भारतीय सशस्त्र बलों ने सोमवार (12 मई, 2025) को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में की गई कार्रवाई को लेकर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी. इस दौरान भारतीय सेना के अधिकारियों से पाकिस्तान की किराना हिल्स में स्थित न्यूक्लियर फैसिलिटी पर हमले को लेकर सवाल किया गया. इस सवाल पर वायुसेना के एयर मार्शल एके भारती ने प्रतिक्रिया दी.
भारतीय वायु सेना के डीजी ऑप्स एयर मार्शल एके भारती ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इस बात की पुष्टि की कि भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान के किराना हिल्स में स्थित किसी भी न्यूक्लियर फैसिलिटी को अपना निशाना नहीं बनाया है. उन्होंने कहा, “आपका धन्यवाद जो आपने हमें बताया कि किराना हिल्स पर कोई न्यूक्लियर इस्टॉलेशन भी है. हमें इसके बारे में जानकारी नहीं थी और हमने किराना हिल्स को अपना निशाना नहीं बनाया है, फिर चाहे वहां कुछ भी हो.”
सोशल मीडिया की अटकलों पर भारतीय सेना ने दी प्रतिक्रिया
भारतीय सेना की ओर से यह बयान तब आया है जब सोशल मीडिया पर इस बात की काफी चर्चा हो रही है कि भारत ने पाकिस्तान के सरगोधा जिले में स्थित मुशाफ एयरबेस पर हमला किया है. यह एयरबेस जो कथित तौर पर किराना हिल्स के नीचे अंडरग्राउंड न्यूक्लियर स्टोरेज से जुड़ा हुआ है. सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान की इस न्यूक्लियर फैसिलिटी पर लॉइटरिंग और पेनेट्रेटिंग म्यूनिशन्स से हमला किया है.
आखिर क्या है पाकिस्तान के किराना हिल्स की कहानी?
दरअसल, किराना हिल्स पाकिस्तान की एक विशाल पथरीली पर्वत शृंखला है, जो पाकिस्तान सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधिकार वाला एक डेजिगनेटेड एरिया है. यह विशाल पर्वत शृंखला पाकिस्तान के सरगोधा जिले के शहरी भाग और रब्वाह शहर के बीच स्थित है. इस पर्वत शृंखला के भूरे रंग के होने के कारण इसे स्थानीय रूप से ‘काली पहाड़ी’ कहा जाता है.
भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। पाकिस्तान भारत के हवाई हमलों से इस कदर डर गया कि वह अमेरिका तक फोन लगा दिया। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने कहा कि भारत हमारे न्यूक्लियर सेंटर पर ब्रह्मोस मिसाइल मारेगा। इसलिए पाकिस्तान ने डर की वजह से युद्धविराम के लिए अमेरिका के ट्रंप प्रशासन को फोन किया था।
इनमें सबसे बड़ा खुलासा हुआ है पाकिस्तान के सरगोधा में स्थित एयरबेस को निशाना बनाने का। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस एयरबेस पर भारत के हमले के बाद पाकिस्तान के साथ-साथ अमेरिका तक की नींद उड़ गई। सीएनएन से लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स तक की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शुरुआत में संघर्ष को नियंत्रण में रखने की बात कर रहा ट्रंप प्रशासन एकाएक परमाणु आपदा के खतरे को देखते हुए एक्शन में आया और लगातार बढ़ते संघर्ष को रुकवाने में बड़ी भूमिका निभाई।
पहले जानें- भारत ने पाकिस्तान में किन-किन एयरबेस को निशाना बनाया?
पाकिस्तान को सबसे बड़ा झटका 10 मई की सुबह लगा, जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के आठ सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिनमें हवाई अड्डे, रडार इकाइयां और गोला-बारूद के भंडार शामिल थे। यह पलटवार पड़ोसी देश की ओर से लड़ाकू विमानों, मानवरहित लड़ाकू हवाई वाहनों (यूसीएवी) और मिसाइलों का इस्तेमाल कर भारत के सैन्य बुनियादी ढांचे और नागरिक क्षेत्रों पर किए गए हमलों के जवाब में किया गया था।
भारतीय वायुसेना ने रफीकी, मुरीद, चकलाला, रहीम यार खान, सुक्कुर, चुनियन, पसरूर और सियालकोट में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। रात भर चले घटनाक्रम ने भारत द्वारा ऑपरेशन सिंदूर शुरू किए जाने के बाद से दोनों सेनाओं के बीच सबसे भीषण संघर्ष को चिह्नित किया। भारत द्वारा निशाना बनाए गए लक्ष्यों में तकनीकी अवसंरचना, कमांड और नियंत्रण केंद्र, रडार साइट और हथियार भंडारण क्षेत्र शामिल थे। संघर्ष विराम की घोषणा के बाद एक ब्रीफिंग के दौरान विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में भारतीय प्रतिष्ठानों पर अकारण हमले के बाद पाकिस्तान को बहुत भारी और असहनीय क्षति हुई है।
उन्होंने कहा, “स्कार्दू, सरगोधा, जैकोबाबाद और भोलारी जैसे महत्वपूर्ण पाकिस्तानी एयरबेसों को भारी नुकसान पहुंचा है। साथ ही, वायु रक्षा हथियारों और रडार के नुकसान ने पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र की रक्षा को अस्थिर बना दिया है। एलओसी के पार, सैन्य बुनियादी ढांचे, कमांड और नियंत्रण केंद्रों और रसद प्रतिष्ठानों को व्यापक और सटीक नुकसान ने इसकी रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताओं को पूरी तरह से खत्म कर दिया है।”
सरगोधा एयरबेस पर भारत के हमले से अमेरिका की नींद क्यों उड़ी?
किराना हिल्स पहली बार दुनिया में चर्चा में तब आई थीं, जब अमेरिकी सैटेलाइट्स ने यह पकड़ा कि पाकिस्तान 1983 से 1990 के बीच लगातार परमाणु परीक्षण की तैयारी करता रहा। बाद में अमेरिका ने पाकिस्तान के परमाणु परीक्षणों पर आपत्ति जताई और इसी के साथ इस केंद्र पर परमाणु परीक्षणों को रोक दिया गया। हालांकि, पाकिस्तान ने यहां चीन की तरफ से सप्लाई होने वाली एम-11 मिसाइलों का भंडारण जारी रखा।
भारतीय सशस्त्र बलों ने सोमवार (12 मई, 2025) को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में की गई कार्रवाई को लेकर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी. इस दौरान भारतीय सेना के अधिकारियों से पाकिस्तान की किराना हिल्स में स्थित न्यूक्लियर फैसिलिटी पर हमले को लेकर सवाल किया गया. इस सवाल पर वायुसेना के एयर मार्शल एके भारती ने प्रतिक्रिया दी.
भारतीय वायु सेना के डीजी ऑप्स एयर मार्शल एके भारती ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इस बात की पुष्टि की कि भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान के किराना हिल्स में स्थित किसी भी न्यूक्लियर फैसिलिटी को अपना निशाना नहीं बनाया है. उन्होंने कहा, “आपका धन्यवाद जो आपने हमें बताया कि किराना हिल्स पर कोई न्यूक्लियर इस्टॉलेशन भी है. हमें इसके बारे में जानकारी नहीं थी और हमने किराना हिल्स को अपना निशाना नहीं बनाया है, फिर चाहे वहां कुछ भी हो.”
सोशल मीडिया की अटकलों पर भारतीय सेना ने दी प्रतिक्रिया
भारतीय सेना की ओर से यह बयान तब आया है जब सोशल मीडिया पर इस बात की काफी चर्चा हो रही है कि भारत ने पाकिस्तान के सरगोधा जिले में स्थित मुशाफ एयरबेस पर हमला किया है. यह एयरबेस जो कथित तौर पर किराना हिल्स के नीचे अंडरग्राउंड न्यूक्लियर स्टोरेज से जुड़ा हुआ है. सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान की इस न्यूक्लियर फैसिलिटी पर लॉइटरिंग और पेनेट्रेटिंग म्यूनिशन्स से हमला किया है.
आखिर क्या है पाकिस्तान के किराना हिल्स की कहानी?
दरअसल, किराना हिल्स पाकिस्तान की एक विशाल पथरीली पर्वत शृंखला है, जो पाकिस्तान सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधिकार वाला एक डेजिगनेटेड एरिया है. यह विशाल पर्वत शृंखला पाकिस्तान के सरगोधा जिले के शहरी भाग और रब्वाह शहर के बीच स्थित है. इस पर्वत शृंखला के भूरे रंग के होने के कारण इसे स्थानीय रूप से ‘काली पहाड़ी’ कहा जाता है.
भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। पाकिस्तान भारत के हवाई हमलों से इस कदर डर गया कि वह अमेरिका तक फोन लगा दिया। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने कहा कि भारत हमारे न्यूक्लियर सेंटर पर ब्रह्मोस मिसाइल मारेगा। इसलिए पाकिस्तान ने डर की वजह से युद्धविराम के लिए अमेरिका के ट्रंप प्रशासन को फोन किया था।
इनमें सबसे बड़ा खुलासा हुआ है पाकिस्तान के सरगोधा में स्थित एयरबेस को निशाना बनाने का। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस एयरबेस पर भारत के हमले के बाद पाकिस्तान के साथ-साथ अमेरिका तक की नींद उड़ गई। सीएनएन से लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स तक की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शुरुआत में संघर्ष को नियंत्रण में रखने की बात कर रहा ट्रंप प्रशासन एकाएक परमाणु आपदा के खतरे को देखते हुए एक्शन में आया और लगातार बढ़ते संघर्ष को रुकवाने में बड़ी भूमिका निभाई।
पहले जानें- भारत ने पाकिस्तान में किन-किन एयरबेस को निशाना बनाया?
पाकिस्तान को सबसे बड़ा झटका 10 मई की सुबह लगा, जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के आठ सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिनमें हवाई अड्डे, रडार इकाइयां और गोला-बारूद के भंडार शामिल थे। यह पलटवार पड़ोसी देश की ओर से लड़ाकू विमानों, मानवरहित लड़ाकू हवाई वाहनों (यूसीएवी) और मिसाइलों का इस्तेमाल कर भारत के सैन्य बुनियादी ढांचे और नागरिक क्षेत्रों पर किए गए हमलों के जवाब में किया गया था।
भारतीय वायुसेना ने रफीकी, मुरीद, चकलाला, रहीम यार खान, सुक्कुर, चुनियन, पसरूर और सियालकोट में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। रात भर चले घटनाक्रम ने भारत द्वारा ऑपरेशन सिंदूर शुरू किए जाने के बाद से दोनों सेनाओं के बीच सबसे भीषण संघर्ष को चिह्नित किया। भारत द्वारा निशाना बनाए गए लक्ष्यों में तकनीकी अवसंरचना, कमांड और नियंत्रण केंद्र, रडार साइट और हथियार भंडारण क्षेत्र शामिल थे। संघर्ष विराम की घोषणा के बाद एक ब्रीफिंग के दौरान विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में भारतीय प्रतिष्ठानों पर अकारण हमले के बाद पाकिस्तान को बहुत भारी और असहनीय क्षति हुई है।
उन्होंने कहा, “स्कार्दू, सरगोधा, जैकोबाबाद और भोलारी जैसे महत्वपूर्ण पाकिस्तानी एयरबेसों को भारी नुकसान पहुंचा है। साथ ही, वायु रक्षा हथियारों और रडार के नुकसान ने पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र की रक्षा को अस्थिर बना दिया है। एलओसी के पार, सैन्य बुनियादी ढांचे, कमांड और नियंत्रण केंद्रों और रसद प्रतिष्ठानों को व्यापक और सटीक नुकसान ने इसकी रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताओं को पूरी तरह से खत्म कर दिया है।”
सरगोधा एयरबेस पर भारत के हमले से अमेरिका की नींद क्यों उड़ी?
किराना हिल्स पहली बार दुनिया में चर्चा में तब आई थीं, जब अमेरिकी सैटेलाइट्स ने यह पकड़ा कि पाकिस्तान 1983 से 1990 के बीच लगातार परमाणु परीक्षण की तैयारी करता रहा। बाद में अमेरिका ने पाकिस्तान के परमाणु परीक्षणों पर आपत्ति जताई और इसी के साथ इस केंद्र पर परमाणु परीक्षणों को रोक दिया गया। हालांकि, पाकिस्तान ने यहां चीन की तरफ से सप्लाई होने वाली एम-11 मिसाइलों का भंडारण जारी रखा।







