वेनेजुएला पर कार्रवाई करने के बाद डोनाल्ड ट्रंप मानो किसी को बख्शने के मूड में नहीं हैं. थोड़े दिन पहले तक पुतिन से बातचीत पर जोर दे रहे अमेरिका ने अब अटलांटिक सागर में ऐसा कांड किया है कि रूस चुप नहीं बैठने वाला. रूस और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. इसकी वजह बना है रूस का तेल टैंकर मरीनारा, जिसे अमेरिकी बलों ने जब्त कर लिया है. इस जहाज को पहले बेला-1 के नाम से जाना जाता था. मॉस्को ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध जताया है और अमेरिका को समुद्री डकैत तक कह डाला है.
रूस इसे खुले समुद्र में जबरदस्ती की कार्रवाई करार दे रहा है. रूसी सांसद अलेक्सी जुरावेलेव ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अब अमेरिका खुद को सभी कानूनों से ऊपर समझने लगा है. अगर वो इस तरह की कार्रवाई जारी रखता है तो इसका जवाब सैन्य स्तर पर भी दिया जा सकता है. उन्होंने ये तक कह डाला है कि अगर ऐसा ही चला तो अमेरिका के युद्धपोत डुबोकर उसे सबक सिखाया जाना चाहिए.
पुतिन के करीबी सांसद ने ट्रंप को हड़काया
रूसी सांसद अलेक्सी जुरावेलेव ने इस घटना पर बेहद आक्रामक बयान दिया है. उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अमेरिका के समुद्री बलों पर टॉरपीडो हमला या युद्धपोतों को डुबोना जैसे कदम उठाए जा सकते हैं. उनका कहना था कि वेनेजुएला में हालिया अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन के बाद ट्रंप का बेखौफ रवैया देखने को मिल रहा है और ऐसे व्यवहार को केवल सख्त कदमों से ही रोका जा सकता है. हालांकि रूस ने आधिकारिक तौर पर इस बयान का समर्थन नहीं किया है, लेकिन यह रूस की राजनीतिक जमात में फूट रहे गुस्से को दिखाता है.
टैंकर जब्त होने पर भड़का रूस
रूस का कहना है कि सीज किया गया टैंकर मैरिनारा को दिसंबर, 2025 में रूसी झंडे के तहत यात्रा की अनुमति दी गई थी और वह कानूनी रूप से रजिस्टर्ड था. मॉस्को का दावा है कि जहाज को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में रोका गया, जहां किसी दूसरे देश को बल प्रयोग का अधिकार नहीं है. रूसी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का हवाला देते हुए कहा है कि खुले समुद्र में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता है और अमेरिका ने इसी सिद्धांत का उल्लंघन किया है. रूस ने यह भी मांग की है कि जहाज पर मौजूद नागरिकों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाए और उन्हें सुरक्षित वापस लौटने दिया जाए.
कैसे जब्त हुआ टैंकर?
टैंकर मैरिनारा को अमेरिका ने उस पर लगाए गए प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप में जब्त किया था. रूसी अधिकारियों का कहना है कि जहाज को 24 दिसंबर, 2025 को रूसी फ्लैग के तहत यात्रा का अस्थायी परमिट मिला था और यह पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रहा था. अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने टैंकर को पहले से ही ट्रैक किया. अमेरिका का तर्क था कि टैंकर प्रतिबंधित तेल ले जाने वाले नेटवर्क का हिस्सा था, जबकि रूस का कहना था कि यह कानूनन रूसी झंडे के तहत था.