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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिन के विदेश दौरे के दुसरे दिन जॉर्डन पहुंचे,डिजिटल गवर्नेंस को लेकर हुआ समझौता ……….

UB India News by UB India News
December 18, 2025
in अन्तर्राष्ट्रीय
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिन के विदेश दौरे के दुसरे दिन जॉर्डन पहुंचे,डिजिटल गवर्नेंस को लेकर हुआ समझौता ……….

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PM मोदी सोमवार को जॉर्डन पहुंचे। आज उनकी यात्रा का दूसरा दिन है। वे आज भारत-जॉर्डन बिजनेस फोरम की बैठक को संबोधित करेंगे। इस पहले सोमवार को जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला ने हुसैनिया पैलेस में पीएम मोदी का गले लगाकर स्वागत किया। दोनों के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हुई।

बैठक के दौरान मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत और जॉर्डन की सोच एक जैसी है। उन्होंने गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए किंग अब्दुल्ला का आभार जताया। साथ ही उन्होंने उर्वरक और डिजिटल तकनीक में सहयोग बढ़ाने की बात कही। दोनों देशों के बीच 5 अहम समझौते हुए। किंग अब्दुल्ला ने कहा कि PM मोदी की यात्रा भारत और जॉर्डन के बीच दशकों पुरानी दोस्ती, आपसी सम्मान और सार्थक सहयोग को दिखाती है।

भारत-जॉर्डन के बीच डिजिटल गवर्नेंस को लेकर समझौता

भारत और जॉर्डन के बीच पांच अहम समझौते हुए हैं। इनमें संस्कृति, रिन्युएबल एनर्जी, जल प्रबंधन, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण से जुड़े समझौते शामिल हैं।

दोनों देशों ने संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, रिन्युएबल और क्लीन एनर्जी परियोजनाओं पर साथ काम करने तथा जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए समझौते किए।

डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के तहत डिजिटल गवर्नेंस और तकनीक आधारित सार्वजनिक सेवाओं में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।

इसके अलावा जॉर्डन की विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहर पेट्रा और भारत की एलोरा गुफाओं के बीच ट्विनिंग समझौता हुआ। इससे विरासत संरक्षण, पर्यटन और आपसी सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिन के विदेश दौरे के पहले चरण में जॉर्डन पहुंचे. यहां पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया और खुद जॉर्डन के किंग के महल में उन्हें द्विपक्षीय वार्ता का न्यौता दिया गया.  किंग अब्दुल्ला द्वितीय के शाही महल के पास एक ऐसी जगह भी है, जो इस्लाम धर्म के लिए बहुत पवित्र मानी जाती है. यहां पैगंबर मोहम्मद की दाढ़ी का वो बाल रखा हुआ है, जिसे इस्लाम धर्म मानने वाले पाक मानते हैं. पीएम मोदी इसी इलाके में पहुंचे और प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता की.

भारत-जॉर्डन रिश्ते के 75 साल पूरे

भारत और जॉर्डन ने 1950 में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे, जिसके 2025 में 75 साल पूरे हो गए हैं। मोदी इसी मौके पर जॉर्डन गए हैं।

भारत, जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। दोनों देशों के बीच 2023-24 में 26,033 करोड़ रुपए का व्यापार हुआ। इसमें भारत का निर्यात करीब 13,266 करोड़ रुपए था। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर यानी 45,275 करोड़ करने का लक्ष्य रखा है।

भारत, जॉर्डन से बड़ी मात्रा में रॉक फॉस्फेट और फर्टिलाइजर का कच्चा माल खरीदता है। भारत के कुल रॉक फॉस्फेट आयात में जॉर्डन की हिस्सेदारी करीब 40% है।

दूसरी तरफ जॉर्डन भारत से मशीनरी, पेट्रोलियम, अनाज, रसायन, मीट, ऑटो पार्ट्स और उद्योगों से जुड़े उत्पादों का आयात करता है। भारतीय कंपनियों ने जॉर्डन के फॉस्फेट और टेक्सटाइल सेक्टर में 1.5 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है।

जॉर्डन किंग मोहम्मद साहब के सबसे करीबी वंशज

जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय को पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का सबसे करीबी वंशज माना जाता है। उनका संबंध सीधे हाशिमी वंश से है। मोहम्मद साहब कुरैश कबीले से थे।

कुरैश कबीले की एक शाखा बनू हाशिम थी। इसी बनू हाशिम से हाशिमी वंश शुरू हुआ, जिसे इस्लाम में सबसे प्रतिष्ठित वंश माना जाता है।

पैगंबर मोहम्मद साहब की बेटी हजरत फातिमा, उनके दामाद हजरत अली, उनके बेटे हसन और हुसैन आगे चलकर कई पीढ़ियों बाद मक्का के शरीफ बने। मक्का के शरीफ ही बाद में हाशिमी राजवंश के शासक बने।

जॉर्डन के शासक हाशिमी राजवंश से आते हैं। इस राजवंश ने करीब 700 साल तक मक्का पर शासन किया। पहले जॉर्डन के राजा शरीफ हुसैन बिन अली थे। मौजूदा राजा अब्दुल्ला द्वितीय, उन्हीं के पड़पोते हैं। इस तरह उनका वंश सीधे पैगंबर मोहम्मद साहब से जुड़ता है।

जॉर्डन एक संवैधानिक राजशाही है, जहां राजा बनने की प्रक्रिया संविधान में तय है। जॉर्डन का संविधान कहता है कि सत्ता का उत्तराधिकारी हाशिमी राजवंश से ही होगा और राजगद्दी पिता से बेटे को मिलेगी।

आपको बता दें कि जॉर्डन की राजधानी अम्मान में स्थित प्रोफेट मोहम्मद म्यूजियम इस्लामी इतिहास और आस्था से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है. यह किंग के महल से 28 मिनट की दूरी पर मौजूद है. यही वह म्यूजियम है, जहां पैगंबर मोहम्मद साहब की दाढ़ी का एक बाल सुरक्षित रखा गया है. यह पैगंबर मोहम्मद साहब के अवशेषों में से बहुत पाक माना जाता है. इसे पीढ़ियों से यहां सहेजकर रखा गया है.

क्यों इस्लाम धर्म में पवित्र मानते हैं ये जगह?

इस म्यूज़ियम की नींव जॉर्डन के शाही परिवार और खास तौर पर किंग अब्दुल्ला द्वितीय के संरक्षण में रखी गई. जॉर्डन लंबे समय से खुद को इस्लामी विरासत और पवित्र स्थलों का संरक्षक मानता रहा है. प्रोफेट मोहम्मद म्यूजियम, रॉयल आल अल-बैत इंस्टीट्यूट फॉर इस्लामिक थॉट के अंतर्गत आता है और इसे इस उद्देश्य से बनाया गया है कि इस्लाम के पैगंबर से जुड़ी विरासत, संदेश और ऐतिहासिक धरोहरों को दुनिया के सामने सम्मान के साथ प्रस्तुत किया जा सके. म्यूजियम को आधुनिक तकनीक और पारंपरिक इस्लामी वास्तुकला के मेल से तैयार किया गया है, ताकि यहां आने वाले लोग इतिहास को न सिर्फ पढ़ें, बल्कि उसे महसूस भी कर सकें. म्यूजियम में रखे गए पैगंबर मोहम्मद के पवित्र अवशेष को मुस्लिम समुदाय में पैगंबर से जुड़ी किसी भी निशानी को गहरी श्रद्धा और भावनात्मक जुड़ाव के साथ देखा जाता है. इसी वजह से यह म्यूजियम सिर्फ देखने की जगह नहीं बल्कि आस्था और इतिहास का संगम भी है.

पैगंबर मोहम्मद साहब की आत्मा से जुड़ी जगह

इस म्यूजियम में केवल अवशेष ही नहीं, बल्कि पैगंबर मोहम्मद साहब के जीवन, उनके संदेश, इस्लाम के मूल सिद्धांतों, शांति, इंसाफ और मानवता के सबक को भी दिखाया गया है. यहां ऐतिहासिक दस्तावेज, नक्शे और डिजिटल डिस्प्ले के जरिए इस्लाम के शुरुआती दौर की कहानी बताई जाती है. किंग अब्दुल्ला द्वितीय के शाही महल के पास स्थित होने के कारण यह म्यूजियम, जॉर्डन की धार्मिक और राजनीतिक विरासत दोनों का प्रतीक बन गया है. यही वजह है कि विदेशी मेहमानों और राष्ट्राध्यक्षों के दौरों के दौरान इस इलाके को खास महत्व दिया जाता है.

पीएम मोदी का यहां पहुंचना क्यों महत्वपूर्ण?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस क्षेत्र में पहुंचना भारत-जॉर्डन संबंधों के साथ-साथ सभ्यताओं के संवाद और आपसी सम्मान का भी संकेत माना जा रहा है. प्रोफेट मोहम्मद म्यूजियम आज न सिर्फ जॉर्डन बल्कि पूरी दुनिया के लिए इस्लाम के इतिहास को समझने का अहम केंद्र माना जाता है. चूंकि भारत में पर इस्लाम धर्म को मानने वाले लोगों की भी अच्छी खासी संख्या है, ऐसे में उनका ये दौरा धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के मुखिया के तौर पर बहुत मायने रखता है.
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