बिहार के भागलपुर जिले के नवगछिया इलाके में बर्ड फ्लू को लेकर अलर्ट जारी किया गया है. इलाके में कुछ कौवे मृत पाए जाने के बाद प्रशासन सतर्क हो गया. शुरुआती जांच के लिए मृत कौवों के सैंपल लैब भेजे गए थे, जिनकी रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है. इसकी जानकारी जfला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. अंजली कुमारी सिन्हा ने दी है.
बर्ड फ्लू की पुष्टि होते ही प्रशासन और पशुपालन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है. प्रभावित इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है. स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग की टीमें इलाके में सक्रिय हैं ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके.
अलर्ट रहने की अपील
प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे किसी भी बीमार या मृत पक्षी के संपर्क में न आएं. अगर कहीं पक्षी मरे हुए दिखाई दें तो इसकी सूचना तुरंत प्रशासन या पशुपालन विभाग को दें. बिना सुरक्षा के मृत पक्षियों को छूने या हटाने से बचने की सलाह दी गई है. इसके साथ ही नवगछिया और आसपास के इलाकों में पोल्ट्री फार्मों की विशेष निगरानी शुरू कर दी गई है.
प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे किसी भी बीमार या मृत पक्षी के संपर्क में न आएं. अगर कहीं पक्षी मरे हुए दिखाई दें तो इसकी सूचना तुरंत प्रशासन या पशुपालन विभाग को दें. बिना सुरक्षा के मृत पक्षियों को छूने या हटाने से बचने की सलाह दी गई है. इसके साथ ही नवगछिया और आसपास के इलाकों में पोल्ट्री फार्मों की विशेष निगरानी शुरू कर दी गई है.
साफ-सफाई पर दें ध्यान
मुर्गी फार्म संचालकों को साफ-सफाई रखने और किसी भी तरह की बीमारी की जानकारी तुरंत देने के निर्देश दिए गए हैं. जरूरत पड़ने पर प्रभावित इलाके में कंटेनमेंट जोन बनाने की भी तैयारी की जा रही है, ताकि बीमारी को सीमित क्षेत्र में ही रोका जा सके. प्रशासन का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. लोगों से घबराने की जरूरत नहीं है, बस सावधानी बरतने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है.
मुर्गी फार्म संचालकों को साफ-सफाई रखने और किसी भी तरह की बीमारी की जानकारी तुरंत देने के निर्देश दिए गए हैं. जरूरत पड़ने पर प्रभावित इलाके में कंटेनमेंट जोन बनाने की भी तैयारी की जा रही है, ताकि बीमारी को सीमित क्षेत्र में ही रोका जा सके. प्रशासन का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. लोगों से घबराने की जरूरत नहीं है, बस सावधानी बरतने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है.
बर्ड फ्लू क्या है?
बर्ड फ्लू को एवियन इन्फ्लुएंजा भी कहा जाता है. ये एक वायरल बीमारी है जो मुख्य रूप से पक्षियों को होती है. ये इन्फ्लुएंजा A वायरस से फैलती है. कभी-कभी यह बीमारी इंसानों सहित कुछ जानवरों में भी फैल सकती है.
बर्ड फ्लू को एवियन इन्फ्लुएंजा भी कहा जाता है. ये एक वायरल बीमारी है जो मुख्य रूप से पक्षियों को होती है. ये इन्फ्लुएंजा A वायरस से फैलती है. कभी-कभी यह बीमारी इंसानों सहित कुछ जानवरों में भी फैल सकती है.
क्या है इसकी वजह?
बर्ड फ्लू इन्फ्लुएंजा A के H5N1 जैसे वायरस से होता है. यह वायरस जंगली जल पक्षियों और मुर्गी-पालन (पोल्ट्री) में ज्यादा पाया जाता है. यह संक्रमित पक्षियों या जानवरों की लार, बलगम, मल या सांस से निकले कणों के जरिए फैलता है. गंदे वातावरण या सीधे संपर्क से भी संक्रमण हो सकता है.
बर्ड फ्लू इन्फ्लुएंजा A के H5N1 जैसे वायरस से होता है. यह वायरस जंगली जल पक्षियों और मुर्गी-पालन (पोल्ट्री) में ज्यादा पाया जाता है. यह संक्रमित पक्षियों या जानवरों की लार, बलगम, मल या सांस से निकले कणों के जरिए फैलता है. गंदे वातावरण या सीधे संपर्क से भी संक्रमण हो सकता है.
इंसानों में कैसे फैलता है?
इंसानों को यह बीमारी आमतौर पर बीमार पक्षियों या जानवरों के संपर्क में आने से होती है. वायरस सांस के जरिए या संक्रमित तरल पदार्थ आंख, नाक या मुंह में जाने से शरीर में प्रवेश कर सकता है. संक्रमित मुर्गियों या पशुओं के पास ज्यादा समय बिताने से खतरा बढ़ता है. अच्छी तरह पका हुआ खाना इससे नहीं फैलता.
इंसानों को यह बीमारी आमतौर पर बीमार पक्षियों या जानवरों के संपर्क में आने से होती है. वायरस सांस के जरिए या संक्रमित तरल पदार्थ आंख, नाक या मुंह में जाने से शरीर में प्रवेश कर सकता है. संक्रमित मुर्गियों या पशुओं के पास ज्यादा समय बिताने से खतरा बढ़ता है. अच्छी तरह पका हुआ खाना इससे नहीं फैलता.
क्या हैं इसके लक्षण?
संक्रमण के 2 से 7 दिन बाद लक्षण दिखते हैं. इनमें बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, आंखों में जलन, बदन दर्द, सिरदर्द और थकान शामिल हैं. गंभीर मामलों में निमोनिया, सांस की गंभीर समस्या या दिमाग की सूजन भी हो सकती है.
संक्रमण के 2 से 7 दिन बाद लक्षण दिखते हैं. इनमें बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, आंखों में जलन, बदन दर्द, सिरदर्द और थकान शामिल हैं. गंभीर मामलों में निमोनिया, सांस की गंभीर समस्या या दिमाग की सूजन भी हो सकती है.
क्या-क्या रखें सावधानियां?
बीमार या मृत पक्षियों को बिना सुरक्षा छुएं नहीं. मुर्गी और मांस अच्छी तरह पकाकर खाएं, दूध उबालकर या पाश्चराइज करके पिएं. जोखिम वाले काम करने वालों को सुरक्षा उपकरण पहनने चाहिए. कुछ प्रकार के बर्ड फ्लू के लिए वैक्सीन मौजूद हैं, लेकिन इंसानों में उनका आम इस्तेमाल नहीं होता.
बीमार या मृत पक्षियों को बिना सुरक्षा छुएं नहीं. मुर्गी और मांस अच्छी तरह पकाकर खाएं, दूध उबालकर या पाश्चराइज करके पिएं. जोखिम वाले काम करने वालों को सुरक्षा उपकरण पहनने चाहिए. कुछ प्रकार के बर्ड फ्लू के लिए वैक्सीन मौजूद हैं, लेकिन इंसानों में उनका आम इस्तेमाल नहीं होता.






