जनता दल से अलग होकर बना राष्ट्रीय जनता दल (राजद) गठन के साथ ही 1997 में बिहार की सत्ता में काबिज हुआ। लगभग तीन दशक पुरानी यह पार्टी स्थापना के आठ साल बाद तक बिहार की सत्ता में रही। साल 2004 के लोकसभा चुनाव में 22 सांसदों के बल पर राजद पहली बार केंद्र की यूपीए सरकार का साझीदार बना। साल 2005 में हुए विस चुनाव में बिहार की सत्ता से बेदखल हो गया। अन्य राज्यों में चुनावी जीत मिलने पर 2008 में पहली बार पार्टी को राष्ट्रीय दल का दर्जा मिला जो दो साल ही बरकरार रह सका। 2010 के विस चुनाव में भी उसे बुरी हार मिली। 2015 विस चुनाव में जदयू के साथ नए गठबंधन में पार्टी सत्ता में आई। हालांकि जदयू के साथ गठबंधन ज्यादा नहीं चल सका और 2019 के लोकसभा चुनाव में राजद पहली बार खाता खोलने में नाकाम रहा। 2020 के विस चुनाव में सबसे बड़े दल बनने के बाद भी सत्ता हाथ से दूर रह गया। राजद की मजबूत धरातल एमवाई समीकरण रहा है, लेकिन इसके खिलाफ ध्रुवीकरण से सत्ता हाथ से दूर होती गई। इस वजह से तेजस्वी प्रसाद यादव ने अब बाप (बहुजन, अगड़ा, आधी आबादी और पुअर यानी गरीब) का नारा दिया। तेजस्वी जनाधार को विस्तार देने की कवायद में लगे हैं।
चारा घोटाला में नाम आने के बाद लालू ने बनाया था राजद : बिहार की राजनीति की धुरी रहे लालू प्रसाद जब मुख्यमंत्री थे तो उनका नाम चारा घोटाला में सामने आया। तब उन्होंने जनता दल को तोड़कर पांच जुलाई 1997 को राजद का गठन किया। राजद पहली बार 1998 के लोस चुनाव में उतरा। संयुक्त बिहार में उस समय पार्टी 38 सीटों पर चुनाव लड़ी और 17 पर जीत हासिल की। 1999 के लोस में 35 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन मात्र सात सीटों पर संतोष करना पड़ा। वर्ष 2000 के विस चुनाव में 293 सीटों पर चुनाव लड़ा और 124 सीटों पर जीत हासिल कर कांग्रेस के साथ सरकार बनाने में कामयाब रहा। 2004 के लोस चुनाव में 26 सीटों पर चुनाव लड़ा और 22 सीटें जीतकर केंद्र सरकार में शामिल हुआ। लेकिन अगले ही साल फरवरी 2005 में हुए विस चुनाव में पार्टी 210 सीटों पर चुनाव लड़ी लेकिन उसे 75 सीटों पर संतोष करना पड़ा। किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से अक्टूबर 2005 में फिर चुनाव हुए। पार्टी 175 सीटों पर चुनाव लड़ी लेकिन उसे 54 सीटों पर ही जीत मिली और विपक्ष में बैठना पड़ा। वहीं वर्ष 2009 में हुए लोस चुनाव में पार्टी 28 सीटों पर चुनाव लड़ी और चार सीटों पर ही जीत हासिल हुई। 2010 में हुए विधानसभा
चुनाव में राजद का प्रदर्शन गिर गया। 168 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन मात्र 22 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी 27 सीटों पर चुनाव लड़ी पर चार पर ही जीत हासिल हो सकी। 2015 में जदयू का साथ मिलने पर राजद को बम्पर जीत मिली और 101 सीटों पर चुनाव लड़कर इसने 80 सीटें जीत ली। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी खाता भी नहीं खोल सकी। 2020 के विस चुनाव में 144 सीटों पर चुनावी मैदान में उतरे राजद को 75 सीटों पर जीत हासिल हुई। पिछले साल 2024 के लोस चुनाव में पार्टी 23 सीटों पर लड़ी और चार पर उसे जीत मिली।
पार्टी की कमान नई पीढ़ी के हाथ में : उम्र और स्वास्थ्य समस्या के कारण राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की राजनीतिक सक्रियता अब कम होने लगी है। 2015 में जब लालू प्रसाद ने तेजस्वी यादव को राजनीति में लॉन्च किया तो उसी समय यह तय हो गया कि अब पार्टी की कमान वही संभालेंगे। 2017 में महागठबंधन से जब जदयू अलग हुआ तो दल के अन्य वरीय नेताओं के होते हुए भी तेजस्वी को ही नेता प्रतिपक्ष की कमान सौंपी गई। 2019 के लोकसभा चुनाव से तेजस्वी की दल में सक्रियता और अधिक बढ़ गई। वर्ष 2020 का विधानसभा और 2024 का लोकसभा चुनाव वे अपने दम पर ही लड़े। पिछले साल पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में विधिवत घोषणा हुई कि लालू के साथ ही तेजस्वी भी सभी निर्णय ले सकेंगे।
राजद को गठबंधन की राजनीति भाती है। 1998 और 1999 के लोस चुनाव में पार्टी पहली बार कांग्रेस के साथ चुनावी मैदान में उतरी। 2000 के विस चुनाव में राजद और कांग्रेस अलग-अलग चुनावी मैदान में उतरे लेकिन परिणाम आने के बाद सत्ता की मजबूरी ने दोनों को एक कर दिया। 2004 के लोस चुनाव में राजद और कांग्रेस का साथ बना रहा। फरवरी 2005 के विस चुनाव में राजद और कांग्रेस का साथ फिर छूट गया। अक्टूबर 2005 के चुनाव में एक बार फिर राजद और कांग्रेस का मिलन हो गया। 2009 के लोकसभा चुनाव में राजद और लोजपा साथ रहे पर कांग्रेस अलग लड़ी। 2010 के विस चुनाव में भी राजद और कांग्रेस की दूरी बनी रही। 2014 में राजद और कांग्रेस साथ हो लिए। 2015 के विस चुनाव के पहले बिहार में नए गठबंधन ने आकार लिया। एक-दूसरे के धुर विरोधी समझे जाने वाले राजद और जदयू का मिलन हो गया। 2019 के लोस चुनाव के पहले ही जदयू और राजद अलग-अलग हो गए। राजद को कांग्रेस के अलावा रालोसपा, हम का साथ मिला। 2020 के विस चुनाव में कांग्रेस और राजद के अलावा वामदल भी साथ आए। 2024 के लोस चुनाव में भी इसी गठबंधन के साथ पार्टी चुनावी मैदान में गई।
वर्ष लड़ी जीती स्ट्राइक रेट वोट(%)
1998 38 17 44.73 26.58
1999 35 07 20.00 28.29
2004 26 22 84.61 30.67
2009 28 04 14.28 19.43
2014 27 04 14.81 20.46
2019 19 00 00 15.68
2024 23 04 17.39 22.14
दल का गठन करने के 20 दिन बाद 25 जुलाई 1997 को लालू प्रसाद ने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया और अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया। वर्ष 2000 में हुए विस चुनाव में भी राजद कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार में बना रहा। राबड़ी देवी तीन बार अलग-अलग अवधि में क्रमश: एक साल 201 दिन, 359 दिन और चार साल 360 दिन मुख्यमंत्री रहीं। 2004 में राजद केंद्र की यूपीए सरकार में शामिल हुआ तो पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद खुद रेल मंत्री बने जबकि रघुवंश प्रसाद सिंह, अखिलेश प्रसाद सिंह, कांति सिंह, प्रेमचंद गुप्ता, जयप्रकाश नारायण यादव, एमए फातमी मंत्री बने। 2015 में जब राजद और कांग्रेस के अलावा जदयू का महागठबंधन बना तो राजद दस वर्षों के बाद फिर से बिहार की सत्ता में शामिल होने में कामयाब रहा। एक साल 248 दिनों के बाद ही जदयू का महागठबंधन से अलग हो गया और राजद फिर से विपक्ष में आ गया। वर्ष 2021 में दोबारा जदयू और राजद का गठबंधन हुआ। राजद फिर से बिहार में सत्तासीन हुआ। हालांकि एक साल 171 दिनों बाद फिर जदयू और राजद का गठबंधन टूट गया। तब से राजद विपक्ष में ही है।
वर्ष लड़ी जीती स्ट्राइक रेट वोट(%)
2000 293 124 42.32 28.39
फरवरी 05 210 75 35.71 25.07
अक्टूबर 05 175 54 30.85 23.45
2010 168 22 13.09 18.84
2015 101 80 79.20 18.4
2020 144 75 52.08 23.11







