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आर्थिक समीक्षा में हमारी अर्थव्यवस्था की ताकत का पता चलता है…………………

UB India News by UB India News
January 31, 2026
in कारोबार, राष्ट्रीय
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आर्थिक समीक्षा में हमारी अर्थव्यवस्था की ताकत का पता चलता है…………………
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ऐसे दौर में, जब वैश्विक बाजार व्यापार युद्ध की आशंकाओं व भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रहे हैं और भारत वैश्विक अनिश्चितताओं, घरेलू अपेक्षाओं तथा क्षेत्रीय चुनौतियों के चौराहे पर खड़ा है, तब वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा में मौजूदा वित्त वर्ष में 7.4 फीसदी की मजबूत विकास दर और आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में वास्तविक आधार पर 6.8 से 7.2 फीसदी की अनुमानित वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित ताकत को रेखांकित करती है।

सर्वेक्षण के अनुसार, घरेलू खपत अर्थव्यवस्था को मुख्य गति प्रदान कर रही है। कृषि क्षेत्र के शानदार प्रदर्शन से ग्रामीण मांग में वृद्धि हुई है, जबकि कर सुधारों ने परिवारों की व्यय योग्य आय बढ़ाई, जिससे शहरी उपभोग में भी सुधार आया। महंगाई पर नियंत्रण भी उत्साहजनक है। अप्रैल से दिसंबर, 2025 के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 1.7 फीसदी तक गिर गई। सकारात्मक बात यह है कि आरबीआई और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, दोनों अनुमान लगा रहे हैं कि आने वाले वर्ष में मुद्रास्फीति धीरे-धीरे बढ़ेगी, पर यह आरबीआई के चार फीसदी के लक्ष्य के भीतर ही रहेगी। सर्वेक्षण स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि भू-राजनीति, टैरिफ व औद्योगिक नीतियां वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को नया आकार दे रही हैं।

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मुक्त व्यापार पर संदेह और महत्वपूर्ण खनिजों की होड़ जैसी वैश्विक प्रवृत्तियां भारत के निर्यात व रुपये पर दबाव डाल रही हैं। वित्त वर्ष 2025 में राजकोषीय घाटा बढ़कर जीडीपी का 3.2 फीसदी हो गया, जो उभरते दबावों को दर्शाता है। इसके बावजूद, अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान वस्तु निर्यात में 2.4 प्रतिशत तथा सेवा निर्यात में 6.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। यूरोपीय संघ के साथ एफटीए तथा ब्रिटेन, न्यूजीलैंड व ओमान जैसे देशों के साथ हाल के समझौते अमेरिका पर निर्भरता कम करने तथा नए बाजार तलाशने की दिशा में अहम हैं।

जब अधिकांश वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं मंदी के दौर से गुजर रही हैं, तब भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का 701 अरब डॉलर से अधिक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना-जो करीब 11 महीनों के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है-बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, व्यापार घाटा अब भी चुनौती बना हुआ है, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में मामूली सुधार हुआ है। कुल मिलाकर, आर्थिक सर्वेक्षण वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यह संदेश देता है कि भारत की आर्थिक मजबूती घरेलू मांग, नियंत्रित मुद्रास्फीति व रणनीतिक व्यापार समझौतों पर टिकी है, पर वैश्विक जोखिमों से निपटने के लिए निरंतर सतर्कता और सुधार आवश्यक हैं।

जीडीपी रफ्तार 7.4% की और महंगाई नरम, पांच सवालों में समझें देश की आर्थिक सेहत का हाल

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को वित्तीय वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण लोकसभा के पटल पर रखा। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन की अगुवाई में बनी इस सर्वे रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था की ताजा तस्वीर पेश की गई है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार भारत की विकास दर मजबूत हुई है, जबकि महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है।

आर्थिक समीक्षा में जाहिर किए गए अनुमानों को आसान सवाल-जवाब के जरिए समझिए।

सवाल:  आने वाले समय में देश की वृद्धि दर के बारे में क्या अनुमान है?
जवाब:
 भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार तेज होने का अनुमान है। मुख्य आर्थिक सलाहकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5% थी, जिसके वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 7.4% होने का अनुमान है। यह कोविड-पूर्व के 6.4% के औसत से काफी बेहतर स्थिति है। वित्त वर्ष 2026-27 में देश की जीडीपी 6.8% से 7.4% तक रह सकती है।

सवाल: देश में महंगाई का क्या हाल?

जवाब: आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार महंगाई के मोर्चे पर आंकड़े थोड़े सुकून देने वाले हैं। खुदरा महंगाई दर वित्त वर्ष 2023 में 6.7% थी, यह वित्त वर्ष 2026 (दिसंबर तक) में घटकर मात्र 1.7% रह गई है। इसी तरह, कोर इन्फ्लेशन (सोना-चांदी को छोड़कर) भी गिरकर 2.9% (दिसंबर तक) पर आ गई है।

सवाल: इकोनॉमी को रफ्तार कहां से मिल रही?
जवाब: 
अर्थव्यवस्था को घरेलू मांग और निवेश दोनों से सहारा मिल रहा है। निवेश गतिविधियों में इजाफा हुआ है। रियल ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (जीएफसीएफ) की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026 में 7.8% रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2025 में 7.1% थी। वहीं निजी खपत व्यय (पीएफसीई) भी मजबूत है, इसके वित्त वर्ष 2026 में 7.0% की दर से बढ़ने की उम्मीद है।

सवाल: सरकार की कमाई व करदाताओं की संख्या कितनी बढ़ी?
जवाब: 
अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने और बेहतर अनुपालन के कारण टैक्स कलेक्शन बढ़ा है। आयकरदाताओं की संख्या वित्त वर्ष 2022 के 6.9 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 9.2 करोड़ हो गई है। सकल कर राजस्व भी जीडीपी के 11.5% तक पहुंच गया है, जो महामारी से पहले 10.8% था।

सवाल: क्या सरकार अपना घाटा कम कर पाई है? 
जवाब: हां, राजकोषीय अनुशासन में लगातार सुधार हुआ है। राजकोषीय घाटा, जो वित्त वर्ष 2021 में 9.2% के उच्च स्तर पर था, वह वित्त वर्ष 2025 में घटकर 4.8% (संशोधित अनुमान) पर आ गया है। वित्त वर्ष 2026 के लिए इसे और कम करके 4.4% (बजट अनुमान) पर लाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्य आर्थिक सलाहकार के मुताबिक सरकार ने न केवल राजकोषीय घाटा कम करने में सफलता पाई है, बल्कि खर्च की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। प्रभावी पूंजीगत व्यय अब जीडीपी का 3.9% हो गया है, जो महामारी से पहले 2.7% था। यह बताता है कि सरकार का फोकस विकास को बढ़ावा देने वाले खर्चों पर है।

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