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बांग्लादेश में बवाल और हिंसा जारी ,कट्टरपंथियों नें बीएनपी नेता के घर में आग लगाई

UB India News by UB India News
December 22, 2025
in अन्तर्राष्ट्रीय, अपराध
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कौन है जो बंगलादेश को पाकिस्तान जैसा इस्लामी कट्टर देश बनाना चाहता हैं  ?……….
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बांग्लादेश में शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद शुरू हुई हिंसा लगातार जारी है। राजधानी ढाका में बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। इस बीच उस्मान हादी को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के बाद भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़ दिए और प्रदर्शनकारी संसद भवन में घुस गए। बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा के बीच लक्षमीपुर सदर उपजिला में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के एक नेता के घर को कथित तौर पर बाहर से बंद करके आग लगा दी गई। आग की चपेट में आने से एक बच्ची की मौत हो गई और 3 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय मीडिया ने यह रिपोर्ट दी है। पुलिस के अनुसार आगजनी भाबनीगंज यूनियन में BNP के बिजनेसमैन और सहायक संगठन सचिव बेलाल हुसैन के घर पर हुई है।

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने हादी की हत्या और उसके बाद हुई हिंसा की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। एमनेस्टी ने हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की लिंचिंग पर भी गहरी चिंता जताई है। बीएनपी नेता सलाहुद्दीन अहमद ने चेतावनी दी है कि चुनाव विरोधी ताकतें इस हिंसा का फायदा उठाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पटरी से उतारने की कोशिश कर सकती हैं। हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता ने बांग्लादेश के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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दीपू दास की सरेआम हत्या के मामले में बांग्लादेश की लेखिका तसलीमा नसरीन ने पुलिस पर सवाल उठाए हैं। तसलीमा नसरीन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है  जिसमें दीपू दास पुलिस थाने के अंदर बैठा हुआ दिख रहा है। मौत से कुछ देर पहले दीपू दास उन लोगों से बात कर रहा है जो पुलिस की वर्दी में हैं। इस वीडियो में दीपू नीले रंग की फुल स्लीव स्वेटशर्ट और ट्राउजर पहने है और  वह अपनी बात समझाने की कोशिश कर रहा है। उसके आसपास पुलिस वाले खड़े हैं। तसलीमा नसरीन का कहना है कि जब दीपू दास पुलिस हिरासत में था तो फिर वो कट्टरपंथियों के पास कैसे पहुंच गया।

बांग्लादेश की सेना को बर्बाद करने में लगी ISI

बांग्लादेश एक बेहद खतरनाक और संवेदनशील दौर में प्रवेश कर चुका है. एक खुफिया आकलन रिपोर्ट के मुताबिक देश अब ‘कंट्रोल्ड ब्रेकडाउन’ की स्थिति की ओर बढ़ रहा है. इसका मतलब है कि सरकारी संस्थाओं को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है, ताकि एक ऐसा शून्य पैदा हो, जिसे राजनीतिक और वैचारिक ताकतें अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकें. रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि कानून व्यवस्था का चरमराना मौजूदा राजनीतिक बदलाव का कोई साइड इफेक्ट नहीं है, बल्कि यह एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है. बांग्लादेश की सेना को कई बार प्रो इंडिया भी माना जाता है. हाल ही में जब बांग्लादेश में प्रदर्शन हुए तब भी आर्मी चीफ वाकर उज जमान ने भारतीय आर्मी चीफ से बात की. अब उसी सेना को ISI कमजोर कर रही है.

भारत के खिलाफ साजिश का किसे मिल रहा फायदा?

इस हालात का फायदा भारत विरोधी ताकतें और कट्टरपंथी इस्लामिस्ट समूह उठा रहे हैं. ये ताकतें सड़क पर भीड़, मीडिया नैरेटिव और समुद्री सीमाओं पर मछुआरों तक को हथियार बनाकर देश का फोकस भारत के खिलाफ टकराव की ओर मोड़ने में कामयाब हो रही हैं.

बांग्लादेश सेना के अधिकारी क्यों हैं टेंशन में?

खुफिया रिपोर्ट का सबसे गंभीर हिस्सा बांग्लादेश सेना से जुड़ा है. रिपोर्ट के अनुसार सेना के मिड लेवल अधिकारियों में भारी असंतोष पनप रहा है. पुलिस तंत्र लगभग निष्क्रिय हो चुका है, इस कारण सेना को न चाहते हुए भी फर्स्ट रिस्पॉन्डर की भूमिका निभानी पड़ रही है. मिड लेवल अधिकारियों की शिकायत है कि उन्हें न तो स्पष्ट राजनीतिक समर्थन मिल रहा है और न ही कानूनी सुरक्षा. वे सड़कों पर हालात संभाल रहे हैं, लेकिन हर फैसले पर भविष्य में कार्रवाई का डर बना हुआ है. इस वजह से सेना के भीतर मनोबल तेजी से गिर रहा है.
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विस इंटेलीजेंस (ISI) बांग्लादेश की सैन्य संरचना में दरारें गहरी करने की कोशिश कर रही है. खुफिया इनपुट्स के मुताबिक ISI अलग-अलग स्तरों पर असंतोष को हवा देने और भ्रम की स्थिति पैदा करने में सक्रिय है. यह हस्तक्षेप सेना की एकजुटता और भरोसे को कमजोर कर रहा है, जिससे हालात और अस्थिर हो सकते हैं.
रिपोर्ट में ‘सेलेक्टिव एनफोर्समेंट’ यानी चुनिंदा कार्रवाई को भी एक बड़ी समस्या बताया गया है. दंगाइयों और उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई में भेदभाव से सुरक्षा बलों के भीतर यह धारणा मजबूत हो रही है कि हालात को जानबूझकर बिगड़ने दिया जा रहा है. हालांकि शीर्ष सैन्य नेतृत्व किसी भी तरह के सीधे हस्तक्षेप या सत्ता संभालने से बच रहा है, लेकिन यही रणनीतिक संयम अब संस्थागत साख के लिए खतरा बनता जा रहा है.

भारत के लिए क्या है खतरा?

भारत के नजरिए से सबसे बड़ी चिंता संभावित स्पिलओवर इफेक्ट है. रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश की आंतरिक सुरक्षा पूरी तरह डगमगाने की स्थिति में है. सीमाएं संवेदनशील हैं और हालात अगर और बिगड़े तो घुसपैठ, तस्करी और उग्रवाद का खतरा कई गुना बढ़ सकता है. खुफिया एजेंसियों का मानना है कि क्षेत्रीय अस्थिरता अब एक क्रिटिकल थ्रेशहोल्ड पर पहुंच चुकी है. अगर बांग्लादेश में मौजूदा ट्रेंड जारी रहा, तो इसका असर सिर्फ बांग्लादेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पूर्वी भारत और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ेगा. रिपोर्ट का निष्कर्ष साफ है. बांग्लादेश में हालात अपने आप नहीं बिगड़ रहे, बल्कि उन्हें एक तय दिशा में धकेला जा रहा है.

युवक को पीटकर मारा, बॉडी जलाई

एक पेड़ पर डेडबॉडी लटकी है। शरीर पर कोई कपड़ा नहीं है। आसपास शोर मचाती भीड़ है। कुछ लोग डेडबॉडी पर डंडे मार रहे हैं। ज्यादातर नौजवान हैं। कुछ लोग मोबाइल से वीडियो बना रहे हैं। तभी दो शख्स जलती घास उठाते हैं और पेट्रोल से भीगी डेडबॉडी में आग लगा देते हैं। माइक पर बांग्ला में अनाउंसमेंट होता है। भीड़ धार्मिक नारे लगाने लगती है।

ये घटना बांग्लादेश के मैमनसिंह शहर के भालुका एरिया की है। मरने वाला हिंदू युवक दीपु चंद्र दास है। 25 साल के दीपु पर ईशनिंदा का आरोप था। वे कपड़े की फैक्ट्री में काम करते थे। पुलिस के मुताबिक, 18 दिसंबर की रात भीड़ ने फैक्ट्री के बाहर उन्हें पीट-पीटकर मार डाला। इस घटना ने बांग्लादेश के हिंदुओं को डरा दिया है। वे घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं।

दीपु चंद्र की हत्या जिस वक्त हुई, उसी दौरान बांग्लादेश में हिंसा भड़की है। इंकिलाब मंच के लीडर 32 साल के शरीफ उस्मान बिन हादी की मौत के बाद से राजधानी ढाका समेत 4 शहरों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई हैं। हादी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और भारत विरोधी माने जाते थे। 12 दिसंबर को उन्हें चुनाव प्रचार के दौरान गोली मार दी गई थी।

‘भीड़ अखबारों के ऑफिस जलाती रही, पुलिस ने रोका नहीं’ शरीफ उस्मान बिन हादी की मौत के बाद शुरू हुए प्रदर्शन के बाद भीड़ ने बांग्लादेश के दो बड़े अखबारों द डेली स्टार और प्रोथोम आलो के ऑफिस में आग लगा दी। हालांकि, इंकिलाब मंच ने लोगों से हिंसा से बचने की अपील की थी।

फेसबुक पर किए पोस्ट में संगठन ने कहा, ‘कुछ गुट बांग्लादेश को नाकाम देश बनाना चाहते हैं। बांग्लादेश में फरवरी में चुनाव हैं। सोचिए कि देश में अशांति फैलाई जाती है, तो इसका फायदा किसे होगा।’

उधर, आरोप है कि हादी के समर्थक इलियास हुसैन ने फेसबुक पोस्ट के जरिए लोगों से राजबाग एरिया में इकट्ठा होने के लिए कहा था। बांग्ला अखबार प्रथोमो आलो और अंग्रेजी अखबार द डेली स्टार के दफ्तर इसी जगह हैं।

सोर्स बताते हैं कि भीड़ में शामिल लोग पेट्रोल लेकर आए थे। शुरुआत में करीब 25 लोग ही थे। पुलिस ने उन्हें नहीं रोका। इसके बाद भीड़ ने अखबार के ऑफिस में घुसकर आग लगा दी।

प्रथोमो आलो का ऑफिस इस चार मंजिला बिल्डिंग में था। आग से चारों फ्लोर जल गए। इसलिए अखबार और वेबसाइट दोनों का काम बंद हो गया।
प्रथोमो आलो का ऑफिस इस चार मंजिला बिल्डिंग में था। आग से चारों फ्लोर जल गए। इसलिए अखबार और वेबसाइट दोनों का काम बंद हो गया।

एग्जीक्यूटिव एडिटर बोले- 27 साल में पहली बार अखबार नहीं छपा प्रथोमो आलो के एग्जीक्यूटिव एडिटर सज्जाद शरीफ दैनिक भास्कर को बताते हैं, ‘हम शाम को अखबार छापने की तैयारी कर रहे थे। तभी उस्मान हादी की मौत की खबर आई। कुछ लोगों ने अखबार के दफ्तर के बाहर भीड़ इकट्ठी की और आगजनी शुरू कर दी।’

अखबार ने पब्लिकेशन रुकने के लिए अपनी वेबसाइट के जरिए पाठकों से माफी मांगी है। हमने सज्जाद शरीफ से पूछा कि प्रथोमो आलो को ही क्यों टारगेट किया गया? वे कहते हैं, ‘हमें भी इसका जवाब चाहिए। हमारा अखबार लोकतांत्रिक और सेक्युलर मूल्यों पर काम करता रहा है और आगे भी करेगा।’

अखबार में काम करने वाले पत्रकार बताते हैं, ‘बांग्लादेश में कट्टरपंथी माहौल बन रहे हैं। हमें बहुत पहले से डर था कि एक दिन ऐसा हो सकता है। युवा नेता इस्लाम के नाम पर लोगों को भड़का रहे थे। लोकतांत्रिक सोच के खिलाफ हिंसक माहौल के लिए बैकग्राउंड तैयार कर रहे थे।’

ऑफिस में नीचे आग, छत पर भागकर बचे पत्रकार अंग्रेजी न्यूज पेपर द डेली स्टार के ऑफिस में तोड़फोड़ के दौरान कुछ पत्रकार छत पर फंस गए थे। एक पत्रकार बताते हैं, ‘मेरे पास फोन आया कि प्रोथोम आलो के ऑफिस पर हमला हुआ है। गुस्साई भीड़ हमारे ऑफिस की ओर बढ़ रही है। इसके बाद स्टाफ बिल्डिंग खाली करने लगा। तब तक भीड़ ग्राउंड फ्लोर तक आ चुकी थी। वहां तोड़फोड़ के बाद बिल्डिंग में आग लगा दी। धुएं के बीच पत्रकारों ने नीचे जाने की कोशिश छोड़ दी और 10वीं मंजिल की छत पर भागकर जान बचाई।’

बाद में फायर सर्विस की टीमें आईं और देर रात 1.40 बजे निचले फ्लोर में लगी आग बुझाई। तब बिल्डिंग में 28 लोग मौजूद थे। चार फायरमैन छत पर चढ़े और फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।

हमले के बाद द डेली स्टार शुक्रवार को पब्लिश नहीं हुआ। ऐसा 35 साल में पहली बार हुआ है। डेली स्टार के ऑफिस की दो मंजिलें पूरी तरह जल गई हैं।
हमले के बाद द डेली स्टार शुक्रवार को पब्लिश नहीं हुआ। ऐसा 35 साल में पहली बार हुआ है। डेली स्टार के ऑफिस की दो मंजिलें पूरी तरह जल गई हैं।

उस्मान हादी अगस्त 2024 में शेख हसीना के विरोध में हुए छात्र आंदोलन के लीडर थे। वे अपनी तकरीरों में प्रोथोम आलो और द डेली स्टार अखबार की आलोचना करते थे। उन्हें हिंदुओं का पक्षधर बताते थे और इन अखबारों के सेक्युलर होने पर आलोचना करते थे।

उन्होंने अंतरिम सरकार में शामिल छात्रों और अंतरिम प्रधानमंत्री डॉ. यूनुस से अलग रास्ता चुना और इंकलाब मंच नाम से संगठन बनाया। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन करने वाले छात्रों की नेशनल सिटिजन पार्टी से इतर उस्मान हादी का रुख ज्यादा कट्टर था।

सड़कों पर भीड़, भारत के उच्चायोग पर हमले की कोशिश बांग्लादेश में हमारे सहयोगी अमानुर रहमान बताते हैं, ‘हादी की मौत के बाद लोग सड़कों पर आ गए और नारे लगाने लगे। उनके समर्थकों का मानना है कि हादी की हत्या के पीछे भारत है और बांग्लादेश की यूनुस सरकार भारत के खिलाफ एक्शन नहीं ले रही। इसी सोच के साथ हादी के समर्थक ढाका यूनिवर्सिटी वाले इलाके में इकट्ठा हुए। फेसबुक पोस्ट देखने के बाद भीड़ इकट्ठा हो गई और आगजनी शुरू कर दी।’

मीडिया हाउस के ऑफिसों में आग लगाने के अलावा भीड़ ने ढाका के धनमंडी में पूर्व राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान के पहले ही ढहाए जा चुके घर में भी तोड़फोड़ की। भीड़ घर के बचे हिस्से गिराने की कोशिश करती दिखी। प्रदर्शनकारियों ने चट्टोग्राम में सहायक भारतीय उच्चायुक्त के घर पर पत्थर फेंके। हालांकि कोई नुकसान नहीं हुआ। पुलिस ने भीड़ को खदेड़कर 12 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

ढाका में बांग्ला सांस्कृतिक संगठन ‘छायानट’ पर हमला भीड़ ने ढाका के धनमंडी इलाके में ‘छायानट’ के ऑफिस में आग लगा दी। छायानट बांग्लादेश के सबसे पुराने सांस्कृतिक संगठनों में से एक है। छायानट 1961 में रवींद्रनाथ टैगोर की जन्मशती समारोह के बाद बना था। बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के दौरान छायानट के कलाकारों ने आजादी के लिए लड़ रहे लोगों और शरणार्थियों का हौसला बढ़ाने के लिए कार्यक्रम किए थे। संगठन की महासचिव लैसा अहमद कहती हैं, ‘बहुत नुकसान हुआ है। आप खुद इसे देख सकते हैं।’

छायानट के ऑफिस में आगजनी से कई दुर्लभ किताबें और संगीत वाद्ययंत्र जल गए।
छायानट के ऑफिस में आगजनी से कई दुर्लभ किताबें और संगीत वाद्ययंत्र जल गए।

‘हिंदू युवक की इतनी बेरहमी से हत्या नॉर्मल बात नहीं’ मैमनसिंह शहर में हिंदू युवक दीपु चंद्र दास की हत्या पर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने कहा है कि नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। मैमनसिंह शहर राजधानी ढाका से करीब 80 किमी दूर है।

भाकुला पुलिस स्टेशन के ड्यूटी ऑफिसर रिपन मियां के मुताबिक, पैगंबर मोहम्मद का अपमान करने से भड़की भीड़ ने रात करीब 9 बजे दीपु की पिटाई की थी। पुलिस मौके पर पहुंचती, तब तक उसकी मौत हो गई। भीड़ भी जा चुकी थी। 19 सितंबर की रात तक न इस मामले में कोई गिरफ्तारी हुई, न केस दर्ज किया गया। पुलिस के मुताबिक, दीपु का परिवार आएगा, तब केस दर्ज करेंगे।

हालांकि, दीपु की हत्या पर पत्रकार अमानुर रहमान बताते हैं, ‘बांग्लादेश में हिंसा और हिंदू युवक की हत्या का मामला एक ही वक्त हुआ है, लेकिन अभी पता नहीं चला है कि हत्या की असल वजह क्या है। पुलिस ने कहा है कि उसने पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया था। इसलिए भीड़ ने उसे मार दिया। उसे जिस तरह मारा गया, ये सामान्य घटना नहीं है।’

वीडियो में दिख रहा है कि भीड़ ने दीपु चंद्र की डेडबॉडी में आग लगा दी। उनका परिवार अभी सामने नहीं आया है।
वीडियो में दिख रहा है कि भीड़ ने दीपु चंद्र की डेडबॉडी में आग लगा दी। उनका परिवार अभी सामने नहीं आया है।

हिंदू नेता बोले- घर से निकलने में डर लग रहा बांग्लादेश की कुल आबादी 16.5 करोड़ में करीब 1.31 करोड़ यानी 8% हिंदू हैं। अगस्त, 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं। सत्ता से हटने के बाद शेख हसीना बांग्लादेश से भारत आ गई थीं। अब हालत ऐसी है कि हिंदू समुदाय के लोग घरों के बाहर निकलने से डर रहे हैं।

बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल के महासचिव महिंद्र कुमार नाथ कहते हैं, ‘हिंदू युवक की हत्या बांग्लादेश में बन रहे माहौल को दिखाती है। दीपु के पास पुराना बटन वाला फोन था। वो कैसे ईश्वर के खिलाफ पोस्ट कर सकता है। पहले भी ईशनिंदा का बहाना बनाकर हत्याएं की गईं हैं।’

‘बांग्लादेश में कट्टरपंथी हावी हो रहे हैं। वे दूसरे समुदाय के लोगों को अपने आसपास नहीं देखना चाहते। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों को निशाना बनाना और उनकी हत्याएं आम बात हो गई है।’

महिंद्र कहते हैं, ‘बांग्लादेश का माहौल अब अल्पसंख्यकों के लिए मुश्किल हो गया है। आपके साथ, कब क्या बुरा हो जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता। हिंदू नेताओं के घरों पर हमले किए जा रहे हैं। उदारवादी मुस्लिमों पर भी हमले हो रहे हैं। मौजूदा वक्त हसीना सरकार के वक्त से भी ज्यादा खराब है।’

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by UB India News
January 25, 2026
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