अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नोबल पुरस्कार पाने को लेकर बेकरारी बढ़ती ही जा रही है। पिछले कुछ महीनों में वह नोबल पुरस्कार पाने के लिए दुनिया भर में आधा दर्जन युद्ध रुकवाने का जबरन क्रेडिट ले रहे हैं, यह बात अलग है कि रूस-यूक्रेन युद्ध में अभी तक ट्रंप की दाल नहीं गल पाई है। जबकि ट्रंप ने दूसरी बार अमेरिका का राष्ट्रपति बनने से पहले अपने चुनावी अभियान के दौरान ही बार-बार यह दावा किया था कि अगर वह इस बार पद पर आसीन होते हैं, तो 24 घंटे में रूस-यूक्रेन युद्ध को रुकवा देंगे।
ह्वाइट हाइस ने भी की ट्रंप के लिए पुरस्कार की मांग
राष्ट्रपति ट्रंप के लिए अब व्हाइट हाउस ने भी नोबल पुरस्कार दिलाने की बैटिंग शुरू कर दी है। ह्वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा है कि ट्रंप को दुनिया के करीब आधा दर्जन देशों के बीच युद्ध रुकवाने के लिए नोबल शांति पुरस्कार दिया जाना चाहिए। कैरोलिन ने दावा करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने दुनिया भर में कई संघर्षों को समाप्त कराया है। उन्होंने इसमें भारत और पाकिस्तान के बीच का संघर्ष भी भी समाप्त करवाने का एक बार फिर जबरन क्रेडिट लिया। जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में संसद में भी साफ कर दिया है कि भारत-पाक के बीच सीजफायर पाकिस्तानी डीजीएमओ के अनुरोध पर हुआ था, इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।
इन देशों के मध्य भी युद्ध रोकवाने का दावा
लेविट ने बृहस्पतिवार को व्हाइट हाउस में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ट्रंप ने ‘‘थाईलैंड और कंबोडिया, इजराइल और ईरान, रवांडा और लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो, सर्बिया और कोसोवो, और मिस्र-इथियोपिया के बीच भी संघर्ष को समाप्त करवाया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने छह महीने के कार्यकाल में औसतन हर महीने एक शांति समझौता या युद्धविराम कराया है। इसलिए ट्रंप को नोबल शांति पुरस्कार दिए जाने का वक्त आ गया है।’’
पीएम मोदी के साथ जयशंकर भी कह चुके कि मोदी-ट्रंप में नहीं हुई कोई बात
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस सप्ताह संसद में कहा था कि किसी भी देश के किसी भी नेता ने भारत से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रोकने के लिए नहीं कहा था। उनके अलावा विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने भी बुधवार को स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान के साथ संघर्षविराम लाने में किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप नहीं था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सैन्य कार्रवाई रोकने और व्यापार के बीच कोई लेना-देना नहीं था। राज्यसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर विशेष चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए जयशंकर ने कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले से लेकर 16 जून तक प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप के बीच टेलीफोन पर कोई बातचीत नहीं हुई थी।







