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भारत पर ट्रम्प का 50% टैरिफ आज से लागू, अमेरिकी अर्थशास्त्री ने फिर दिखाया ट्रंप को आईना …………….

UB India News by UB India News
August 28, 2025
in कारोबार, राजनीति
0
अमेरिकी टैरिफ से निपटने के लिए भारत का बड़ा प्लान, 20,000 करोड़ के इस मिशन की तैयारी शुरू
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अमेरिका ने 27 अगस्त से भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ (25 प्रतिशत टैरिफ+25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ) लागू कर दिया है। लेकिन इसमें अमेरिका ने अपने स्वार्थ का भी खास ख्याल रखते हुए भारतीय दवाइयों, स्मार्टफोन और पेट्रो केमिकल्स पर टैरिफ को लागू नहीं किया है। अमेरिका ने इन चीजों पर टैरिफ को पहले के स्तर पर ही बनाए रखा है। इसी तरह, उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका को भारत के कुल निर्यात में रसायनों का हिस्सा लगभग 18 प्रतिशत है, जिसका वित्त वर्ष 2024 का निर्यात मूल्य लगभग 5.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने बीते दिनों एक अनुमान में कहा टैरिफ वृद्धि से वित्त वर्ष 2026 में रासायनिक निर्यात में 2-7 अरब अमेरिकी डॉलर की कमी आ सकती है।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह नया टैरिफ भारत के लगभग ₹5.4 लाख करोड़ के एक्सपोर्ट को प्रभावित कर सकता है। 50% टैरिफ से अमेरिका में बिकने वाले कपड़े, जेम्स-ज्वैलरी, फर्नीचर, सी फूड जैसे भारतीय प्रोडक्ट्स महंगे हो जाएंगे। इससे इनकी मांग में 70% की कमी आ सकती है। चीन, वियतनाम और मेक्सिको जैसे कम टैरिफ वाले देश इन सामानों को सस्ते दाम पर बेचेंगे। इससे भारतीय कंपनियों की अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी कम होगी।

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भारतीय जेनरिक दवाओं पर काफी हद तक निर्भर है अमेरिका

दरअसल अमेरिकी मार्केट में भारतीय जेनरिक दवाइयों की निर्भरता काफी है। अमेरिका में, जहां दस में से नौ प्रिसक्रिप्शन जेनेरिक दवाओं के होते हैं, भारत उन जेनेरिक दवाओं का लगभग 40% उपलब्ध कराता है। ऐसे में अमेरिका में परेशानी न खड़ी हो जाए, ट्रंप ने दवा को टैरिफ से बाहर रखा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दवाइयों के मामले में भारत और अमेरिका एक-दूसरे पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं। अमेरिकी बाजार तक भारत की पहुंच उसके जेनेरिक दवा उद्योग को मुनाफे में रहने में मदद करती है, जबकि अमेरिका अपनी मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त जेनेरिक दवाएं नहीं बना पाता।

किन सेक्टर पर टैरिफ का असर नहीं 

निर्यात पहले टैरिफ अब कुल टैरिफ
दवाइयां 9.5 बिलियन डॉलर 0 0
स्मार्टफोन 10.6 बिलियन डॉलर 0 0
पेट्रो केमिकल  4.1 बिलियन डॉलर  6.9% 6.9%

 

किन सेक्टर पर होगा असर?

निर्यात पहले टैरिफ अब कुल टैरिफ
गारमेंट 3.4 बिलियन डॉलर 12%  62%
होम टेक्सटाइल 3.0 बिलियन डॉलर  9% 59%
झींगा मछली 2 बिलियन डॉलर 0 60 %
ज्वेलरी 3.6 बिलियन डॉलर 5.8% 55.8%
डायमंड 4.9 बिलियन डॉलर 0 50%
मशीनरी पार्ट्स 6.7 बिलियन डॉलर 1.3% 51.3%
ऑटो पार्ट्स 6.4 बिलियन डॉलर 1% 26-51%

मोबाइल एक्सपोर्ट का भी है बड़ा आंकड़ा

भारत से अमेरिका को बड़ी मात्रा में मेड इन इंडिया स्मार्टफोन एक्सपोर्ट किए जाते हैं। India Briefing के मुताबिक, जुलाई में आई एक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत 2025 की दूसरी तिमाही में अमेरिकी बाजार में शीर्ष स्मार्टफोन आपूर्तिकर्ता के रूप में चीन से आगे निकल गया है, इसकी निर्यात हिस्सेदारी साल-दर-साल 13 प्रतिशत से बढ़कर 44 प्रतिशत हो गई है।

1. मशीनरी और कलपुर्जे: ऑटोमोटिव पार्ट्स पर सबसे ज्यादा असर

पहले की स्थिति :

भारत ने 2024 में 19.16 बिलियन डॉलर (करीब 1.68 लाख करोड़ रुपए) के इंजीनियरिंग गुड्स निर्यात किए। इसमें स्टील प्रोडक्ट्स, मशीनरी, ऑटोमोटिव पार्ट्स, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, और अन्य औद्योगिक उपकरण शामिल हैं। अमेरिका कारों, छोटे ट्रकों और उनके पार्ट्स पर 25% शुल्क लगा रहा था, जबकि कॉमर्शियल वाहनों के पुर्जों पर यह शुल्क 10% था।

टैरिफ के बाद:

अमेरिका भारतीय ऑटो पार्ट्स के लिए सबसे बड़ा बाजार है। FY25 में ऑटो पार्ट्स के कुल निर्यात का लगभग 32% हिस्सा अमेरिका को गया।

टैरिफ बढ़ोतरी से 7 बिलियन डॉलर (लगभग ₹61,000 करोड़) के सालाना ऑटो पार्ट्स निर्यात में से ₹30,000 करोड़ का निर्यात प्रभावित हो सकता है।

वहीं इंजीनियरिंग गुड्स छोटे और मध्यम उद्यम सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे जो इंजीनियरिंग गुड्स के 40% निर्यात में योगदान देते हैं। इससे हजारों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।

क्या कर सकता है भारत?

  • यूरोप (जर्मनी, UK) और ASEAN देशों (सिंगापुर, मलेशिया) में इंजीनियरिंग गुड्स की मांग बढ़ रही है। भारत इन बाजारों में हिस्सेदारी बढ़ा सकता है।
  • इंजीनियरिंग गुड्स के लिए PLI स्कीम का विस्तार करके उत्पादन लागत को कम करना, ताकि कंपनियां अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी रहें।

2. इलेक्ट्रॉनिक्स: स्मार्टफोन पर ज्यादा असर

पहले की स्थिति :

भारत ने 2024 में अमेरिका को 14 बिलियन डॉलर (करीब 1.23 लाख करोड़ रुपए) के इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात किया था। इसमें स्मार्टफोन, खासतौर पर आईफोन का बड़ा हिस्सा है। भारत अमेरिका का आईफोन का सबसे बड़ा सप्लायर है। अप्रैल में जब डोनाल्ड ट्रम्प ने पहली बार टैरिफ का ऐलान किया था उससे पहले इलेक्ट्रॉनिक्स पर एवरेज 0.41% का टैरिफ लगता था।

अमेरिका में बिकने वाले 44% स्मार्टफोन भारत में बनते हैं।
अमेरिका में बिकने वाले 44% स्मार्टफोन भारत में बनते हैं।

टैरिफ के बाद:

अभी इलेक्ट्रॉनिक्स को छूट है। जब तक सेक्शन 232 टैरिफ की घोषणा नहीं होती तब तक अमेरिका को एपल, सैमसंग जैसे स्मार्टफोन्स के निर्यात पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सेक्शन 232 अमेरिकी व्यापार विस्तार अधिनियम 1962 का हिस्सा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर आयात पर टैरिफ लगाने की अनुमति देता है।

सेक्शन 232 की समीक्षा के बाद टैरिफ पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सेक्शन 232 टैरिफ की घोषणा के बाद अगर 50% का नया टैरिफ लागू होता है तो अमेरिका में भारत से एक्सपोर्ट होने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे हो जाएंगे। कंपनियां अमेरिका को भेजे जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम को किसी और देश में बनाने पर विचार कर सकती हैं।

क्या कर सकता है भारत?

  • स्मार्टफोन और सेमीकंडक्टर्स को टैरिफ से छूट बनाए रखने के लिए बातचीत करना।
  • घरेलू बाजार को मजबूत करने और नए ब्रांड्स विकसित करने पर जोर देना।

3. फार्मा: 250% टैरिफ लगाने की धमकी

पहले की स्थिति :

भारत ने 2024 में अमेरिका को 10.52 बिलियन डॉलर यानी, करीब 92 हजार करोड़ रुपए की दवाओं का निर्यात किया था। ये अमेरिकी फार्मा एक्सपोर्ट का करीब 40% हिस्सा है। अगर ये लागू होता है तो अमेरिका और भारत दोनों पर असर पड़ेगा।

टैरिफ के बाद:

अभी फार्मा को छूट है, लेकिन ट्रम्प ने 18 महीने में 150% और बाद में 250% टैरिफ की धमकी दी है। 100 डॉलर की दवा की कीमत दोगुनी हो जाएगी। इससे सन फार्मा, डॉ. रेड्डी, सिप्ला, ल्यूपिन जैसी बड़ी भारतीय कंपनियों को नुकसान होगा।

क्या कर सकता है भारत?

  • जेनेरिक दवाओं की कीमतों को कम रखने के लिए अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर जोर देना।
  • यूरोप और लैटिन अमेरिका जैसे वैकल्पिक बाजारों में निर्यात बढ़ाना।

4. जेम्स एंड ज्वेलरी: टैरिफ से पहले एक्सपोर्ट डबल

पहले की स्थिति:

भारत ने 2024 में अमेरिका को 9.94 बिलियन डॉलर (करीब 87 हजार करोड़) के रत्न और आभूषण एक्सपोर्ट किए थे। ये अमेरिकी हीरा आयात का 44.5% है। कुछ आभूषणों पर पहले से ही 25% तक टैरिफ था।

अमेरिका में कीमत बढ़ने से निर्यात में 15-20% की कमी हो सकती है।
अमेरिका में कीमत बढ़ने से निर्यात में 15-20% की कमी हो सकती है।

टैरिफ के बाद:

  • नया टैरिफ बढ़कर 50% हो गया है। कीमत बढ़ने से निर्यात में 15-30% की कमी संभव है। अमेरिकी खरीदार सस्ते विकल्पों की ओर जा सकते हैं, जिससे भारतीय कारीगरों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
  • वहीं भारतीय कंपनियां दुबई और मेक्सिको जैसे देशों में मैन्युफैक्चरिंग सुविधाएं स्थापित करने पर विचार कर सकती हैं जहां टैरिफ कम हैं। दुबई में यह शुल्क सिर्फ 10% और मेक्सिको में 25% है, जबकि भारत को अब 50% का भुगतान करना होगा।

क्या कर सकता है भारत?

  • भारत-अमेरिका बाइलैटरल ट्रेड एग्रीमेंट को तेजी से पूरा करने पर जोर दे सकता है।
  • यूरोपीय बाजारों में डायमंड निर्यात बढ़ाना।

5. टेक्सटाइल: कपड़ों की मांग पर ब्रेक

पहले की स्थिति :

भारत ने 2024 में अमेरिका को 10 बिलियन डॉलर, यानी करीब 87 हजार करोड़ के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट किए थे। इसमें रेडीमेड गार्मेंट से लेकर कॉटन यार्न और कारपेट शामिल है।

इस साल की पहली तिमाही में भारत का कुल निर्यात 10% बढ़कर 4 बिलियन डॉलर हो गया, जिसमें अमेरिका को निर्यात 14% बढ़ा।

अमेरिका में भारतीय कपड़ों की कीमत बढ़ने से मांग घट सकती है।
अमेरिका में भारतीय कपड़ों की कीमत बढ़ने से मांग घट सकती है।

टैरिफ के बाद:

नए टैरिफ से 50% भारतीय कपड़ों के कीमत बढ़ सकती है। कंपड़ों की मांग में 20-25% की कमी संभव है। अमेरिका में भारत के कपड़ा निर्यात का हिस्सा पिछले साल के 33% से घटकर इस साल 20-25% रह जाएगा।

क्या कर सकता है भारत?

  • अब भारतीय कपड़ा कंपनियों को यूरोपीय संघ (EU), यूनाइटेड किंगडम (UK) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे अन्य बड़े निर्यात बाजारों पर ध्यान देना होगा, जो भारत के कुल निर्यात का 45% हैं।
  • भारत के कपड़ा उद्योग ने सरकार से कच्चे कपास पर 11% का आयात शुल्क हटाने का सुझाव दिया है। इस कदम से अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में एक मजबूत सौदेबाजी का मौका मिल सकता है।

6. सी फूड सेक्टर: ₹24,000 करोड़ का कारोबार खतरे में

टैरिफ से पहले: भारत अभी अमेरिका को सालाना ₹60,000 करोड़ का समुद्री खाद्य निर्यात करता है। भारत के कुल सी फूड एक्सपोर्ट में अमेरिका को जाने वाला हिस्सा लगभग 40% है। इस सेक्टर से करीब 2 करोड़ भारतीयों को रोजगार मिलता है।

टैरिफ के बाद:

50% शुल्क से ₹24,000 करोड़ का कारोबार खतरे में पड़ सकता है। भारत के कॉम्पिटिटर, जैसे इक्वाडोर (10%), इंडोनेशिया (19%), और वियतनाम (20%) बहुत कम टैरिफ का भुगतान करते हैं। भारतीय सी फूड महंगा होने से इन देशों के फूड प्रोडक्ट्स ज्यादा बिकेंगे। इससे भारतीय कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी घट सकती है।

क्या कर सकता है भारत?

भारत को चीन और यूरोपीय देशों में अपने समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने की जरूरत होगी।

अमेरिकी अर्थशास्त्री ने फिर दिखाया ट्रंप को आईना …………….

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामान पर 50% टैरिफ लगाया है। इसमें से 25% पहले से ही चल रहा है जबकि 25% अतिरिक्त टैरिफ आज से लागू होगा। इससे भारत के दो-तिहाई एक्सपोर्ट पर असर पड़ सकता है। इस बीच अमेरिका के जाने माने अर्थशास्त्री जेफरी सैश का कहना है कि भारत पर इतना ज्यादा टैरिफ लगाकर ट्रंप ने अमेरिका का ही नुकसान किया है। इससे अमेरिका दुनिया में अलग-थलग पड़ जाएगा और उसकी कंपनियों का भारी नुकसान होगा।

कोलंबिया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर सैश ने एक इंटरव्यू में कहा कि ट्रंप भारत की बांह मरोड़ने की कोशिश कर रहा है लेकिन वह इसमें सफल नहीं होंगे। उनको लगता है कि वे भारत को डरा-धमकाकर अपना काम निकाल लेंगे। यह सोचना समझदारी नहीं है कि वे 1.5 अरब की आबादी वाले देश को डरा सकते हैं। इससे ट्रंप ब्रिक्स देशों को और करीब लाने में सफल होंगे। इससे भारत अमेरिका के दूर हो जाएगा और रूस, चीन, ब्राजील और दुनिया की दूसरी बड़ी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के करीब चला जाएगा।

अमेरिका का नुकसान

उन्होंने कहा, ‘ट्रंप अमेरिका को ग्लोबल इकॉनमी से अलग-थलग कर रहे हैं। वह अमेरिका की इंडस्ट्री का नुकसान कर रहे हैं। हो सकता है कि उनके इस कदम से अमेरिका की कंपनियां घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ा दें लेकिन वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा कंप्टीटिव नहीं रह जाएंगी। मुझे लगता है कि ट्रंप अपने पैर पर कुल्हाड़ी नहीं मार रहे हैं बल्कि अमेरिका के पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। वह बाकी दुनिया को करीब लाने का काम कर रहे हैं।’

सैश ने कहा कि ट्रंप और उनके सलाहकार भारत के बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं तो भारत में अपने दोस्तों से कहता हूं कि अमेरिका पर ज्यादा भरोसा न करें। अमेरिका को भारत के विकास की कोई परवाह नहीं है।’ सैश ने भारत पर ज्यादा टैरिफ लगाने के ट्रंप के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह अमेरिका की विदेश नीति में अब तक का सबसे बेवकूफी भरा फैसला है। इससे अमेरिका को एशिया में भारत जैसे भरोसेमंद साथी से हाथ धोना पड़ सकता है।

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