पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में आज(बुधवार) बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति का निर्माण काम औपचारिक रूप से शुरू हो रहा है. यह वही प्रोजेक्ट है जिसकी नींव 6 दिसंबर 2025 को रखी गई थी, और अब दो महीने बाद निर्माण की शुरुआत की जा रही है. सोमवार को हुमायूं कबीर ने मस्जिद की डिजाइन सोशल मीडिया पर साझा की थी, जिससे एक बार फिर यह मुद्दा सुर्खियों में आ गया.
ग्राउंड पर तैयारियां तेज, भारी मशीनें तैनात
निर्माण शुरू होने से एक दिन पहले मंगलवार को बेलडांगा में तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली. ग्राउंड पर कई अर्थ-मूवर्स दिखाई दिए और कुरान पाठ के लिए अलग जगह बनायी गई. हजारों लोगों की मौजूदगी में इसके निर्माण की शुरुआत हो रही है. इस कार्यक्रम में 1200 मौलवी कुरान की तिलावत करेंगे. जिसके तुरंत बाद औपचारिक कंस्ट्रक्शन शुरू किया जाएगा.
हुमायूं कबीर के कदम से बढ़ी हलचल
हुमायूं कबीर, जो पहले तृणमूल कांग्रेस में थे और अब अपनी नई पार्टी ‘जनता उन्नयन पार्टी’ चला रहे हैं, इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं. इसी घोषणा की वजह से उन्हें तृणमूल कांग्रेस से निलंबित कर दिया गया था. पार्टी ने साफ कहा था कि यह उनका निजी कदम है, पार्टी की लाइन नहीं.वहीं मिडिया से बातचीत में कबीर ने कहा था कि “बुधवार सुबह कुरान पाठ के साथ निर्माण शुरू कर दिया जाएगा.”
बाबरी मस्जिद कभी नहीं बनेगी: योगी आदित्यनाथ
मामला उस समय और गर्म हुआ जब मंगलवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बाबरी मस्जिद जैसी संरचना कभी दोबारा नहीं बनाई जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि “क़यामत का दिन कभी नहीं आएगा, इसलिए बाबरी मस्जिद कभी नहीं बन सकेगी.”
कबीर ने इस बयान का जवाब देते हुए कहा कि “योगी जी जो कहें, लेकिन अगर उन्हें निर्माण रोकना है तो उन्हें मुर्शिदाबाद आना होगा.” कबीर ने यह भी कहा कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं किया, इसलिए इस प्रोजेक्ट का विरोध समझ से बाहर है.
इस बीच, उत्तर प्रदेश के एक दक्षिणपंथी ग्रुप ने लोगों से मुर्शिदाबाद की ओर मार्च निकालने की अपील की है, जिससे स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है. मामले को लेकर राज्य और देश दोनों में राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है.
गुरुवार से शुरू होगी तीन दिन की ‘बाबरी यात्रा’
हुमायूं कबीर गुरुवार से ‘बाबरी यात्रा’ शुरू करने जा रहे हैं. यह तीन दिन की पदयात्रा कर मुर्शिदाबाद के पलाशी से दिनाजपुर के इटाहर तक निकाली जाएगी. उनका कहना है कि यह यात्रा उन लोगों को संदेश देने के लिए है जो इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं.
ममता से मुस्लिम वोट कैसे छीनेंगे हुमायूं कबीर?
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गुणा-गणित और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. तृणमूल कांग्रेस से निकाले गए विधायक और जनत उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि वह अब टीएमसी की मुस्लिम वोटों की राजनीति नहीं चलने देंगे. कबीर का कहना है कि इस बार अल्पसंख्यक समुदाय ‘अपने विकास के लिए अल्पसंख्यकों को ही वोट देगा’ और इसी मकसद से उनकी पार्टी लेफ्ट, आईएसएफ और एआईएमआईएम जैसी ताकतों से बातचीत कर रही है.
हुमायूं कबीर ने दावा किया है कि यदि ये राजनीतिक दल एक मंच पर आते हैं तो वे आगामी बंगाल विधानसभा चुनाव में वे 100 से ज्यादा सीटें जीत सकते हैं. उनके इस बयान को तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब बंगाल की राजनीति में मुस्लिम वोट बेहद अहम भूमिका निभाता रहा है.
हुमायूं कबीर से क्यों मिले लेफ्ट के सलीम?
इस बीच हुमायूं कबीर और सीपीएम के पश्चिम बंगाल राज्य सचिव मोहम्मद सलीम के बीच हुई बैठक ने गठबंधन की अटकलों को और हवा दे दी है. सलीम ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कोई औपचारिक गठबंधन तय नहीं हुआ है और लेफ्ट फ्रंट ही उनकी प्राथमिक गठबंधन संरचना है. उन्होंने कहा कि भाजपा और तृणमूल की ‘विभाजनकारी राजनीति’ का विरोध करने वाली ताकतों से बातचीत जरूर हो रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि चुनाव साथ ही लड़ा जाएगा.
वहीं हुमायूं कबीर ने इस बैठक को सकारात्मक बताया और कहा कि उनका लक्ष्य तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों को सत्ता से बाहर करना है. उन्होंने यह भी संकेत दिए कि आईएसएफ और एआईएमआईएम से बातचीत की संभावनाएं खुली हुई हैं और फरवरी के मध्य तक तस्वीर साफ हो सकती है.
बाबरी मस्जिद निर्माण का क्या है प्लान?
इसी बीच मुर्शिदाबाद में आज से बाबरी मस्जिद का भी निर्माण शुरू होने वाला है. हुमायूं कबीर ने दावा किया कि 11 फरवरी को दोपहर 12 बजे बाबरी मस्जिद के निर्माण का काम औपचारिक रूप से शुरू किया जाएगा. उनके मुताबिक, सुबह 10 बजे से ही करीब 1000 से 1200 मौलाना, मुफ्ती और धर्मगुरु कुरान की तिलावत शुरू कर देंगे. उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में किसी भी वीआईपी को आमंत्रित नहीं किया गया है और केवल धार्मिक विद्वान ही इसमें शामिल होंगे.
कबीर का कहना है कि मस्जिद का निर्माण करीब दो साल में पूरा करने का लक्ष्य है और इस पर लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, हालांकि अब तक सिर्फ करीब 6 करोड़ रुपये का चंदा ही जुट पाया है, जिससे फंडिंग को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं.