प्रभावित क्षेत्र: कपड़ा, चमड़ा, खिलौने, गहने, ऑटो पार्ट्स, श्रम-प्रधान क्षेत्र।
आगे क्या संभावना: अमेरिका अपने कृषि और डेयरी उत्पादों के लिए भारतीय बाजारों को खोलने की मांग कर रहा है। ऐसे में भारत पर अपने इन क्षेत्रों को विदेशी उत्पादों से बचाने का बड़ा दबाव है। अगर भारत इन खतरों से निपटने के तरीके जल्द नहीं निकालता तो देश की आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
1. निर्यातकों के लिए वित्तीय शॉक एब्जॉर्बर
- अमेरिका ने भारत के जिन सेक्टर्स पर 50% तक के टैरिफ लगाए हैं, केंद्र सरकार उनके लिए कुछ तय कदम उठा सकता है।
- निर्यात प्रोत्साहन मिशन: 25,060 करोड़ रुपये के इस मिशन के तहत निर्यातकों को ऋण और ब्याज में छूट दी जाएगी।
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग को सुरक्षा: विशेषज्ञों की मानें तो केंद्र छोटे निर्यातकों के लिए सरकार ऋण पर 85% तक की गारंटी दे सकती है।
- डिजिटल बुनियादी ढांचा: ‘भारतट्रेडनेट’ (BharatTradeNet) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नौकरशाही बाधाओं को कम करना और रसद लागत घटाने पर जोर दिया जा सकता है।
2. रक्षा क्षेत्र और ट्रंप-प्रूफ सौदे
ऐसा नहीं है कि केंद्र सरकार ट्रंप के टैरिफ से बचने के लिए सिर्फ अपनी आर्थिक सुरक्षा को ही प्राथमिकता देने की कोशिश में है, बल्कि सरकार अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करने के लिए उसके साथ कुछ रक्षा समझौतों के लिए बजट तय कर सकती है। इनमें कुछ हथियारों की खरीद और तकनीक हस्तांतरण के लिए प्रावधान किए जाने की संभावना है। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा समझौते कुल मिलाकर दोनों देशों के समग्र व्यापार समझौते में शामिल हो सकते हैं।
जीई एफ414 इंजन और प्रीडेटर ड्रोन: बजट में लड़ाकू विमानों के इंजन और ड्रोन सौदों के लिए शुरुआती पूंजी का आवंटन। 31 एमक्यू-9बी प्रीडेटर ड्रोन्स के लिए हुए 32 हजार करोड़ रुपये के समझौते के लिए प्रस्ताव।
एमआरओ हब का निर्माण: भारत में अमेरिकी उपकरणों के रखरखाव (एमआरओ) के लिए हब बनाने के लिए रकम तय की जा सकती है, जिससे घरेलू स्तर पर उच्च तकनीक वाली नौकरियां पैदा होंगी।
एमएसएमई और रिसर्च: रक्षा इकोसिस्टम में सक्रिय 16,000 स्टार्ट्प्स और एमएसएमई को स्वायत्त प्रणालियों और एआई में नेतृत्व करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के रिसर्च एंड डेवलपमेंट फंड से मदद दिए जाने की संभावना। इससे 1.91 लाख स्टार्टअप्स और एमएसएमई नौकरियों को बचाने का लक्ष्य।
3. प्रमुख विशेषज्ञों का क्या कहना है?
डॉ. डी.के. श्रीवास्तव (अर्न्स्ट एंड यंग): भारत को अपने निर्यात गंतव्यों में विविधता लानी चाहिए और लागत प्रतिस्पर्धा बढ़ानी चाहिए।
ऋषि शाह (ग्रांट थॉर्न्टन भारत): बजट को व्यापार करने की लागत कम करने और विनियामक निश्चितता पर ध्यान देना चाहिए।
मदन सबनवीस (बैंक ऑफ बड़ौदा): कपड़ा, चमड़ा और रत्न जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को विशेष बफर या सहायता के लिए प्रावधान होना चाहिए।
युविका सिंघल (क्वांटइको): सीमा शुल्क ढांचे में बदलाव और ‘इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर’ को ठीक करना जरूरी है।
रनेन बनर्जी (पीडब्ल्यूसी इंडिया): एमएसएमई क्षेत्र के लिए क्रेडिट गारंटी योजना और सामान्य बुनियादी ढांचे में आवंटन बढ़ाना चाहिए।
4. रणनीतिक स्वायत्तता
बाजार विस्तार: भारत की रणनीति सिर्फ अमेरिका पर निर्भर न रहकर दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका जैसे नए बाजारों में भारतीय उत्पादों (जैसे ब्रह्मोस मिसाइल) के लिए एक्जिम बैंक के जरिए क्रेडिट लाइन बढ़ाने की भी रहेगी। इसके लिए बजट में प्रस्ताव पेश हो सकता है।







