नेपाल में तख्तापलट के 60 घंटे हो गए. सड़क से संसद तक नेपाल ने Gen-Z का आक्रोश देखा. इस आक्रोश में केपी शर्मा ओली की कुर्सी धधक गई. अब तक नेपाल को नया बॉस नहीं मिला है. नेपाल अब भी कमोबेश सुलग रहा है. आर्मी ने कमान संभाल ली है. मगर सत्ता का संकट अब भी बरकरार है. नेपाल में आर्मी चीफ और राष्ट्रपति अंतरिम सरकार गठन करने की कवायद में जुटे हैं. मगर नेपाल का अंतरिम प्रधानमंत्री कौन होगा, इस पर अब तक सहमति नहीं बन पाई है. केपी ओली के इस्तीफे के 60 घंटे बाद भी केवल कन्फ्यूजन ही है. नेपाल पीएम के रूप में कभी सुशीला कार्की का नाम आता है तो कभी कुलमन घिसिंग का. हालांकि, सुशीला कार्की अब भी पीएम की रेस में सबसे आगे चल रही हैं. गुरुवार की आधी रात को आर्मी चीफ, राष्ट्रपति और अन्य लोगों की एक खास मीटिंग हुई. उसमें भी सुशीला कार्की का नाम ही आगे था. एक तरह से सुशीला कार्की कन्फर्म मानी जा रही हैं, बावजूद इसके आम सहमति नहीं बन पाई है.
दरअसल, नेपाल की राजनीति में उथल-पुथल मचा हुआ है. नेपाल की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से चला आ रहा सस्पेंस कब खत्म होगा, यह कहना मुश्किल है. हालांकि, उम्मीद की जा रही है कि नेपाल पीएम पर आज आम सहमति बन जाएगी. Gen-Z के नेतृत्व वाले युवा प्रदर्शनकारियों ने पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री के लिए अपना समर्थन दिया है. मगर एक धड़ा अब भी इसे लेकर सहमत नहीं है. Gen-Z प्रदर्शनकारियों के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनाने की प्रक्रिया अटक गई है. देश में कर्फ्यू लगा हुआ है. आर्मी कानून-व्यवस्था संभाल रही है. इस बीच नेपाल के अंतरिम पीएम के चयन पर ही सस्पेंस छाया है. नेपाल के सामने तीन नाम हैं. सुशीला कार्की, कुलमन घिसिंग और काठमांडू मेयर बालेन शाह. फिर भी इन तीन नामों में से किसी पर भी फाइनल फैसला नहीं हो पाया है. अब सवाल है कि आखिर पीएम के ऐलान में पेंच कहां फंस रहा है?
तीन नाम… पर सस्पेंस बरकरार
नेपाल में अंतरिम पीएम के लिए ये तीन नाम जेन-जी की तरफ से ही आए हैं. नेपाल में नई सरकार के लिए Gen-Z ने सर्वे और मीटिंग की है. जेन जी की ऑनलाइन सर्वे और मीटिंग्स में नाम बदलते रहे हैं. सबसे पहले काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह यानी बालेन शाह का नाम सामने आया. वह युवाओं में बेहद लोकप्रिय हैं और ठीक छवि के हैं. मगर कहा गया कि खुद बालेन शाह ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया. सूत्रों का कहना है कि वह नेपाल के पीएम पद पर चुनाव जीत कर बैठना चाहते हैं. इसके बाद सुशीला कार्की का नाम सामने आया. नेपाल की पूर्व चीफ जस्टिस रहीं सुशीला कार्की का खुद बालेन शाह ने समर्थन किया है. पहले तो खुद सुशीला कार्की तैयार नहीं थीं, मगर आर्मी चीफ ने उन्हें 15 घंटे तक मनाया, तब जाकर वह मानीं. मगर बाद में खुद जेनजी का एक धड़ा उनकी उम्र को लेकर सहमत नहीं दिखा. कुछ प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वह Gen-Z का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकतीं, क्योंकि उनकी उम्र करीब 70 पार है.
कैसे बदल रहे खेल
इसके बाद खबर आई कि खुद सुशीला कार्की ने अंतरिम पीएम की रेस से अपना नाम वापस ले लिया है. तब जेन-जी ने कुलमन घिसिंग का नाम आगे बढ़ाया. अब सबको लगा कि कुलमन घिसिंग सबसे मजबूत दावेदार हैं. मगर रात होते-होते बाजी पलट गई. आर्मी चीफ और राष्ट्रपति के साथ बैठक में एक बार फिर सुशीला कार्की का नाम आगे निकल गया. मगर रात की बैठक में भी सुशीला कार्की के नाम पर आम सहमति नहीं बन पाई. माना जा रहा है कि आज यानी शुक्रवार को एक बार फिर आम सहमति बनाने के लिए एक अहम बैठक होगी. आज की बैठक में यह तय हो जाएगा कि सुशीला कार्की नेपाल की अंतरिम पीएम बनेंगी या कोई और नाम नेपाल की कमान संभालेगा. इसके अलावा, कुछ लोग नेपाल के राजा ज्ञानेन्द्र शाह के पोते हरेंद्र सिंह का नाम भी उछाल रहे हैं.
सूत्र क्या कह रहे?
अगर सूत्र की मानें तो सुशीला कार्की को नेपाल की कार्यवाहक सरकार का प्रमुख नियुक्त किए जाने की संभावना है. लह आंदोलनकारी समूह की मांगों को पूरा करते हुए देश में नए सिरे से चुनाव कराएंगी. सरकार विरोधी प्रदर्शनों का नेतृत्व करने वाले ‘जेन जेड’ समूह के प्रतिनिधियों, सेना प्रमुख और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल सहित विभिन्न हितधारकों के बीच वार्ता गुरुवार आधी रात को समाप्त हो गई , हालांकि वार्ता के कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आए. माना जा रहा है कि आर्मी चीफ और राष्ट्रपति सुशीला कार्की के नाम पर आम सहमति चाहते हैं. बस इसी वजह से ऐलान में देरी हो रही है. बता दें कि साल 1997 से लेकर 2012 तक के बीच जन्में युवाओं को अक्सर जेन जेड पीढ़ी के नाम से जाना जाता है.
किसने रखा कार्की का प्रस्ताव
कई सूत्रों के अनुसार युवाओं के नेतृत्व वाले जेन जेड समूह ने नए प्रधानमंत्री पद के लिए कार्की के नाम का प्रस्ताव रखा है. राष्ट्रपति पौडेल शुक्रवार सुबह कार्की को नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकते हैं. राष्ट्रपति के करीबी सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति वर्तमान राजनीतिक गतिरोध से बाहर निकलने का रास्ता खोजने के लिए विभिन्न राजनीतिक नेताओं के साथ-साथ संवैधानिक विशेषज्ञों के साथ परामर्श कर रहे हैं. नई सरकार बनाने के लिए दो विकल्पों पर विचार किया गया है. संसद भंग करना या उसे बरकरार रखना. हालांकि, आंदोलनकारी समूह संवैधानिक ढांचे के भीतर समाधान खोजने पर सहमत हो गया है.
किसने दी नेपाल के राष्ट्रपति और सेनाध्यक्ष को फोन करके गोली मारने की धमकी
GEN-Z आंदोलन का चेहरा माने जा रहे हामी नेपाल NGO के सुदन गुरुंग का एक वीडियो सामने आ रहा है, जिसमें वो सेना के अफसर को फोन करके धमकी दे रहे हैं कि अगर सुशीला कार्की के नाम पर सहमति नहीं बनती है तो वो राष्ट्रपति भवन का घेराव करेंगे…इतना ही नहीं इस वीडियो में सुदन गुरूंग चेतावनी देते हुए राष्ट्रपति के खिलाफ अपशब्द का प्रयोग कर रहे हैं…साथ ही उन्हें गोली मारने या खुद गोली खाने तक की बात करते भी दिख रहे हैं। ये वीडियो बृहस्पतिवार रात का बताया जा रहा है। इसमें यह भी कहा जा रहा है कि हमारी शर्तें नहीं मानीं तो सभी नेताओं को मार दिया जाएगा। हम सब वैसे भी मर रहे हैं और मरने को तैयार हैं।
सरकार पर सस्पेंस बरकरार
नेपाल में सरकार नहीं बन पा रही है। बृहस्पतिवार को पूरी रात आर्मी चीफ बैठककर मीटिंग करते रहे। आर्मी चीफ के दफ्तर शीतल निवास में रातभर बैठक हुई है। नेपाल में विरोध प्रदर्शन का आज पांचवां दिन है। एक तरफ यह भी दावा किया जा रहा है कि नेपाल में अब सुशीला कार्की के नाम पर सहमति बन गई है। यह सहमति बनाने को लेकर काठमांडू के शीतल निवास में रात भर मंथन चलता रहा। इस बीच हामी नेपाली संस्था के अध्यक्ष सुदन गुरूंग ने बृहस्पतिवार की रात को सेना के अधिकारी को फोन कर यह धमकी दी थी कि यदि जल्द ही सुशीला कार्की के नाम पर सहमति नहीं बनती है तो वो राष्ट्रपति भवन का घेराव करेंगे।
राष्ट्रपति को कहे अपशब्द
इतना ही नहीं सुदन गुरूंग ने चेतावनी देते हुए राष्ट्रपति के खिलाफ अपशब्द का प्रयोग करते हुए उन्हें गोली मारने या खुद गोली खाने तक की बात करते दिख रहे हैं। बीती रात को गुरूंग ने सेना के एक अधिकारी को फोन कर आर्मी चीफ को भी चेतावनी दी है और कहा कि अगर सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का प्रमुख नहीं बनाया गया तो इसका अंजाम ठीक नहीं होगा। हामी नेपाली वही संस्था है जिसने जेन जी प्रदर्शन का नेतृत्व करने का दावा कर रही है। जिसने डिस्कर्ड पर तथाकथित रूप से वोटिंग करवाया और सुशीला कार्की के नाम पर सबसे अधिक मत आने का दावा करते हुए उन्हें ही प्रधानमंत्री बनाने की बात कर रहे हैं।
सुदन गुरूंग के इस टेलीफोन संवाद से यह आशंका हो गई है कि आखिर वह कहां से और किसके कहने पर राष्ट्रपति और आर्मी चीफ को धमकी दे रहे हैं। किसके दम पर सभी नेताओं को मारने की धमकी दे रहे हैं? फिर से उत्पात मचाने की धमकी दे रहे हैं?
नेपाल में क्या हैं हालात?
इस बीच लोगों को राहत देने के लिए सुबह सात बजे से सुबह 11 बजे तक कर्फ्यू में चार घंटे की ढील दी गई है. इसके बाद शाम पांच बजे तक प्रतिबंधात्मक आदेश लागू रहेंगे. कर्फ्यू में दो घंटे की ढील दी जाएगी इसके बाद शाम सात बजे से अगली सुबह छह बजे तक कर्फ्यू लागू रहेगा.
नेपाल में क्या हुआ?
भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर सरकार के प्रतिबंध के खिलाफ सोमवार को ‘जेन-जेड’ द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में कम से कम 19 लोगों की मौत के बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के इस्तीफे की मांग को लेकर उनके कार्यालय में घुस गए थे. इसके तुरंत बाद मंगलवार को उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध सोमवार रात हटा लिया गया था. राष्ट्रपति पौडेल ने ओली का इस्तीफा स्वीकार कर लिया लेकिन कहा है कि उनके नेतृत्व वाला मंत्रिमंडल नयी मंत्रिपरिषद के गठन तक सरकार चलाता रहेगा. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, सोमवार और मंगलवार को हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है.
नेपाल में तख्तापलट के 60 घंटे हो गए. सड़क से संसद तक नेपाल ने Gen-Z का आक्रोश देखा. इस आक्रोश में केपी शर्मा ओली की कुर्सी धधक गई. अब तक नेपाल को नया बॉस नहीं मिला है. नेपाल अब भी कमोबेश सुलग रहा है. आर्मी ने कमान संभाल ली है. मगर सत्ता का संकट अब भी बरकरार है. नेपाल में आर्मी चीफ और राष्ट्रपति अंतरिम सरकार गठन करने की कवायद में जुटे हैं. मगर नेपाल का अंतरिम प्रधानमंत्री कौन होगा, इस पर अब तक सहमति नहीं बन पाई है. केपी ओली के इस्तीफे के 60 घंटे बाद भी केवल कन्फ्यूजन ही है. नेपाल पीएम के रूप में कभी सुशीला कार्की का नाम आता है तो कभी कुलमन घिसिंग का. हालांकि, सुशीला कार्की अब भी पीएम की रेस में सबसे आगे चल रही हैं. गुरुवार की आधी रात को आर्मी चीफ, राष्ट्रपति और अन्य लोगों की एक खास मीटिंग हुई. उसमें भी सुशीला कार्की का नाम ही आगे था. एक तरह से सुशीला कार्की कन्फर्म मानी जा रही हैं, बावजूद इसके आम सहमति नहीं बन पाई है.
दरअसल, नेपाल की राजनीति में उथल-पुथल मचा हुआ है. नेपाल की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से चला आ रहा सस्पेंस कब खत्म होगा, यह कहना मुश्किल है. हालांकि, उम्मीद की जा रही है कि नेपाल पीएम पर आज आम सहमति बन जाएगी. Gen-Z के नेतृत्व वाले युवा प्रदर्शनकारियों ने पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री के लिए अपना समर्थन दिया है. मगर एक धड़ा अब भी इसे लेकर सहमत नहीं है. Gen-Z प्रदर्शनकारियों के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनाने की प्रक्रिया अटक गई है. देश में कर्फ्यू लगा हुआ है. आर्मी कानून-व्यवस्था संभाल रही है. इस बीच नेपाल के अंतरिम पीएम के चयन पर ही सस्पेंस छाया है. नेपाल के सामने तीन नाम हैं. सुशीला कार्की, कुलमन घिसिंग और काठमांडू मेयर बालेन शाह. फिर भी इन तीन नामों में से किसी पर भी फाइनल फैसला नहीं हो पाया है. अब सवाल है कि आखिर पीएम के ऐलान में पेंच कहां फंस रहा है?
तीन नाम… पर सस्पेंस बरकरार
नेपाल में अंतरिम पीएम के लिए ये तीन नाम जेन-जी की तरफ से ही आए हैं. नेपाल में नई सरकार के लिए Gen-Z ने सर्वे और मीटिंग की है. जेन जी की ऑनलाइन सर्वे और मीटिंग्स में नाम बदलते रहे हैं. सबसे पहले काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह यानी बालेन शाह का नाम सामने आया. वह युवाओं में बेहद लोकप्रिय हैं और ठीक छवि के हैं. मगर कहा गया कि खुद बालेन शाह ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया. सूत्रों का कहना है कि वह नेपाल के पीएम पद पर चुनाव जीत कर बैठना चाहते हैं. इसके बाद सुशीला कार्की का नाम सामने आया. नेपाल की पूर्व चीफ जस्टिस रहीं सुशीला कार्की का खुद बालेन शाह ने समर्थन किया है. पहले तो खुद सुशीला कार्की तैयार नहीं थीं, मगर आर्मी चीफ ने उन्हें 15 घंटे तक मनाया, तब जाकर वह मानीं. मगर बाद में खुद जेनजी का एक धड़ा उनकी उम्र को लेकर सहमत नहीं दिखा. कुछ प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वह Gen-Z का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकतीं, क्योंकि उनकी उम्र करीब 70 पार है.
कैसे बदल रहे खेल
इसके बाद खबर आई कि खुद सुशीला कार्की ने अंतरिम पीएम की रेस से अपना नाम वापस ले लिया है. तब जेन-जी ने कुलमन घिसिंग का नाम आगे बढ़ाया. अब सबको लगा कि कुलमन घिसिंग सबसे मजबूत दावेदार हैं. मगर रात होते-होते बाजी पलट गई. आर्मी चीफ और राष्ट्रपति के साथ बैठक में एक बार फिर सुशीला कार्की का नाम आगे निकल गया. मगर रात की बैठक में भी सुशीला कार्की के नाम पर आम सहमति नहीं बन पाई. माना जा रहा है कि आज यानी शुक्रवार को एक बार फिर आम सहमति बनाने के लिए एक अहम बैठक होगी. आज की बैठक में यह तय हो जाएगा कि सुशीला कार्की नेपाल की अंतरिम पीएम बनेंगी या कोई और नाम नेपाल की कमान संभालेगा. इसके अलावा, कुछ लोग नेपाल के राजा ज्ञानेन्द्र शाह के पोते हरेंद्र सिंह का नाम भी उछाल रहे हैं.
सूत्र क्या कह रहे?
अगर सूत्र की मानें तो सुशीला कार्की को नेपाल की कार्यवाहक सरकार का प्रमुख नियुक्त किए जाने की संभावना है. लह आंदोलनकारी समूह की मांगों को पूरा करते हुए देश में नए सिरे से चुनाव कराएंगी. सरकार विरोधी प्रदर्शनों का नेतृत्व करने वाले ‘जेन जेड’ समूह के प्रतिनिधियों, सेना प्रमुख और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल सहित विभिन्न हितधारकों के बीच वार्ता गुरुवार आधी रात को समाप्त हो गई , हालांकि वार्ता के कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आए. माना जा रहा है कि आर्मी चीफ और राष्ट्रपति सुशीला कार्की के नाम पर आम सहमति चाहते हैं. बस इसी वजह से ऐलान में देरी हो रही है. बता दें कि साल 1997 से लेकर 2012 तक के बीच जन्में युवाओं को अक्सर जेन जेड पीढ़ी के नाम से जाना जाता है.
किसने रखा कार्की का प्रस्ताव
कई सूत्रों के अनुसार युवाओं के नेतृत्व वाले जेन जेड समूह ने नए प्रधानमंत्री पद के लिए कार्की के नाम का प्रस्ताव रखा है. राष्ट्रपति पौडेल शुक्रवार सुबह कार्की को नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकते हैं. राष्ट्रपति के करीबी सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति वर्तमान राजनीतिक गतिरोध से बाहर निकलने का रास्ता खोजने के लिए विभिन्न राजनीतिक नेताओं के साथ-साथ संवैधानिक विशेषज्ञों के साथ परामर्श कर रहे हैं. नई सरकार बनाने के लिए दो विकल्पों पर विचार किया गया है. संसद भंग करना या उसे बरकरार रखना. हालांकि, आंदोलनकारी समूह संवैधानिक ढांचे के भीतर समाधान खोजने पर सहमत हो गया है.
किसने दी नेपाल के राष्ट्रपति और सेनाध्यक्ष को फोन करके गोली मारने की धमकी
GEN-Z आंदोलन का चेहरा माने जा रहे हामी नेपाल NGO के सुदन गुरुंग का एक वीडियो सामने आ रहा है, जिसमें वो सेना के अफसर को फोन करके धमकी दे रहे हैं कि अगर सुशीला कार्की के नाम पर सहमति नहीं बनती है तो वो राष्ट्रपति भवन का घेराव करेंगे…इतना ही नहीं इस वीडियो में सुदन गुरूंग चेतावनी देते हुए राष्ट्रपति के खिलाफ अपशब्द का प्रयोग कर रहे हैं…साथ ही उन्हें गोली मारने या खुद गोली खाने तक की बात करते भी दिख रहे हैं। ये वीडियो बृहस्पतिवार रात का बताया जा रहा है। इसमें यह भी कहा जा रहा है कि हमारी शर्तें नहीं मानीं तो सभी नेताओं को मार दिया जाएगा। हम सब वैसे भी मर रहे हैं और मरने को तैयार हैं।
सरकार पर सस्पेंस बरकरार
नेपाल में सरकार नहीं बन पा रही है। बृहस्पतिवार को पूरी रात आर्मी चीफ बैठककर मीटिंग करते रहे। आर्मी चीफ के दफ्तर शीतल निवास में रातभर बैठक हुई है। नेपाल में विरोध प्रदर्शन का आज पांचवां दिन है। एक तरफ यह भी दावा किया जा रहा है कि नेपाल में अब सुशीला कार्की के नाम पर सहमति बन गई है। यह सहमति बनाने को लेकर काठमांडू के शीतल निवास में रात भर मंथन चलता रहा। इस बीच हामी नेपाली संस्था के अध्यक्ष सुदन गुरूंग ने बृहस्पतिवार की रात को सेना के अधिकारी को फोन कर यह धमकी दी थी कि यदि जल्द ही सुशीला कार्की के नाम पर सहमति नहीं बनती है तो वो राष्ट्रपति भवन का घेराव करेंगे।
राष्ट्रपति को कहे अपशब्द
इतना ही नहीं सुदन गुरूंग ने चेतावनी देते हुए राष्ट्रपति के खिलाफ अपशब्द का प्रयोग करते हुए उन्हें गोली मारने या खुद गोली खाने तक की बात करते दिख रहे हैं। बीती रात को गुरूंग ने सेना के एक अधिकारी को फोन कर आर्मी चीफ को भी चेतावनी दी है और कहा कि अगर सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का प्रमुख नहीं बनाया गया तो इसका अंजाम ठीक नहीं होगा। हामी नेपाली वही संस्था है जिसने जेन जी प्रदर्शन का नेतृत्व करने का दावा कर रही है। जिसने डिस्कर्ड पर तथाकथित रूप से वोटिंग करवाया और सुशीला कार्की के नाम पर सबसे अधिक मत आने का दावा करते हुए उन्हें ही प्रधानमंत्री बनाने की बात कर रहे हैं।
सुदन गुरूंग के इस टेलीफोन संवाद से यह आशंका हो गई है कि आखिर वह कहां से और किसके कहने पर राष्ट्रपति और आर्मी चीफ को धमकी दे रहे हैं। किसके दम पर सभी नेताओं को मारने की धमकी दे रहे हैं? फिर से उत्पात मचाने की धमकी दे रहे हैं?
नेपाल में क्या हैं हालात?
इस बीच लोगों को राहत देने के लिए सुबह सात बजे से सुबह 11 बजे तक कर्फ्यू में चार घंटे की ढील दी गई है. इसके बाद शाम पांच बजे तक प्रतिबंधात्मक आदेश लागू रहेंगे. कर्फ्यू में दो घंटे की ढील दी जाएगी इसके बाद शाम सात बजे से अगली सुबह छह बजे तक कर्फ्यू लागू रहेगा.
नेपाल में क्या हुआ?
भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर सरकार के प्रतिबंध के खिलाफ सोमवार को ‘जेन-जेड’ द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में कम से कम 19 लोगों की मौत के बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के इस्तीफे की मांग को लेकर उनके कार्यालय में घुस गए थे. इसके तुरंत बाद मंगलवार को उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध सोमवार रात हटा लिया गया था. राष्ट्रपति पौडेल ने ओली का इस्तीफा स्वीकार कर लिया लेकिन कहा है कि उनके नेतृत्व वाला मंत्रिमंडल नयी मंत्रिपरिषद के गठन तक सरकार चलाता रहेगा. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, सोमवार और मंगलवार को हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है.