारी राजनीतिक अस्थिरता भी मददगार बनी.

2015 में नया संविधान लागू होने के बाद से सरकारें जल्दी-जल्दी बनीं और बिगड़ी. भ्रष्टाचार में तेज उछाल आया. जनता की परेशानियां बढ़ीं. युवा क्रुद्ध हुए. विकल्प की तलाश थी. ऐसे चेहरे की तलाश थी जो बदलाव का भरोसा दे सके.

चुनाव में पुराने दल-नेता किए गए खारिज

2008 में नेपाल में राजतंत्र समाप्त हुआ. लोकतंत्र की स्थापना हुई. लोगों को अपनी पसंद की सरकार चुनने का अधिकार हासिल हुआ. लेकिन चुनावों में कोई पार्टी स्पष्ट बहुमत नहीं हासिल कर सकी. गठबंधन सरकारों के दौर में सत्रह साल के भीतर चौदह सरकारें बनीं. ये सरकारें देश को स्थिरता नहीं दे सकीं. जल्दी-जल्दी सरकारों के बनने-गिरने के बीच स्थितियां और बिगड़ती गईं. भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी बेकाबू हो गए. नेपाल समस्याओं के भंवरजाल में फंसता गया. इसकी परिणित 2025 के Gen-Z आंदोलन की व्यापक हिंसा के रूप में हुई, जिसने नेपाल में बहुत-कुछ तहस-नहस कर दिया. ओली सरकार की बर्खास्तगी के बाद वजूद में आई सुशीला कार्की की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार ने वायदे के अनुसार तय समय में चुनाव कराए. नतीजों का संदेश है कि आंदोलन के समय नेपाल की पुरानी पार्टियों और नेताओं के प्रति जनता का जो गुस्सा था, वह बरकरार है.

जीत के बाद की चुनौतियां और कठिन

पूरी संभावना है कि नेपाल की नई सरकार की अगुवाई बालेन शाह के हाथों में रहेगी. बदलाव की लहर पर सवार बालेन शाह से वोटर बड़ी उम्मीदें लगाए हुए हैं. अंतरिम सरकार के नेतृत्व को बालेन ने चुनाव में हिस्सा लेने के नाम पर ठुकरा दिया था. क्यों? आंदोलनों के जरिए सरकार पलटना आंदोलनकारियों की जीत होती है. लेकिन यह जीत अपने साथ चुनौतियां भी लाती है.

अपदस्थ सरकार की नाकामियों को कामयाबी में बदलने की चुनौती नई सरकार के सामने होती है. उन सपनों को सच में बदलने की जिम्मेदारी होती है, जिन्हें दिखा लोगों को सड़कों पर उतारा जाता है. तुरंत सत्ता में आने पर आंदोलन के दौरान ध्वस्त व्यवस्था को पटरी पर लाना ज्यादा मुश्किल होता है.

अंतरिम सरकार के समय बीता वक्त बालेन के लिए सेफ्टी वाल्व सरीखा है. लेकिन आगे के वक्त की चुनौतियां भी बहुत कठिन हैं. बालेन नेपाल में जो कुछ कर सकेंगे, उसमें उन्हें भारत के सहयोग की भी जरूरत रहेगी. सवाल है कि भारत के प्रति उनका क्या रुख होगा? अपने छोटे लेकिन सरगर्म सियासी सफर में बालेन अब तक भारत के विषय में क्या सोचते और बोलते रहे हैं?

Nepal Election Will Balen Shah Make Friendly Relations With India Rsp Won (1)

बालेन शाह के सामने चुनौतियां भी कम नहीं होंगी.

बात-बात में भारत विरोध

बालेन कई मौकों पर कहते रहे हैं कि नेपाल को बड़ी शक्तियों के प्रभाव से स्वतंत्र नीति अपनानी चाहिए. राजनीतिक मंचों पर भारत की प्रायः उन्होंने आलोचना की. 2025 में एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने भारत, चीन और अमेरिका सहित बड़ी शक्तियों पर नाराज़गी जताई थी. उनके समर्थकों ने नेपाल के विस्तारित नक्शे ,जिसमें भारतीय क्षेत्र भी दिखाए जाते हैं, को बढ़ावा दिया. मेयर के तौर पर अपने कार्यालय में भी इसे टांगा.

1806 की सुगौली संधि के विरुद्ध आवाज उठाने वालों में भी वे शामिल हैं. भारत-नेपाल के रोटी-बेटी के संबंध हैं. वहां सर्वाधिक हिंदू धर्मावलंबी हैं. दोनों देशों की साझा धार्मिक-सांस्कृतिक एकता का सदियों पुराना इतिहास है. यह साझा पहचान बालेन को नहीं भाती.

बाॅलीवुड की एक फिल्म आदिपुरुष के एक संवाद में माता सीता को भारत की बेटी बताया जाना बालेन को अखर गया और उन्होंने नेपाल में भारत की फिल्मों के प्रदर्शन पर रोक की मांग भी कर डाली थी. असलियत में भारत-नेपाल संबंधों में भारत की कथित बिग ब्रदर भूमिका नेपाल में बहस का एक मुद्दा रहती है. भारत विरोधी भावनाओं को नेपाल में हवा देने वाली ताकतें इस धारणा को फैलाती रही हैं कि भारत नेपाल के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता है. बालेन शाह व्यवस्था विरोध के साथ ही अपनी राष्ट्रवादी छवि चमकाने के लिए भारत विरोधी भावनाओं को उकसाते रहे हैं.

Nepal Elections

नेपाल.

घरेलू राजनीति में भारत-विरोधी बयान लोकप्रियता का जरिया

पिछले कुछ समय से नेपाल की कम्युनिस्ट सरकारें चीन को तरजीह देती रही हैं? बालेन का क्या रुख होगा? क्या बालेन शाह भारत-विरोधी हैं? इस मसले पर कोई राय कायम करना जल्दबाजी होगी. नेपाल की घरेलू राजनीति में भारत-विरोधी बयान देकर वहां के अनेक नेता लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश करते रहे है.

भारत और चीन के बीच संतुलन की नीति भी नेपाल अपनाता रहा है. सत्ता में आ रही वहां की नई पीढ़ी की प्राथमिकताओं में अब तक भ्रष्टाचार विरोध, रोजगार के अवसर और प्रशासनिक सुधार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं. उनके एजेंडे में अभी तक विदेश नीति पीछे थी.

नेपाल के विकास के लिए भारत का सहयोग जरूरी

नेपाल की नई सरकार का भारत को लेकर क्या रुख होगा , इसे समझने के लिए याद रखना होगा कि नेपाल की अर्थव्यवस्था, व्यापार और रोजगार के मसलों में भारत को दरकिनार नहीं किया जा सकता. वहां की कोई भी स्थिर सरकार भारत से टकराव नहीं चाहेगी.

मुमकिन है कि बालेन अपनी राष्ट्रवादी छवि के लिए सार्वजनिक रूप से सख्त बयान लेकिन व्यावहारिक तौर पर भारत के साथ व्यापार प्रोत्साहन की कोशिशें तेज करें. चीन-भारत के बीच संतुलन साधने की नीति पर भी वे चल सकते हैं. राजशाही के खात्मे के बाद से नेपाल लगातार अस्थिरता के दौर से गुजरा है. पहले Gen-Z आंदोलन और फिर चुनाव के जरिए वहां की जनता ने पुराने नेताओं और दलों को खारिज किया है. वोटरों ने इस उम्मीद के साथ नई पीढ़ी को आगे बढ़ने का मौक़ा दिया है कि एक स्थिर और गतिशील सरकार के जरिए नेपाल को शांति-सद्भाव के माहौल में विकास के रास्ते पर ले जायेंगे. यक़ीनन भारत इसमें काफी मददगार हो सकता है. बालेन इस जमीनी सच्चाई से अनजान नहीं हैं.

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