रांची से दिल्ली आ रही एयर एंबुलेंस में सवार संजय को कहां पता था कि वह जिंदगी बचाने नहीं, मौत के मुंह में जा रहा है. जिंदगी से लड़ रहे संजय कहां पता था कि दिल्ली की यात्रा उनकी आखिरी यात्रा होगी. कर्ज लेकर संजय और उनकी पत्नी एयर एंबुलेंस में सवार हुए थे. इस उम्मीद में कि दिल्ली में बेहतर इलाज मिलेगा और उनकी जान बच जाएगी. मगर किस्मत उनसे रूठी थी. जैसे ही रांची से एयर एंबुलेंस दिल्ली के लिए उड़ी, उनकी जिंदगी की आखिरी डोर भी टूट गई. जी हां, उनके साथ 6 अन्य लोग भी काल के गाल में समा गए. ये सभी उसी एयर एंबुलेंस में सवार थे, जो रांची से दिल्ली जा रही थी और चतरा में क्रैश हो गई.
दरअसल, झारखंड की राजधानी रांची से दिल्ली जा रही एयर एम्बुलेंस चतरा जिले के करमाटांड के पास एक वन क्षेत्र में उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद 23 फरवरी की शाम को दुर्घटनाग्रस्त हो गई. एयर एंबुलेंस में कुल 7 लोग सवार थे. इसमें एक डॉक्टर, 1 पैरामेडिक, 2 अटेंडेंट, 1 पायलट और 1 को-पायलट थे. सभी लोग मारे गए. हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के लोग दौड़े. मौके पर पहुंचे ग्रामीण और परिजनों ने हादसे की पूरी कहानी बताई है. चश्मदीदों ने बताया कि जब यह प्लेन क्रैश हुआ तब कैसा मंजर था.
रांची प्लेन क्रैश में क्या हुआ
फ्लाइट ने सोमवार शाम 7:11 बजे रांची से उड़ान भरी, 7:34 पर एयरक्राफ्ट का कम्युनिकेशन टूट गया। थोड़ी देर बाद प्लेन झारखंड के चतरा जिले के समरिया के जंगलों में क्रैश हो गया। प्लेन में कैप्टन विवेक विकास भगत (पायलट), कैप्टन सबराजदीप सिंह ( को-पायलट), संजय कुमार (मरीज), अर्चना देवी (परिजन), धूरू कुमार (परिजन), विकास कुमार गुप्ता (डॉक्टर), सचिन कुमार मिश्रा (पैरामेडिकल स्टाफ) सवार थे।
चश्मदीद ने बताई हादसे की कहानी
एक स्थानीय चश्मदीद ने बताया, ‘मैं छत पर खड़ा था, तभी अचानक एक जोरदार धमाके जैसी आवाज आई. हमें लगा कि कोई विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया होगा. जब हम घटनास्थल पर पहुंचे तो हमने देखा कि विमान गिर चुका था और संभवतः उसमें सवार छह लोगों की मौत हो गई थी.’ एक अन्य युवक ने बताया कि उसका घर घटनास्थल से 3.5 किमी दूर है. उसने कहा, ‘हम लोगों को एक तेज धमाके की आवाज सुनाई दी. हम लोग इसके बारे में चर्चा ही कर रहे थे तभी पता चला कि विमान क्रैश हो गया है.’
सदर अस्पताल ने क्या कहा?
सदर अस्पताल के अधीक्षक पंकज कुमार ने बताया, ‘हमें एयर एम्बुलेंस दुर्घटना की सूचना मिली, इसलिए हम घटनास्थल पर गए. जब हम वहां पहुंचे तो एयर एम्बुलेंस में सवार सभी लोग मृत पाए गए.’ रांची के देव कमल अस्पताल के फ्रंट ऑफिस इंचार्ज श्याम कुमार ने बताया कि मरीज संजय कुमार को 16 फरवरी को लगभग 65 प्रतिशत जलने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था. परिवार ने बेहतर इलाज के लिए संजय को दिल्ली ले जाने का फैसला किया था. शाम को परिजन मरीज को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली लेकर निकले थे.
रांची से सात लोगों को दिल्ली ले जा रही एयर एंबुलेंस चतरा में दुर्घटनाग्रस्त, सभी की मौत.
मृतक संजय के बडे भाई का रोकर बुरा हाल
मृतक संजय साहू के बड़े भाई विजय कहते हैं, ‘मेरे भाई की हालत काफी बिगड़ गई थी, इसलिए हम उन्हें इलाज के लिए एयर एम्बुलेंस से दिल्ली ले जा रहे थे. विमान क्रैश की जानकारी हमें मीडिया से मिली.’ मृतक के मामा ने कहा, “मेरा भतीजा संजय आग से झुलस गया था और उसे रांची के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उसकी हालत में वहां सुधार नहीं हुआ, इसलिए हमने उसे इलाज के लिए दिल्ली ले जाने के लिए एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था की. एयर एम्बुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें संजय और उसकी पत्नी और एक परिजन के साथ 2 डॉक्टर और पायलट की मौत होने की जानकारी मिली है.’
मौके पर कौन-कौन पहुंचा?
जिला प्रशासन, पुलिस और राहत दल ने ग्रामीणों के सहयोग से सर्च ऑपरेशन शुरू किया तो मलबे से सात शव बरामद किए गए. घटना के बाद चतरा की उपायुक्त कीर्ति श्री, एसपी सुमित कुमार अग्रवाल, अपर समाहर्ता अरविंद कुमार और सिमरिया एसडीओ महेश्वरी यादव समेत कई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे. फॉरेंसिक टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया है. नागरिक उड्डयन विभाग ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है.
डीजीसीए ने क्या बयान दिया?
डीजीसीए ने एक बयान जारी कर कहा कि रेड बर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड का बीचक्राफ्ट सी90 विमान रांची-दिल्ली मार्ग पर एयर एम्बुलेंस के तौर पर उड़ान संचालित कर रहा था। यह विमान झारखंड के चतरा जिले की कसरिया पंचायत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. विमान में दो चालक दल के सदस्यों सहित सात लोग सवार थे. विमान ने भारतीय समयानुसार 7:11 बजे रांची से उड़ान भरी थी। कोलकाता से संपर्क स्थापित करने के बाद विमान ने खराब मौसम के कारण मार्ग परिवर्तन का अनुरोध किया। भारतीय समयानुसार 7:34 बजे विमान का कोलकाता से लगभग 100 समुद्री मील दक्षिण-पूर्व में संचार और रडार संपर्क टूट गया.