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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत-अमेरिका टैरिफ पर अब कितना होगा असर……………

UB India News by UB India News
February 22, 2026
in अन्तर्राष्ट्रीय, कारोबार
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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत-अमेरिका टैरिफ पर अब कितना होगा असर……………
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई देशों पर अपनी बड़ी ड्यूटी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका में इंपोर्ट होने वाली चीजों पर नई ग्लोबल लेवी लगाने का ऐलान किया है, जिसके बाद भारत पर अब 25 परसेंट से कम 10 परसेंट का रेसिप्रोकल टैरिफ लगेगा। ट्रंप के ऐलान के मुताबिक, 10 परसेंट का टेम्पररी इंपोर्ट सरचार्ज 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए है। व्हाइट हाउस ने 20 फरवरी को एक ऐलान जारी किया था। यह अमेरिका द्वारा लागू किया जाने वाला अतिरिक्त आयात शुल्क है। इसका उद्देश्य अमेरिकी निर्यातकों को समान प्रतिस्पर्धा का लाभ देना है। अगर कोई देश अमेरिकी वस्तुओं पर X% शुल्क लगाता है, तो अमेरिका उसी देश की वस्तुओं पर समान दर से शुल्क लगाएगा। यह MFN यानी सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र दरों के अतिरिक्त लागू होता है।

भारत पर रेसिप्रोकल टैरिफ का इतिहास

  • 2 अप्रैल, 2025: भारत पर 26% रेसिप्रोकल टैरिफ लागू।
  • जुलाई 2025: दर 25% निर्धारित।
  • अगस्त 2025: रूस से क्रूड ऑयल खरीदने पर अतिरिक्त 25% शुल्क, कुल रेसिप्रोकल टैरिफ 50%।
  • फरवरी 2026: अंतरिम व्यापार समझौते के तहत रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर 18% और अतिरिक्त पेनल्टी हटाई गई।
  • 24 फरवरी, 2026: अस्थायी 10% शुल्क लागू होगा, 150 दिनों तक प्रभावी।

उदाहरण: अगर कोई उत्पाद अमेरिका में 5% मोस्ट फेवर्ड नेशन ड्यूटी के तहत आता है, तो कुल प्रभावी शुल्क अब 15% होगा (पहले 5 + 25%)।

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अस्थायी शुल्क से छूट वाली वस्तुएं

कुछ जरूरी वस्तुएं अस्थायी आयात शुल्क से मुक्त रहेंगी:

  • महत्वपूर्ण खनिज और धातु
  • ऊर्जा और ऊर्जा उत्पाद
  • प्राकृतिक संसाधन और उर्वरक
  • कृषि उत्पाद जैसे बीफ, टमाटर, संतरा
  • फार्मास्यूटिकल्स और घटक
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वाहन और विमान पार्ट्स

क्षेत्रीय (सेक्टोरल) शुल्क

कुछ वस्तुओं पर क्षेत्रीय शुल्क लागू रहेगा:

स्टील, एल्यूमिनियम, तांबा – 50%
कुछ ऑटो पार्ट्स – 25%

अमेरिका क्यों लागू कर रहा है टैरिफ

अमेरिका का दावा है कि भारत उच्च आयात शुल्क लगाकर अमेरिकी वस्तुओं के निर्यात को रोकता है, जिससे अमेरिका को व्यापार घाटा उठाना पड़ता है।

भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार

2024-25 में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था।

  • कुल द्विपक्षीय व्यापार: USD 186 बिलियन
  • भारत का निर्यात: USD 86.5 बिलियन
  • आयात: USD 45.3 बिलियन
  • व्यापारिक अधिशेष: USD 41 बिलियन
  • सेवाओं में अधिशेष: USD 3.2 बिलियन
  • कुल व्यापारिक अधिशेष: USD 44.4 बिलियन

प्रमुख निर्यात: दवाएं (USD 8.1B), टेलीकॉम उपकरण (USD 6.5B), रत्न (USD 5.3B), पेट्रोलियम उत्पाद (USD 4.1B), वाहन और ऑटो पार्ट्स (USD 2.8B), सोना और आभूषण (USD 3.2B)
प्रमुख आयात: क्रूड ऑयल (USD 4.5B), पेट्रोलियम उत्पाद (USD 3.6B), कोयला/कोक (USD 3.4B), डायमंड (USD 2.6B), इलेक्ट्रिक मशीनरी (USD 1.4B), विमान और पार्ट्स (USD 1.3B), सोना (USD 1.3B)
सेवाओं में व्यापार: कंप्यूटर/आईटी सेवाएं (USD 16.7B), व्यवसाय प्रबंधन/कंसल्टिंग (USD 7.5B)

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता

भारतीय टीम 23 फरवरी, 2026 से अमेरिका में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के कानूनी दस्तावेजों को अंतिम रूप देने के लिए बैठक करेगी। पीयूष गोयल के अनुसार, समझौते पर अगले महीने हस्ताक्षर की संभावना है और इसे अप्रैल में लागू किया जा सकता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इंस्टीट्यूट के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि अमेरिकी RT घटने के बाद भारत को व्यापार समझौते की स्थिति का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए। अमेरिका ने सभी देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ को 10% कर दिया है। इसलिए भारत के लिए इस समझौते के लाभों का नया आकलन जरूरी है।

क्या है पूरा मामला और अदालत का फैसला
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को असंवैधानिक ठहराया. अदालत ने कहा कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का उपयोग इतने बड़े पैमाने पर व्यापार शुल्क लगाने के लिए नहीं किया जा सकता. यह कानून आपातकालीन आर्थिक शक्तियों के लिए बना था, न कि व्यापक टैरिफ लागू करने के लिए. इस फैसले से वैश्विक व्यापार जगत में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है.
सरकार करेगी गहन समीक्षा, फिर आएगा जवाब
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी कहा है कि भारत इस फैसले की विस्तृत समीक्षा करेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि वाणिज्य मंत्रालय या विदेश मंत्रालय कानूनी पहलुओं को समझने के बाद आधिकारिक प्रतिक्रिया देगा. फिलहाल सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है. यह संकेत है कि भारत अपने व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित रणनीति अपनाएगा.
ट्रंप का दावा, रिश्तों पर नहीं पड़ेगा असर
फैसले के बावजूद ट्रंप ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समीकरण में कोई बदलाव नहीं होगा. उनका दावा है कि टैरिफ संतुलन के लिए लगाए गए थे और अमेरिका को अब नुकसान नहीं होगा. उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने उनके अनुरोध पर रूस से तेल खरीद में कमी की. हालांकि भारत ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है. नई दिल्ली का हमेशा से कहना रहा है कि उसकी ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हित और बाजार परिस्थितियों पर आधारित है.
आने वाले हफ्तों में स्थिति साफ होगी
अदालत के फैसले ने भले ही IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ को निरस्त कर दिया हो, लेकिन इससे सभी व्यापारिक शुल्क अपने आप खत्म नहीं हुए हैं. संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिकी प्रशासन अन्य कानूनी प्रावधानों का सहारा लेकर टैरिफ नीति को जारी रख सकता है. ऐसे में भारत और अमेरिका दोनों फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में स्थिति और साफ होगी, तब तक सरकार और उद्योग जगत दोनों ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति पर आगे बढ़ेंगे.
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