पाकिस्तान एक बार फिर वैश्विक मंच पर आतंकवाद के मुद्दे पर घिरता नजर आ रहा है. भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादियों की खुलेआम हो रही रैलियों और उनमें पाकिस्तानी प्रशासन व सैन्य अधिकारियों की भागीदारी को लेकर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) को सबूत सौंपने की तैयारी कर ली है. भारत चाहता है कि पाकिस्तान को दोबारा FATF की ग्रे लिस्ट में डाल दिया जाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर वो आतंकवादियों को समर्थन देना बंद कर दे.
जो पाक दुनिया के सामने शराफत का नकाब ओढ़कर खुद को पाक-साफ दिखाने की कोशिश में जुटा रहता है. वो बात अलग है कि उसके नेता और सेना आतंकियों की गोद में बैठी रहती है. भारत अब पाकिस्तान के इसी चेहरे को बेनकाब करने वाला है और इसकी पूरी तैयारी हो चुकी है.
आतंकियों की रैलियों में खुलेआम जाती है सेना और नेता
भारत के खिलाफ हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और अन्य प्रतिबंधित संगठनों की रैलियां हुईं है. इन रैलियों में आंतंकी संगठनों के सरगनाओं ने खुले मंच से भाषण दिए हैं. हैरानी की बात तो ये है कि इन रैलियों में पाकिस्तानी फौज के अफसर और सत्ता पक्ष के नेता भी मौजूद थे, जो साफ दिखाता है कि यह महज आतंकियों की नहीं, बल्कि पाकिस्तान की प्रायोजित गतिविधियां हैं. इन रैलियों में हाफिज सईद के बेटे तल्हा सईद, लश्कर के डिप्टी कमांडर और पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसारी जैसे आतंकियों ने भारत के खिलाफ खुलेआम जहर उगला और हमले करने की धमकी दी और हैरानी की बात यह है कि इन आतंकियों को सुरक्षा भी पाकिस्तानी एजेंसियों द्वारा दी जा रही है.
पाकिस्तानी सेना की खुली भागीदारी
ऐसे कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं जिनमें देखा गया कि पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी मारे गए आतंकियों को श्रद्धांजलि देने उनके स्मारकों पर फूल चढ़ा रहे हैं. इससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि आतंकियों को सिर्फ राजनीतिक संरक्षण नहीं बल्कि सैन्य समर्थन भी हासिल है.
FATF की ग्रे लिस्ट में जाने के नुकसान
भारत ने इन घटनाओं के तमाम वीडियो और दस्तावेज जुटाकर FATF को सौंपने का पूरा इंतज़ाम कर लिया है. आपको बता दें कि FATF एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो उन देशों की निगरानी करता है जो आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को बढ़ावा देते हैं. अगर पाकिस्तान को फिर से FATF की ग्रे लिस्ट में डाला जाता है, तो उसे विदेशी निवेश, कर्ज और आर्थिक सहायता पाने में गंभीर बाधाएं झेलनी पड़ सकती हैं. याद दिला दें कि पाकिस्तान को 2018 में FATF की ग्रे लिस्ट में डाला गया था, जिसकी वजह से वो सालों तक अंतरराष्ट्रीय प्रेशर में था. तब भी भारत ने इसी तरह पुख्ता सबूतों के आधार पर पाकिस्तान की असलियत उजागर की थी, हालांकि आर्थिक नुकसान और वैश्विक आलोचना के बाद पाकिस्तान ने दिखावटी कार्रवाई की और खुद को FATF से बाहर निकल लिया. अब एक बार फिर से उसकी आतंकवाद को पोसने वाली नीतियां दुनिया के सामने हैं.
पाकिस्तान एक बार फिर वैश्विक मंच पर आतंकवाद के मुद्दे पर घिरता नजर आ रहा है. भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादियों की खुलेआम हो रही रैलियों और उनमें पाकिस्तानी प्रशासन व सैन्य अधिकारियों की भागीदारी को लेकर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) को सबूत सौंपने की तैयारी कर ली है. भारत चाहता है कि पाकिस्तान को दोबारा FATF की ग्रे लिस्ट में डाल दिया जाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर वो आतंकवादियों को समर्थन देना बंद कर दे.
जो पाक दुनिया के सामने शराफत का नकाब ओढ़कर खुद को पाक-साफ दिखाने की कोशिश में जुटा रहता है. वो बात अलग है कि उसके नेता और सेना आतंकियों की गोद में बैठी रहती है. भारत अब पाकिस्तान के इसी चेहरे को बेनकाब करने वाला है और इसकी पूरी तैयारी हो चुकी है.
आतंकियों की रैलियों में खुलेआम जाती है सेना और नेता
भारत के खिलाफ हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और अन्य प्रतिबंधित संगठनों की रैलियां हुईं है. इन रैलियों में आंतंकी संगठनों के सरगनाओं ने खुले मंच से भाषण दिए हैं. हैरानी की बात तो ये है कि इन रैलियों में पाकिस्तानी फौज के अफसर और सत्ता पक्ष के नेता भी मौजूद थे, जो साफ दिखाता है कि यह महज आतंकियों की नहीं, बल्कि पाकिस्तान की प्रायोजित गतिविधियां हैं. इन रैलियों में हाफिज सईद के बेटे तल्हा सईद, लश्कर के डिप्टी कमांडर और पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसारी जैसे आतंकियों ने भारत के खिलाफ खुलेआम जहर उगला और हमले करने की धमकी दी और हैरानी की बात यह है कि इन आतंकियों को सुरक्षा भी पाकिस्तानी एजेंसियों द्वारा दी जा रही है.
पाकिस्तानी सेना की खुली भागीदारी
ऐसे कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं जिनमें देखा गया कि पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी मारे गए आतंकियों को श्रद्धांजलि देने उनके स्मारकों पर फूल चढ़ा रहे हैं. इससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि आतंकियों को सिर्फ राजनीतिक संरक्षण नहीं बल्कि सैन्य समर्थन भी हासिल है.
FATF की ग्रे लिस्ट में जाने के नुकसान
भारत ने इन घटनाओं के तमाम वीडियो और दस्तावेज जुटाकर FATF को सौंपने का पूरा इंतज़ाम कर लिया है. आपको बता दें कि FATF एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो उन देशों की निगरानी करता है जो आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को बढ़ावा देते हैं. अगर पाकिस्तान को फिर से FATF की ग्रे लिस्ट में डाला जाता है, तो उसे विदेशी निवेश, कर्ज और आर्थिक सहायता पाने में गंभीर बाधाएं झेलनी पड़ सकती हैं. याद दिला दें कि पाकिस्तान को 2018 में FATF की ग्रे लिस्ट में डाला गया था, जिसकी वजह से वो सालों तक अंतरराष्ट्रीय प्रेशर में था. तब भी भारत ने इसी तरह पुख्ता सबूतों के आधार पर पाकिस्तान की असलियत उजागर की थी, हालांकि आर्थिक नुकसान और वैश्विक आलोचना के बाद पाकिस्तान ने दिखावटी कार्रवाई की और खुद को FATF से बाहर निकल लिया. अब एक बार फिर से उसकी आतंकवाद को पोसने वाली नीतियां दुनिया के सामने हैं.