इजराइल-अमेरिका और ईरान जंग का आज तीसरा दिन है। अल-जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल ने मिलकर अब तक ईरान के 1,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं। इस दौरान शुरुआती 30 घंटे में 2,000 से ज्यादा बम गिराए गए। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि आने वाले दिनों में तेहरान पर हमले और तेज होंगे। वहीं, ईरान ने जवाब में इजराइल समेत 9 देशों में अमेरिकी बेस पर हमले किए हैं। 28 फरवरी को शुरू हुई इस लड़ाई के पहले दिन हुई बमबारी में ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे। वहीं, इस जंग में लेबनान का उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह भी शामिल हो गया है। उसने इजराइल में कई जगहों पर बमबारी की है। दूसरी तरफ इजराइल ने बॉर्डर से लगे लेबनान के 50 गांव खाली करा लिए हैं।
ईरान में 200 की मौत, 740 घायल
इजराइल और अमेरिका ने ईरान की राजधानी तेहरान समेत 10 बड़े शहरों को निशाना बनाया है। इनमें अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 740 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 180 छात्राओं की मौत हो गई और 45 घायल हैं।
इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें…




अमेरिका के इस मकसद के पीछे एक और मकसद छिपा था. वह यह कि ईरान कभी न्यूक्लियर पावर वाला देश न बने. भले ही घोषित तौर पर ईरान ने कभी नहीं कहा कि वह न्यूक्लियर हथियार बना रहा है. मगर यह भी हकीकत है कि ईरान पर्दे के पीछे न्यूक्लियर वाला खेल कर रहा था. अमेरिका को इसकी भनक थी. यही कारण है कि अमेरिका ईरान के पीछे हाथ धोकर पड़ गया था. क्योंकि खामेनेई की सरकार अमेरिका की बात मानने को तैयार नहीं थी. इसी के चलते अमेरिका ने ईरान में रिजीम चेंज की ठानी थी. ईरान भी अमेरिका के सामने नहीं झुका. ईरान भी अंजाम की परवाह किए बगैर अमेरिका को मुंहतोड़ जवाब देता रहा. आखिरकार अमेरिका ने पूरी प्लानिंग के साथ ईरान पर अटैक कर दिया.
अब सवाल है कि अमेरिका ने अपने कट्टर दुश्मन खामेनेई को तो मार दिया. फिर कौन सी हसरत अधूरी रह गई? दरअसल, खामेनेई के मारने से भी बड़ा मकसद है सत्ता परिवर्तन. अब तक ईरान टूटा नहीं है. ईरान लगातार अमेरिका को अपने तरीके से जवाब दे रहा है. वह मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है. ईरान ने खामेनेई की मौत का बदला लेने की कसम खा ली है. ईरान की सत्ता अब तक खामेनेई समर्थक ही है. डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि ईरान संग जंग महज चार दिनों तक चलेगी. मगर अब उनका कहना है कि चार हफ्ते लग जाएंगे. इसका मतलब है कि अमेरिका की सोच से आगे निकलकर ईरान पलटवार कर रहा है. ऐसे में अब भी ईरान से अमेरिका के लिए बुरी ही खबर है.
यहां एक बात और ध्यान देने वाली है. अमेरिका जिस तरह से ईरान के बारे में सोच रहा था, वैसा कुछ होता नहीं दिख रहा है. खामेनेई की मौत के बाद रिजीम चेंज को लेकर ईरान में प्रदर्शन अब तक नहीं दिखे हैं. ईरान में सड़कों पर लोग नहीं उतरे हैं. ईरान पर अटैक के बाद यहां तकि अमेरिका की ही निंदा हो रही है. कुछ लोगों ने भले ही खामेनेई की मौत का ईरान में जश्न मनाया है, मगर व्यापक तौर पर खामेनेई की सत्ता के खिलाफ प्रदर्शन नहीं हुआ है. ऐसे में रिजीम चेंज का ट्रंप का जो सपना है, उसे झटका लगता दिख रहा है. अमेरिका ने खामेनेई के जिंदा रहते ही सत्ता के खिलाफ आंदोलन को हवा दी थी. मगर अभी ऐसा कुछ नहीं दिख रहा है. इसलिए अभी ईरान और इजरायल-अमरेिक जंग में आगे क्या होगा, कुछ भी निश्चित नहीं लग रहा.







