भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय तब जुड़ गया, जब उसने अपने बाहुबली कहे जाने वाले प्रक्षेपण यान एलवीएम-3 एम6 के जरिये अमेरिकी संचार उपग्रह ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित किया, जो भारत से लॉन्च किया गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह है। गौरतलब है कि इसरो द्वारा विकसित करीब 640 टन वजनी तीन चरणीय लॉन्च व्हीकल एलवीएम-3 अपने गौरवशाली इतिहास में इससे पहले चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और वनवेब मिशनों में भी सफलतापूर्वक अपनी छाप छोड़ने में सफल रहा था।
2023 के बाद यह दूसरा वर्ष है, जब इसरो ने एक ही वर्ष में दो एलवीएम-3 मिशनों का संचालन किया है, जो भारी उपग्रह प्रक्षेपण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती गति, क्षमता व विश्वास को रेखांकित करता है। दूसरी ओर, ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 इसरो की व्यावसायिक इकाई न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड और अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल के समझौते का हिस्सा है। इस उपग्रह का वजन लगभग 6,100 किलोग्राम है और इसमें एक 223 वर्ग मीटर फेज्ड ऐरे एंटीना लगा हुआ है, जिसकी मदद से बगैर मोबाइल टावरों के हिमालय, रेगिस्तान, महासागर या आपदाग्रस्त जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भी मोबाइल फोन पर 4जी और 5जी वॉयस कॉल, वीडियो, टेक्स्ट और डाटा का इस्तेमाल करना संभव हो सकेगा। इस कामयाबी का एक महत्वपूर्ण पहलू भारत-अमेरिकी अंतरिक्ष सहयोग भी है।
पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी, डाटा साझाकरण व संयुक्त शोध में तेजी आई है। ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 का प्रक्षेपण इस सहयोग को एक ठोस व्यावहारिक रूप देता है। इससे यह संदेश भी जाता है कि भारत केवल एक सहयोगी नहीं, बल्कि तकनीकी भागीदार बनने की क्षमता भी रखता है। ऐसे वक्त में, जब अंतरिक्ष को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है, यह विश्वास व पारदर्शिता दोनों देशों के बीच रणनीतिक रूप से लाभकारी है। यह मिशन भारत के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है। वैश्विक उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में प्रतिस्पर्धा तीव्र है, जहां स्पेसएक्स जैसी निजी कंपनियां आक्रामक रणनीतियों के साथ मौजूद हैं।
इसके बावजूद, इसरो की विश्वसनीयता, अपेक्षाकृत कम लागत और कामयाब ट्रैक रिकॉर्ड उसे विशिष्ट स्थान दिलाते हैं। ताजा कामयाबी से भारत के लिए भविष्य में अधिक वाणिज्यिक अनुबंध मिलने की संभावना बढ़ेगी। ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 का सफल प्रक्षेपण भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक मील का पत्थर है। अगर इस गति को दूरदर्शी नीतियों, निजी भागीदारी और वैश्विक सहयोग के साथ आगे बढ़ाया जाए, तो भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में महज एक उभरती हुई शक्ति नहीं, बल्कि निस्संदेह नेतृत्वकारी राष्ट्र के रूप में पहचाना जाएगा।
एलवीएम3-एम6 मिशन की शानदार सफलता ने भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के प्रति भरोसे को और मजबूत कर दिया है। इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा कि लगातार नौ सफल एलवीएम3 लॉन्च ने यह साबित कर दिया है कि भारत मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए पूरी तरह तैयार हो रहा है।
तो मोबाइल नेटवर्क के लिए नहीं लगेंगे टावर?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय तब जुड़ गया, जब उसने अपने बाहुबली कहे जाने वाले प्रक्षेपण यान एलवीएम-3 एम6 के जरिये अमेरिकी संचार उपग्रह ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित किया, जो भारत से लॉन्च किया गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह है। गौरतलब है कि इसरो द्वारा विकसित करीब 640 टन वजनी तीन चरणीय लॉन्च व्हीकल एलवीएम-3 अपने गौरवशाली इतिहास में इससे पहले चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और वनवेब मिशनों में भी सफलतापूर्वक अपनी छाप छोड़ने में सफल रहा था।
2023 के बाद यह दूसरा वर्ष है, जब इसरो ने एक ही वर्ष में दो एलवीएम-3 मिशनों का संचालन किया है, जो भारी उपग्रह प्रक्षेपण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती गति, क्षमता व विश्वास को रेखांकित करता है। दूसरी ओर, ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 इसरो की व्यावसायिक इकाई न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड और अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल के समझौते का हिस्सा है। इस उपग्रह का वजन लगभग 6,100 किलोग्राम है और इसमें एक 223 वर्ग मीटर फेज्ड ऐरे एंटीना लगा हुआ है, जिसकी मदद से बगैर मोबाइल टावरों के हिमालय, रेगिस्तान, महासागर या आपदाग्रस्त जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भी मोबाइल फोन पर 4जी और 5जी वॉयस कॉल, वीडियो, टेक्स्ट और डाटा का इस्तेमाल करना संभव हो सकेगा। इस कामयाबी का एक महत्वपूर्ण पहलू भारत-अमेरिकी अंतरिक्ष सहयोग भी है।
पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी, डाटा साझाकरण व संयुक्त शोध में तेजी आई है। ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 का प्रक्षेपण इस सहयोग को एक ठोस व्यावहारिक रूप देता है। इससे यह संदेश भी जाता है कि भारत केवल एक सहयोगी नहीं, बल्कि तकनीकी भागीदार बनने की क्षमता भी रखता है। ऐसे वक्त में, जब अंतरिक्ष को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है, यह विश्वास व पारदर्शिता दोनों देशों के बीच रणनीतिक रूप से लाभकारी है। यह मिशन भारत के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है। वैश्विक उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में प्रतिस्पर्धा तीव्र है, जहां स्पेसएक्स जैसी निजी कंपनियां आक्रामक रणनीतियों के साथ मौजूद हैं।
इसके बावजूद, इसरो की विश्वसनीयता, अपेक्षाकृत कम लागत और कामयाब ट्रैक रिकॉर्ड उसे विशिष्ट स्थान दिलाते हैं। ताजा कामयाबी से भारत के लिए भविष्य में अधिक वाणिज्यिक अनुबंध मिलने की संभावना बढ़ेगी। ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 का सफल प्रक्षेपण भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक मील का पत्थर है। अगर इस गति को दूरदर्शी नीतियों, निजी भागीदारी और वैश्विक सहयोग के साथ आगे बढ़ाया जाए, तो भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में महज एक उभरती हुई शक्ति नहीं, बल्कि निस्संदेह नेतृत्वकारी राष्ट्र के रूप में पहचाना जाएगा।
एलवीएम3-एम6 मिशन की शानदार सफलता ने भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के प्रति भरोसे को और मजबूत कर दिया है। इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा कि लगातार नौ सफल एलवीएम3 लॉन्च ने यह साबित कर दिया है कि भारत मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए पूरी तरह तैयार हो रहा है।






