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भारत में आर्थिक नीति-निर्माण का सबसे मजबूत व समावेशी मॉडल का लाभ देश के हर वर्ग को मिल रहा………………

UB India News by UB India News
July 18, 2025
in कारोबार
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भारत में आर्थिक नीति-निर्माण का सबसे मजबूत व समावेशी मॉडल का लाभ देश के हर वर्ग को मिल रहा………………
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इन दिनों भारत की गरीबी, सामाजिक सुरक्षा और समानता से संबंधित तीन महत्वपूर्ण रिपोर्टों को गंभीरता से पढ़ा जा रहा है। पहली रिपोर्ट विश्व बैंक की है, जिसमें कहा गया है कि भारत में अत्यधिक गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या में पिछले 11 वर्षों में जबर्दस्त गिरावट आई है और करीब 27 करोड़ देशवासी अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले हैं। दूसरी रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की है, जिसके मुताबिक, भारत में इस वर्ष 64 फीसदी से अधिक आबादी यानी करीब 95 करोड़ लोग किसी न किसी सामाजिक सुरक्षा योजना से लाभान्वित हो रहे हैं, जबकि वर्ष 2015 में ये योजनाएं 25 करोड़ से भी कम लोगों तक पहुंच रही थीं।

तीसरी रिपोर्ट, विश्व बैंक के गिनी सूचकांक पर आधारित है, जिसके तहत तेजी से समानता बढ़ाने वाले देशों की सूची में भारत दुनिया में चौथे स्थान पर आ गया है। गिनी वह सूचकांक है, जो यह मापता है कि किसी देश या अर्थव्यवस्था में परिवारों की आमदनी का बंटवारा या उपभोग समानता से हो रहा है या नहीं। विश्व बैंक ने अत्यधिक गरीबी रेखा के निर्धारण के संबंध में जो नए अनुमान जारी किए हैं, उनके मुताबिक, निम्न आय वाले देशों के लिए अत्यधिक गरीबी की रेखा 2.15 डॉलर प्रतिदिन के उपभोग व्यय से बढ़ाकर अब प्रतिदिन तीन डॉलर उपभोग व्यय पर निर्धारित की गई है। इससे अत्यधिक गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या 34.44 करोड़ से घटकर 7.52 करोड़ रह गई है। यह परिदृश्य पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार की गरीब कल्याण लक्षित योजनाओं की सार्थकता भी प्रस्तुत करता है।

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भारत तेजी से सामाजिक सुरक्षा और समानता की डगर पर आगे बढ़ रहा है। आईएलओ के महानिदेशक गिल्बर्ट एफ हुंगबो ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा में विश्व स्तर पर भारत ने दूसरा स्थान हासिल किया है। आईएलओ ने अपने आकलन में केंद्र और राज्य सरकार की 32 योजनाओं के आंकड़े शामिल किए हैं, जिनमें 24 योजनाएं पेंशन से जुड़ी हुई हैं। इन योजनाओं में अटल पेंशन योजना, किसान सम्मान निधि, मनरेगा, जननी सुरक्षा योजना और पीएम पोषण जैसी योजनाएं शामिल हैं।

एक दशक पहले तक विशेषकर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कल्याणकारी योजनाओं के सुरक्षा दायरे में नहीं आते थे। इस चुनौती को समझते हुए सरकार ने सामाजिक सुरक्षा के लिए बहुआयामी संरचनात्मक सुधार शुरू किए। इस समय कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा यूनिफाइड पेंशन स्कीम को मंजूरी देने से 23 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और इस योजना को लागू करने वाले राज्यों के कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिल रहा है।

केंद्र सरकार ने विगत वर्ष 11 सितंबर, 2024 को 70 साल या उससे अधिक उम्र के सभी वर्गों के लोगों को आयुष्मान भारत योजना में शामिल किया है, जिसके तहत पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। इससे देश के 4.5 करोड़ परिवारों के करीब छह करोड़ बुजुर्गों को फायदा मिलता है। यही नहीं वर्ष 2021 में केंद्र सरकार ने असंगठित श्रमिकों के लिए पहला विशिष्ट राष्ट्रीय डिजिटल डाटाबेस ई-श्रम पोर्टल शुरू किया। केवल चार वर्षों में गिग वर्कर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म वर्कर्स सहित 30 करोड़ 80 लाख से अधिक असंगठित श्रमिक इस पोर्टल से जुड़ गए हैं। यह सक्रिय पोर्टल एकल समाधान के रूप में श्रमिकों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ता है। सामाजिक सुरक्षा की कुछ अन्य योजनाएं भी लाभप्रद साबित हो रही हैं।

विश्व बैंक के गिनी सूचकांक के मुताबिक, भारत विकसित देशों के समूह जी-7 और इससे भी बड़े समूह जी-20 के प्रत्येक सदस्य देश से कहीं अधिक तेजी से सामाजिक समानता बढ़ाने वाला देश बन गया है। इस बार भारत का गिनी सूचकांक 25.5 है, जिसे विश्व बैंक ‘औसत से कम’ असमानता वाला देश मानता है। भारत में आर्थिक नीति-निर्माण का सबसे मजबूत व समावेशी मॉडल अपनाया गया है, जहां आर्थिक अवसरों का लाभ देश के हर वर्ग को मिला है।

आर्थिक-सामाजिक कल्याण के संतोषप्रद नतीजों, तेजी से घटती गरीबी व अर्थव्यवस्था के सुकून के बावजूद हमें अभी आम आदमी के कल्याण और प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिए मीलों चलना होगा। 140 करोड़ से अधिक आबादी वाला भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की डगर पर आगे बढ़ रहा है, लेकिन हमें आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए। प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत अभी बहुत पीछे है। अब भी देश के करीब 52 करोड़ लोगों का सामाजिक सुरक्षा की छतरी के बाहर रहना एक बड़ी आर्थिक-सामाजिक चुनौती है। उम्मीद करें कि सरकार 2047 तक विकसित भारत के संकल्प के मद्देनजर गरीबी में और तेजी से कमी, निजी-असंगठित क्षेत्र के करोड़ों लोगों के श्रमबल को मजबूत सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ देश में समानता को बढ़ावा देने की डगर पर नई रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी।

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