भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार (4 फरवरी) को अमेरिका की हाई-प्रोफाइल यात्रा की शुरुआत की. दौरे के पहले ही दिन उन्होंने अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से लगातार दो अहम बैठकें कीं. इन बैठकों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, रक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और तकनीक जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा हुई.
जयशंकर का यह तीन दिन का दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के बाद भारत के साथ एक बड़े ट्रेड डील का ऐलान किया था. इस समझौते के तहत भारतीय सामानों पर लगने वाला रेसिप्रोकल टैरिफ 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है, जो तुरंत लागू हो गया है.
जयशंकर की स्कॉट बेसेंट से मुलाकात
विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने दौरे की शुरुआत अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट से मुलाकात के साथ की. अधिकारियों के मुताबिक, यह बातचीत भारत-अमेरिका के नए आर्थिक समझौते को जमीन पर उतारने के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है.
इन चर्चाओं को रविवार को घोषित बड़ी ट्रेड डील के बारीक पहलुओं को तय करने की दिशा में एक जरूरी कदम बताया गया. बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर उपयोगी चर्चा हुई. अधिकारियों का मानना है कि ट्रेजरी डिपार्टमेंट के साथ यह बातचीत राजनीतिक स्तर पर लिए गए फैसलों को ठोस नीतियों में बदलने में मदद करेगी, खासकर व्यापार को आसान बनाने, बाजार तक पहुंच और नियमों के तालमेल जैसे मुद्दों पर.
जयशंकर और रुबियो के बीच रणनीतिक साझेदारी पर बातचीत
दिन के दूसरे हिस्से में जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की. इस बैठक में दोनों देशों के बीच सहयोग के कई बड़े मुद्दों पर चर्चा हुई. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर बताया कि बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के कई अहम स्तंभों पर बात हुई. इनमें व्यापार, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, रक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और तकनीक शामिल हैं. उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों ने साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग संस्थागत बैठकों को जल्द करने पर सहमति जताई है.
वहीं, मार्को रुबियो ने अपनी पोस्ट में कहा कि बैठक में खास तौर पर क्रिटिकल मिनरल्स की खोज और नए आर्थिक अवसर खोलने पर फोकस किया गया. उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड एग्रीमेंट का भी स्वागत किया और इसे दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक अहम कदम बताया.
क्रिटिकल मिनरल्स पर अमेरिका की बड़ी पहल
अमेरिकी विदेश विभाग पहले ही संकेत दे चुका है कि रुबियो अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को मजबूत करना चाहते हैं. ये खनिज रक्षा, तकनीक निर्माण और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं.
अमेरिका बुधवार को वॉशिंगटन डीसी में पहली बार क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल की मेजबानी करेगा. इसमें 50 से ज्यादा देशों के अधिकारी हिस्सा लेंगे. इस बैठक का मकसद दुनिया भर में जरूरी खनिजों की सप्लाई को सुरक्षित और विविध बनाने पर सहयोग बढ़ाना है, ऐसा अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है.
अमेरिकी विदेश विभाग ने जारी किया बयान
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुए ट्रेड डील का स्वागत किया. बैठक के आखिर में दोनों नेताओं ने कहा कि वे क्वाड के ज़रिए भारत और अमेरिका के साथ-साथ दूसरे साझेदार देशों के साथ भी सहयोग को और आगे बढ़ाएंगे. उन्होंने यह भी माना कि एक मजबूत और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र दोनों देशों के साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है.
टॉमी पिगॉट ने अपने बयान में कही ये बात
वॉशिंगटन डीसी में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात को लेकर अमेरिकी विदेश विभाग के प्रमुख डिप्टी प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने बताया कि इस बैठक में दोनों नेताओं ने क्रिटिकल मिनरल्स की खोज, खनन और प्रोसेसिंग को लेकर भारत-अमेरिका के बीच सहयोग को औपचारिक रूप देने पर बात की.
दोनों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुए ट्रेड डील का स्वागत किया. बातचीत में इस बात पर जोर दिया गया कि दोनों लोकतांत्रिक देश मिलकर काम करें, ताकि नए आर्थिक मौके खुलें और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े साझा लक्ष्य आगे बढ़ सकें.
बैठक के अंत में जयशंकर और रुबियो ने क्वाड के जरिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. उन्होंने यह भी माना कि एक समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र दोनों देशों के साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है.







