9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए के उम्मीदवार का नाम रविवार शाम को घोषित होने की संभावना है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सर्वोच्च निर्णायक संस्था पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक रविवार शाम को पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय पर बुलाई गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा,गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बोर्ड के अन्य सदस्य शामिल होंगे.
सात अगस्त को एनडीए नेताओं की संसद भवन में हुई बैठक में उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा को अधिकृत किया गया था. उसके बाद से ही बीजेपी के शीर्ष नेताओं का बैठक का सिलसिला चल रहा है. संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा हो रही है. शुक्रवार रात को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा से मुलाकात की।
बीजेपी के आला सूत्र यह इशारा दे चुके हैं कि अगला उपराष्ट्रपति बीजेपी का ही होगा और कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो पार्टी और आरएसएस की विचारधारा से मजबूती से जुड़ा हो. इसके साथ ही क्षेत्रीय और सामाजिक संदेश देने का प्रयास भी किया जाएगा. अभी आदिवासी राष्ट्रपति हैं जो पूर्वी भारत से हैं. प्रधानमंत्री ओबीसी हैं जो पश्चिम और उत्तर दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं. लोकसभा स्पीकर वैश्य हैं जो राजस्थान से हैं। ऐसे में कई दावेदार उभरे हैं जो एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हो सकते हैं.
आपको बता दें कि जिन परिस्थितियों में जगदीप धनखड़ की विदाई हुई, उसने भी बीजेपी नेतृत्व को चौकन्ना कर दिया है. एनडीटीवी विस्तार से यह रिपोर्ट कर चुका है कि धनखड़ को क्यों इस्तीफा देना पड़ा. बीजेपी यह नहीं चाहती है कि अविश्वास की वैसी खाई दोबारा बने क्योंकि उपराष्ट्रपति को चाहे अधिक अधिकार न हो किंतु राज्य सभा का सभापति होने के नाते ऊपरी सदन की कार्यवाही और उससे जुड़े तमाम निर्णय लेने का अधिकार उसे होता है. धनखड़ की विदाई के पीछे एक बड़ा कारण यही माना जा रहा है कि वे सरकार को अंधेरे में रख कर मनमाने फैसले करने लगे थे. बीजेपी नेतृत्व नहीं चाहता है कि वैसी नौबत दोबारा आए. धनखड़ जनता पार्टी और कांग्रेस होते हुए बीजेपी में आए थे. उनकी वैचारिक पृष्ठभूमि भिन्न थी और यह भी सामंजस्य बनाने में आड़े आई। उन्हें बनाने के पीछे प्रमुख कारण जाटों को संदेश देना था. लेकिन अब पार्टी फूंक-फूंक कर कदम रखना चाह रही है.
एनडीए की एकता का संदेश दिया जाएगा .
इनमें बीजेपी के सहयोगी दलों के नेताओं को भी प्रस्तावक और समर्थक बनाया जाएगा.
पिछले एक महीने में कई राज्यपालों और उपराज्यपालों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की है. इसीलिए यह सुगबुगाहट है कि क्या इनमें से किसी को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जा सकता है. सत्ता के गलियारों में कई नाम चलाए जा रहे हैं. इनमें गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर, बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना के नाम शामिल हैं. इनमें आचार्य देवव्रत और मनोज सिन्हा का कार्यकाल पूरा हो चुका है. कुछ अलग नाम भी चल रहे हैं जिनमें आरएसएस के प्रमुख विचारक शेषाद्रिचारी का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है जो बीजेपी संगठन में प्रमुख भूमिका निभा चुके हैं. बिहार चुनाव के मद्देनजर वर्तमान उपसभापति हरिवंश का नाम भी लिया जा रहा है हालांकि बीजेपी नेता यह स्पष्ट कर चुके हैं अगला उपराष्ट्रपति बीजेपी का ही होगा, सहयोगी दल का नहीं. इन सबसे अलग किसी चौंकाने वाले नाम के सामने आने से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है.
इस बीच, एनडीए ने अपने उम्मीदवार के पक्ष में अधिकतम मतदान की रणनीति पर भी काम शुरू कर दिया है. उपराष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले तीन दिनों तक दिल्ली में संसद भवन में सभी सांसदों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है. इसमें सांसदों को वोट डालने की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति चुनाव में लोक सभा और राज्य सभा दोनों सदनों के सदस्य वोट डालते हैं. एनडीए का लक्ष्य होगा कि अपने उम्मीदवार के लिए अधिकतम मत सुनिश्चित किए जाएं. पिछले उपराष्ट्रपति चुनाव में जगदीप धनखड़ रिकॉर्ड मतों से निर्वाचित हुए थे.
सरकार के रणनीतिकार विपक्ष से भी संपर्क साधेंगे और अपने उम्मीदवार के नाम पर आम राय बनाने का प्रयास करेंगे. हालांकि यह केवल औपचारिकता भर है क्योंकि विपक्ष यह स्पष्ट कर चुका है कि वह अपना उम्मीदवार खड़ा करेगा. उपराष्ट्रपति चुनाव मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में शक्ति परीक्षण का पहला बड़ा मौका है और विपक्ष इसे अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता. अभी तक राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए को बीजेडी, वायएसआरसीपी, बीआरएस, टीएमसी जैसे दलों का समर्थन कभी-कभार मिलता रहा है. लेकिन अब हालात उलट हैं.
बीजेपी के हाथों ओडीशा में सत्ता गंवा चुकी बीजेडी अब किसी भी तरह से समर्थन करने के मूड में नहीं है. वहीं बीजेपी को इस बार अपने बूते बहुमत नहीं मिला और वह प्रमुख रूप से टीडीपी और जेडीयू के समर्थन पर निर्भर है. ऐसे में विपक्ष चाहेगा कि वह एनडीए को कड़ी टक्कर दे. वोटर लिस्ट के मुद्दे पर विपक्ष की एकजुटता दिख रही है और इस मुद्दे पर बीजेडी और आम आदमी पार्टी भी कांग्रेस के साथ दिख रहे हैं. विपक्ष इस एकता को उपराष्ट्रपति चुनाव में भी बनाए रखना चाहेगा.







