बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण के मतदान के पहले नरेन्द्र मोदी ने चुनाव को ‘जंगलराज’ बनाम ‘सुशासन’ का मुकाबला बना दिया है। 9 नवम्बर की शाम को दूसरे चरण का चुनाव प्रचार थम जाएगा। मैच आखिरी ओवरों में दाखिल हो चुका है। बड़ा स्कोर चाहिए तो रन रेट बढ़ाना जरूरी है। ऐसे में पिच हिटर की जिम्मेदारी खुद प्रधानमंत्री मोदी ने उठा ली है। ‘जंगलराज’ को हथियार बना कर वे राजद पर जोरदार हमला कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी, राजद के लिए जो शब्दावली इस्तेमाल कर रहे हैं उस पर गौर करना लाजिमी है- ‘कनपट्टी पर कट्टा’, ‘कट्टा-क्रूरता- कटुता-कुशासन-करप्शन।’ राजद के खिलाफ ‘जंगलराज’ एक सदाबहार मुद्दा है।
‘जंगलराज’ सदाबहार मुद्दा
एनडीए के लिए 28 साल पहले ‘जंगलराज’ का मुद्दा जितना कारगर था, आज भी उतना ही है। अक्टूबर 2005 में नीतीश कुमार ने राजद के जंगलराज को खत्म करने का वादा करके चुनाव जीता था। 2025 में नरेन्द्र मोदी कह रहे हैं- ‘जंगलराज’ से मुक्ति, एनडीए की गारंटी है। आज की पीढ़ी जिसने ‘जंगलराज’ को नहीं देखा है, उन्हें पुरानी कहानियां सुना-सुना कर भविष्य की चेतावनी दी जा रही है। सोशल मीडिया पर जंगलराज की कहानियों को रिक्रिएट कर तैयार किये गये विजुअल टीजर, लोगों को बीता हुआ कल भूलने नहीं दे रहे।
चाहे वो सीवान का तेजाब से नहलाने वाला कांड हो, या गया का इंजीनियर सत्येन्द्र दुबे हत्याकांड हो या फिर पटना का शिल्पी-गौतम हत्याकांड हो। इन घटनाओं के आधार पर एनडीए ने प्राचार वीडियो बनाये हैं, जो डिजिटल मीडिया में धड़ल्ले से चल रहे हैं।
कट्टा या कानून, क्या चाहिए?
भाजपा ने चुनाव प्रचार को एक ही बिन्दु पर केन्द्रित कर रखा है। कट्टा या कानून? अब ये जनता को तय करना है कि क्या चाहिए। नरेन्द्र मोदी ने औरंगाबाद की सभा में कहा, राजद समर्थक कह रहे हैं कि अगर भैया (तेजस्वी) की सरकार बनी तो कट्टा, दोनाली और फिरौती यही सब चलेगा।
‘जंगलराज’ के बारे में सुभाष यादव का बयान
एक समय था जब पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के भाई साधु यादव और सुभाष यादव पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगा था। विरोधी तथाकथित जंगल राज के लिए इन्हीं दोनों भाइयों को ही जिम्मेदार मानते थे। ऐसे आरोपों से नुकसान झेलने के बाद लालू -राबड़ी ने साधु-सुभाष से नाता तोड़ लिया था। साधु यादव और सुभाष यादव पूर्व सांसद हैं। अब सुभाष यादव राजनीति में बहुत कम सक्रिय हैं। फरवरी 2025 में सुभाष यादव ने जंगल राज के संबंध में एक सनसनीखेज बयान दिया था
सुभाष यादव ने तत्कालीन मुख्यमंत्री आवास पर लगाया था आरोप
इस साल फरवरी में सुभाष यादव ने मीडिया से बातचीत में उस समय के जंगल राज पर टिप्पणी की थी कि ‘अपहरण मामलों का प्रबंधन मुख्यमंत्री आवास से होता था। विपक्षी नेता अक्सर मुझ पर अपहरण मामलों में सौदेबाजी का आरोप लगाते थे। लेकिन मुख्यमंत्री आवास से ही संदिग्धों को फोन कर इन मामलों को सुलझाया जाता था। अगर मैं अपहरण के पीछे होता तो कब का मुझे जेल में डाल दिया गया होता।’
‘जंगलराज’ से जुड़े एक और मामले पर सुभाष यादव ने कहा था, ‘लालू यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य की शादी में स्वागत के लिए पटना के कार शोरुमों को जबरन नयी कार उपलब्ध कराने के लिए मजबूर किया गया था।’ सुभाष यादव के इस बयान के बाद राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया था।
मौजूदा मंत्री ने कहा था- मेरे बेटे को भी अगवा किया था
सुभाष यादव के बयान के बाद बिहार सरकार के श्रम मंत्री संतोष कुमार सिंह ने एक और बड़ा खुलासा किया था। उन्होंने कहा था, ‘लालू यादव के शासनकाल में मेरे बेटे का अपहरण हुआ था। मुझे अपने बेटे की सकुशल बरामदगी के लिए उस समय के राजद नेताओं से गुहार लगानी पड़ी थी। 2005 में एक चुनाव प्रचार के दौरान बिहार के पूर्व डीजीपी डीपी ओझा ने कहा था, ‘2003 में बिहार के तत्कालीन जेल मंत्री राघवेन्द्र प्रताप सिंह के एक रिश्तेदार के पुत्र का स्कूल जाते समय अपहरण हो गया था। मंत्री के रिश्तेदार को भी अपने बच्चे की रिहाई के लिए 30 लाख की फिरौती देनी पड़ी थी।’
जीत के लिए कई दांव जरूरी!
नीतीश सरकार और केन्द्र सरकार ने कई जनकल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत अभी तक 1 करोड़ 51 लाख महिलाओं को 10-10 हजार रुपये दिये जा चुके हैं। बिहार चुनाव के लिए इस योजना को गेम चेंजर माना जा रहा है। पहले चरण के मतदान में महिला वोटरों की भागीदारी पुरुषों से अधिक रही है। इस वोटिंग पैटर्न को नीतीश कुमार के हक में माना जा रहा है। तब फिर नरेन्द्र मोदी और अमित शाह जंगलराज के मुद्दे को यॉर्कर गेंद की तरह क्यों इस्तेमाल कर रहे हैं? वह इसलिए क्यों कि एनडीए कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। वह जीत के लिए तमाम दांव आजमा लेना चाहता है ताकि चूक की कोई गुंजाइश न रहे।
कट्टे वाली सरकार नहीं चाहिए
पीएम मोदी ने सीतामढ़ी में कहा कि आरजेडी और कांग्रेस को पहले चरण के मतदान में 65 वोल्ट का झटका लगा है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने विकास को चुना है। बिहार को कट्टा सरकार नहीं चाहिए। इसलिए एक बार फिर एनडीए को चुना है। पीएम ने कहा, “पहले चरण के मतदान में बिहार ने कमाल कर दिया है। पहले चरण में जंगलराज वालों को 65 वोल्ट का झटका लगा है। चारों तरफ ये चर्चा है कि बिहार के नौजवानों ने विकास को चुना है, NDA को चुना है। बिहार की बहनों-बेटियों ने भी NDA की रिकॉर्ड विजय पक्की कर दी है।”
‘क्या बिहार के बच्चों को रंगदार बनना चाहिए या डॉक्टर- इंजीनियर बनना चाहिए। बिहार में स्टार्टअप के सपने देखने वाले चाहिए, हैंड्सअप कहने वाले नहीं चाहिए। राजद वालों के प्रचार गाने सुनकर आप कांप जाएंगे। हम बच्चों के हाथों में लैप टॉप दे रहे हैं। राजद वाले कट्टा-दुनाली दे रहे हैं।’
कट्टा-क्रूरता इनकी पहचान है
पीएम मोदी ने कहा कि, ‘विकसित भारत के लिए बिहार का विकसित होना जरूरी है। RJD और कांग्रेस कभी भी बिहार को विकसित नहीं बना सकते हैं।”इन लोगों ने बिहार पर कई सालों तक राज किया। इन लोगों ने आपके साथ सिर्फ विश्वासघात किया है। जहां कट्टा, क्रूरता का राज हो, वहां कानून दम तोड़ देता है।’ ‘जहां कटुता बढ़ाने वाली RJD और कांग्रेस हो, वहां समाज में सद्भाव मुश्किल होता है। जहां RJD और कांग्रेस का कुशासन हो, वहां विकास का नामो-निशान नहीं होता है। जहां करप्शन हो, वहां सामाजिक न्याय नहीं मिलता, ऐसे लोग कभी भी बिहार का भला नहीं कर सकते।’
राहुल गांधी पर मोदी का तंज
PM ने बिना नाम लिए राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, साथियों बिहार आज मछली दूसरे राज्यों को भेज रहा है। बड़े-बड़े लोग भी बिहार की मछलियां देखने आ रहे हैं। तालाब में डुबकियां लगा रहे हैं। बिहार के चुनाव में डूबने कोशिश कर रहे हैं।
बता दें कि 2 नंवबर को बेगूसराय में जनसभा के बाद राहुल गांधी ने तालाब में डुबकी लगाई थी। मछलियां भी पकड़ी थीं।
पहले फेज में 65 वोल्ट का झटका लगा है
‘पहले चरण के मतदान में बिहार ने कमाल कर दिया है। जंगलराज वालों को 65 वोल्ट का झटका लगा है। चारों तरफ ये चर्चा है कि बिहार के नौजवानों ने, महिलाओं ने विकास को चुना है। एनडीए को चुना है। यहां का माहौल भी ये बता रहा है, नहीं चाहिए कट्टा सरकार-फिर एक बार NDA सरकार’
मां सीता से प्रार्थना की थी अयोध्या का फैसला रामलला के पक्ष में हो
‘मां सीता की भूमि पर आया हो, ये मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मुझे 6 साल पहले का वाकया याद आता है। 8 नवंबर 2019 को मैं यहां आया था। अगले दिन करतारपुर कॉरिडोर के लिए पंजाब के लिए निकलना था। उसी दिन राम मंदिर पर फैसला भी आना था। मैं मन ही मन में सीता माता से प्रार्थना कर रहा था कि फैसला राम मंदिर के पक्ष में आए। सीता मइया की धरती से मांगी प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती। ऐसा ही हुआ सुप्रीम कोर्ट ने रामलला के पक्ष में ही फैसला दिया।’
इशारों में राजीव गांधी का जिक्र
आजकल मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की बहुत चर्चा है। उनके खातों में हमने 10-10 हजार डाले। कल्पना कीजिए अगर महिलाओं के खाते ही नहीं खुलते तो क्या उन्हें ये पैसे मिल पाते। मोदी ने खाते खुलवाए, नीतीश जी ने पैसे डाले। अगर जंगलराज होता तो आपके हक का भी पैसा लूट लिया जाता।
कांग्रेस के नामदार के पिता जी जब प्रधानमंत्री थे, कहते थे दिल्ली से एक रुपए निकलता है तो गांव में जाते-जाते 15 पैसे हो जाते थे। ये कौन-सा पंजा था, जो एक रुपए के घिस-घिसकर 15 पैसे कर देता था। आज अगर पटना से 1 रुपए निकलता है तो पूरे 100 पैसे आपके खातों में पहुंचते हैं।
सीतामढ़ी में चुनावी सभा के दौरान पीएम मोदी ने कहा, “आज मां सीता की इस पुण्य भूमि पर आया हूं, आपका आशीर्वाद ले रहा हूं, तो इतने उत्साह से भरे लोगों के बीच वो दिन याद आना स्वाभाविक है। मां सीता के आशीर्वाद से ही बिहार विकसित बिहार बनेगा। ये चुनाव तय करेगा कि आने वाले सालों में बिहार के बच्चों का भविष्य क्या होगा, आपकी संतानों का भविष्य क्या होगा। इसलिए ये चुनाव बहुत अहम है।”
सीतामढ़ी के बाद PM बेतिया में सभा करेंगे
सीतामढ़ी में सभा के बाद प्रधानमंत्री पूर्वी चंपारण के बेतिया के लिए रवाना होंगे। यहां के चनपटिया प्रखंड के कुड़िया कोठी स्थित सभा स्थल पहुंचेंगे और NDA कैंडिडेट्स के समर्थन में वोट की अपील करेंगे। इस दौरान वे पश्चिम चंपारण की 9 और पूर्वी चंपारण की 11 विधानसभाओं को साधने का प्रयास करेंगे।
पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर, रामनगर, नरकटियागंज, बगहा, लौरिया, नौतन, चनपटिया, बेतिया और सिकटा विधानसभा के NDA प्रत्याशी मौजूद रहेंगे।







