एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार राज्य की डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने वाली हैं। सुनेत्रा साल 2024 से पहले राजनीति में सक्रिय रूप से नहीं थीं लेकिन वह पहली बार 2024 में ही चुनावी राजनीति में उतरीं। हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
विधायक दल की मीटिंग के लिए सुनेत्रा शनिवार सुबह मुंबई पहुंच गई हैं। फिलहाल वे अजित के आधिकारिक आवास देवगिरी में मौजूद हैं।62 साल की सुनेत्रा फिलहाल महाराष्ट्र विधानसभा के किसी भी सदन की सदस्य नहीं हैं।
शनिवार दोपहर 2 बजे NCP के विधायक दल और विधान परिषद सदस्यों की मीटिंग होगी। जहां उन्हें विधायक दल का नेता चुना जाएगा। इससे पहले सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल ने सुनेत्रा से मुलाकात की। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक सुनेत्रा का शपथग्रहण शाम 5 बजे होगा। सुनेत्रा वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं। शपथ से पहले उन्हें राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा देना होगा।
अजित पवार की 28 जनवरी को बारामती में प्लेन क्रैश में मौत के बाद डिप्टी CM पद खाली हो गया था। इसे भरने के लिए NCP और फडणवीस सरकार सारी कवायद कर रही है।
नॉलेज फैक्ट…
- सुनेत्रा को पहले राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा देना होगा। जो राज्यसभा के सभापति (उपराष्ट्रपति) को सौंपा जाएगा। सभापति के इस्तीफा स्वीकार करने के बाद ही वे डिप्टी CM पद की शपथ ले पाएंगी।
- यह इस्तीफा इसलिए जरूरी है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 190(1) के तहत कोई भी व्यक्ति एक साथ केंद्र की संसद (राज्यसभा) और राज्य सरकार में मंत्री नहीं रह सकता।
- इस्तीफा स्वीकार होने के बाद महाराष्ट्र के राज्यपाल उन्हें मंत्री और डिप्टी CM के रूप में शपथ दिलाएंगे।
- संविधान के अनुसार मंत्री बनने के 6 महीने के अंदर उन्हें विधानसभा चुनाव जीतना होगा या फिर विधान परिषद (MLC) का सदस्य बनना होगा।
- अगर 6 महीने के अंदर वे विधायक या MLC नहीं बन पाती तो उनका डिप्टी CM और मंत्री पद अपने-आप खत्म हो जाएगा।
अजित के निधन के बाद शरद पवार ने पहली बार सुनेत्रा के शपथग्रहण और NCP के दोनों गुटों के विलय पर बयान दिया है। शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शरद ने कहा- “डिप्टी सीएम पद के लिए सुनेत्रा पवार का नाम दिए जाने की मुझे कोई जानकारी नहीं है। उनकी पार्टी ने फैसला किया होगा। मैंने आज अखबार में देखा।प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे कुछ नाम हैं जिन्होंने कुछ फैसले लेने की पहल की है।”
शरद ने यह दावा भी किया कि दोनों गुटों को एकजुट करना उनके दिवंगत भतीजे अजित पवार की इच्छा थी, और वे इसके बारे में आशावादी थे।
शरद ने कहा- “अब हमें लगता है कि उनकी इच्छा पूरी होनी चाहिए। अजित पवार, शशिकांत शिंदे और जयंत पाटिल ने दोनों गुटों के विलय के बारे में बातचीत शुरू की थी। विलय की तारीख भी तय हो गई थी, यह 12 तारीख (फरवरी) को तय था। दुर्भाग्य से, अजित उससे पहले हमें छोड़कर चले गए।”
सुनेत्रा की मौजूदा राजनीतिक स्थिति…
2024 के लोकसभा चुनाव तक सुनेत्रा पवार ने राजनीति में लो प्रोफाइल रखा था। उस साल लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपने पति की पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर बारामती से चुनाव लड़ा, लेकिन अपनी ननद और मौजूदा NCP (SP) MP सुप्रिया सुले से हार गईं थीं। इसके बाद सुनेत्रा राज्यसभा के लिए सांसद चुनी गईं।

शुक्रवार को अमरावती से मुंबई तक दिन भरा चला मीटिंग का दौर
- सुबह 11 बजे: एनसीपी नेता डिप्टी सीएम और विभागों की मांग को लेकर मुंबई में शुक्रवार सुबह फडणवीस से मिलने उनके घर वर्षा बंगले पहुंचे। इनमें प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे शामिल थे। मीटिंग आधे घंटे तक चली।
- शाम 6 बजे: अजित की पत्नी सुनेत्रा पवार ने नरेश अरोड़ा को राजनीतिक सलाह के लिए बारामती बुलाया। नरेश, अजित पवार के चुनावी रणनीतिकार हैं। उनकी संस्था ‘डिजाइनबॉक्स’ एनसीपी के लिए काम करती है।
- रात 8 बजे: नरेश अरोड़ा मुंबई के लिए रवाना हुए, तब खबर आई कि सुनेत्रा डिप्टी सीएम बनने के लिए राजी हो गई हैं। हालांकि राज्य में बजट को देखते हुए उन्हें फिलहाल वित्त विभाग नहीं दिया जाएगा।
- रात 8:30 बजे: सीएम फडणवीस ने कहा, जो भी फैसला लेना है, NCP लेगी। चाहे पवार परिवार हो या पार्टी, हम उनके साथ मजबूती से खड़े हैं। NCP नेताओं ने मुझसे इस बारे में दो बार बात की है।
मराठा परिवार में हुआ पालन-पोषण
सुनेत्रा का जन्म 1963 में उस्मानाबाद (वर्तमान धराशिव) में हुआ था। उनका पालन-पोषण एक मराठा परिवार में हुआ, जिसकी स्थानीय राजनीति में गहरी जड़ें थीं। उनके पिता, बाजीराव पाटिल, एक प्रख्यात स्थानीय राजनीतिज्ञ थे, और उनके भाई, पद्मसिंह बाजीराव पाटिल, 1980 के दशक के दौरान जिले में काफी प्रभावशाली नेता थे। इस वजह से सुनेत्रा ने बचपन से ही राजनीतिक माहौल को देखा
उन्होंने 1983 में औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजीनगर) के एस बी आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज से वाणिज्य में स्नातक की उपाधि हासिल की है। इसके बाद दिसंबर 1985 में, उन्होंने अजित पवार से शादी की। ये एक अरेंज मैरिज थी, जिसे उनके भाई ने तय किया था।
सोशल वर्क से लगाव
सुनेत्रा पवार साल 2024 से पहले मुख्यधारा की राजनीति से दूर रहीं लेकिन उनका सोशल वर्क से काफी लगाव रहा। उन्होंने सबसे पहले बारामती और उसके आसपास के क्षेत्रों में सामाजिक कार्य किया। उनकी सबसे चर्चित पहलों में से एक पवार परिवार के पैतृक गांव काठवाड़ी में शुरू हुई, जहां उन्होंने खुले में शौच और स्वच्छता की कमी की समस्या का मुद्दा उठाया और अभियान चलाकर लोगों को प्रेरित किया। नतीजा ये निकला कि काठवाड़ी को 2006 में केंद्र सरकार द्वारा ‘निर्मल ग्राम’ का दर्जा दिया गया।
बाद में ये गांव सौर ऊर्जा से चलने वाली स्ट्रीटलाइट्स, बायोगैस संयंत्रों, व्यवस्थित अपशिष्ट प्रबंधन और जैविक खेती के साथ एक आदर्श पर्यावरण-अनुकूल गांव के रूप में विकसित हुआ। जिससे गांव को कई पुरस्कार मिले।
राजनीति में प्रवेश और राज्यसभा में भूमिका
कार्यकर्ता मानते हैं कि सुनेत्रा पर्दे के पीछे अजित पवार के अहम सलाहकारों में शामिल रहीं। 2023 में जब अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर नेशलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को हासिल किया, तब पवार फैमिली में हालात बदल गए।
2024 सुनेत्रा पवार ने पहली बार सक्रिय राजनीति में कदम रखा और बारामती लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। उनका मुकाबला ननद सुप्रिया सुले से था। इस चुनाव में सुनेत्रा पवार को 1.5 लाख से अधिक वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। जिसके बाद अजित पवार ने सुनेत्रा पवार को राजसभा की राह दिखाई।






