बिहार के करीब 8 लाख कर्मचारियों का दो महीने से वेतन भुगतान नहीं हो रहा है. जिस लिए हर कर्मी वजह जानने को बेताब है. हालांकि, किसी को ये पता नहीं है कि, आखिर क्यों उन्हें दो महीने से वेतन नहीं मिल रहा है. इसके जद्द में सिर्फ आठ लाख कर्मी ही नहीं बल्कि, खुद मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और विधान परिषद के सदस्य भी हैं. इन सभी को बीते दो महीने से सैलरी नहीं मिली है. कर्मचारियों को दो महीने से वेतन नहीं मिलने से उनके घर का बजट गड़बड़ा गया है. कई कर्मचारियों को रोजमर्रा के खर्चों के लिए उधार लेना पड़ रहा है. आज हम आपको बताएंगे कि आखिर इन सरकारी कर्मचारियों की सैलरी अटकी क्यों हैं.
दरअसल, 3 जनवरी से बिहार में वेतन और बिल के भुगतान के लिए एक नया सॉफ्टवेयर लॉन्च किया गया है. इस सॉफ्टवेयर का नाम है CFMS 2.0 मतलब Comprehensive Financial Management System. जब से यह सॉफ्टवेयर लॉन्च हुआ है तभी से लगातार इसमें तकनीकी दिक्कत आ रही है. हालांकि, यह सॉफ्टवेयर 2019 में ही लॉन्च हुआ था. बीते 3 जनवरी 2025 को इसी सॉफ्टवेयर का अपग्रेड वर्जन लॉन्च किया गया था. जिसकी वजह से यह दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. मिली जानकारी के अनुसार जो पुराना सॉफ्टवेयर था, उसका डाटा अभी तक नए सॉफ्टवेयर में ट्रांसफर नहीं हो पाया है. साथ ही इसमें तकनीकी समस्या आ रही है. जिसके वजह से 8 लाख से भी अधिक सरकारी कर्मचारियों की सैलरी दो महीने से रुकी हुई है.
जानें क्या है CFMS
बताया जा रहा है कि न सिर्फ सरकारी कर्मचारियों का वेतन रुका हुआ है, बल्कि, कोई भी बिल का भुगतान नहीं हो पा रहा है. 8 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी, जिसमें 3 लाख क्षेत्रीय, 5 लाख शिक्षक और 50000 संविदा कर्मी शामिल हैं. जिन्हें दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 का वेतन अभी तक नहीं मिला है. CFMS, फाइनेंस मैनेजमेंट का एक तरीका है. इसमें सॉफ्टवेयर की मदद से कोई भी विभाग और संगठन अपनी आय, व्यय, और संपत्ति का मैनेजमेंट करता है. CFMS से फाइनेंशियल एक्टिविटी ऑनलाइन और पेपरलेस होती है.







