अमेरिका की व्यापार नीतियां एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है. दरअसल अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही ट्रम्प विदेशी सामानों पर कड़े टैरिफ लगाने की धमकी देते रहे है. इस बीच 4 फरवरी को उन्होंने चीन से अमेरिका में आयात किए जा रहे सभी सामानों पर 10% का टैरिफ लगा दिया.
जिसके बदले चीन ने भी अमेरिकी सामानों पर टैरिफ की घोषणा कर दी और इसके तुरंत बाद अमेरिका ने अपने देश में आयात किए जा रहे सभी स्टील और एल्यूमिनियम उत्पादों पर 25% का टैरिफ लगा दिया. ट्रंप ने अमेरिका के तीन सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार देशों पर भी टैरिफ़ (शुल्क) लगाने का ऐलान किया है.
इन तमाम नए-नए टैरिफ और उससे दुनिया भर में मची हड़बड़ी के बीच इस हफ्ते भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रम्प की व्हाइट हाउस में मुलाकात होने वाली है.
अब तक भारत पर अमेरिका ने कोई टैरिफ नहीं लगाया है, लेकिन ट्रम्प ने हाल ही में यह चेतावनी दी थी कि अमेरिका उन देशों पर प्रतिद्वंद्वी टैरिफ लगाएगा जो अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क लगाएंगे और इसमें भारत भी शामिल हो सकता है.
ऐसे में इस रिपोर्ट में अमेरिका-भारत व्यापार के बारे में विस्तार से समझते हैं.
ट्रंप के टैरिफ़ और उनकी व्यापार नीति
जब डोनाल्ड ट्रंप ने साल 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जीता था तो उन्होंने अमेरिकी व्यापार को सुधारने का वादा किया था. उनका मानना था कि अमेरिका के व्यापारिक साझीदारों द्वारा लगाए गए टैरिफ और व्यापारिक नीतियां अमेरिका के लिए नुकसानदायक हैं. उन्होंने सबसे पहले चीन और यूरोपीय देशों को निशाना बनाया और उन पर भारी टैरिफ लगाए.
इसके बाद ट्रंप ने यह भी घोषणा की कि वह उन देशों पर भी टैरिफ लगाएंगे जिनके द्वारा अमेरिकी वस्त्रों पर शुल्क लगाया जाता है. इनमें भारत भी शामिल था. भारत ने 2019 में अमेरिका से आयातित कुछ वस्त्रों पर शुल्क लगाया था, जिसके बाद ट्रंप ने यह चेतावनी दी कि अगर भारत ने अपने टैरिफ में बदलाव नहीं किया तो अमेरिका भी भारत के उत्पादों पर शुल्क लगाएगा.
ट्रंप का यह कदम अमेरिका के व्यापार घाटे को घटाने के लिए था, क्योंकि वह मानते थे कि अमेरिकी कंपनियों का विदेशी बाजारों में बहुत ज्यादा व्यापार हो रहा है, लेकिन अमेरिका को इन व्यापारों से उतना लाभ नहीं मिल पा रहा था.
क्या है अमेरिका- भारत व्यापार की वर्तमान स्थिति
2024 तक भारत अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझीदार बन चुका है. हालांकि इसके बावजूद अमेरिका के लिए भारत का व्यापारिक महत्व उतना ज्यादा नहीं है. भारतीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय और अमेरिकी जनगणना ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में भारत ने अमेरिका के साथ अब तक का सबसे ज्यादा व्यापार किया है. इसका मतलब यह है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है, और 2024 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार $129.2 बिलियन तक पहुंच चुका है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है.
भारत अमेरिका के सबसे बड़े व्यापारिक साझीदारों में से एक है, वहीं अमेरिका के व्यापार साझेदारों की सूची में भारत दसवें स्थान पर आता है. इसका मतलब यह है कि भारत का अमेरिका के लिए व्यापारिक महत्व तो है, लेकिन अमेरिका के अन्य प्रमुख व्यापारिक साझीदारों के मुकाबले भारत का व्यापार महत्व थोड़ा कम है.
ट्रम्प के टैरिफ का मिल सकता है भारत को लाभ
ट्रम्प मेक्सिको और कनाडा पर 25% टैरिफ़ लगाने की योजना बना रहे हैं और चीन पर पहले से ही 10% टैरिफ लागू है. भले ही ट्रंप की इस नई व्यापारिक नीतियों का कई देशों पर असर पड़ सकता है, लेकिन भारत को इसका फायदा मिल सकता है. दरअसल भारत ने पिछले कुछ सालों में अमेरिका से व्यापारिक रिश्तों को संभालने के लिए कई उपाय किए. सबसे पहले, भारत ने अपनी ट्रेड पॉलिसी में बदलाव किए, जिससे उसे अमेरिकी बाजार में और अधिक अवसर मिल सके. भारत ने अमेरिका से आयातित कुछ वस्त्रों पर शुल्क घटाया, जैसे मोटरसाइकिल्स पर आयात शुल्क में कमी की गई. यह कदम अमेरिकी कंपनियों, जैसे हार्ले डेविडसन, को लाभ पहुंचा सकता है.
भारत ने यह भी संकेत दिए हैं कि वह अमेरिका के साथ व्यापारिक विवादों को सुलझाने के लिए तैयार है, ताकि दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते और मजबूत हो सकें. भारत ने कई बार यह भी कहा है कि वह व्यापार में ज्यादा समानता चाहता है, जिससे दोनों देशों को समान लाभ हो सके.
इसके अलावा भारत अमेरिका को स्टील और एल्युमिनियम बेचता है. लेकिन, वर्तमान में भारत की हिस्सेदारी इस देश में काफी कम है. यह स्टील के मामले में 6 प्रतिशत और एल्युमिनियम में 2 प्रतिशत के आसपास है. ऐसे में अगर अमेरिका भारत को टैरिफ से छूट नहीं देता, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय मेटल कंपनियों की प्रतिस्पर्धा घट सकती है. इसके साथ ही, भारतीय बाजार चीन के सस्ते स्टील और एल्युमिनियम से पट भी सकता है. चीन पहले भारतीय बाजार में काफी स्टील डंप कर रहा है.
हालांकि, 12 से 14 फरवरी के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के दौरे पर जा रहे हैं. वहां उनकी ट्रंप से भी मुलाकात होगी. ऐसे में मेटल इंडस्ट्री को उम्मीद है कि ट्रंप भारत के स्टील और एल्युमिनियम एक्सपोर्ट को रियायत दे सकते हैं. उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में भी भारत को छूट दी थी. अगर भारत को इस टैरिफ से छूट मिलती है तो यह देश अमेरिका को स्टील और एल्युमिनियम का एक्सपोर्ट बढ़ भी सकता है, जो भारतीय इकोनॉमी के भारी बूस्टर साबित होगा.
अमेरिका-भारत व्यापारिक गणित और घाटा
दरअसल अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा बढ़ रहा है. 2024 तक, अमेरिका ने भारत से $45.7 बिलियन अधिक आयात किया है, जबकि भारत ने अमेरिका से उतना सामान नहीं खरीदा. इसका मतलब है कि अमेरिका भारत से ज्यादा सामान खरीद रहा है, और इसका असर दोनों देशों के व्यापार संतुलन पर पड़ा है.
2024 में भारत ने अमेरिका से $45.7 बिलियन का अधिक आयात किया, जिससे यह साफ होता है कि व्यापार संतुलन अमेरिका के पक्ष में है. इसके बावजूद, भारत अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण साझीदार बना हुआ है.
अमेरिका और भारत के बीच व्यापार का बड़ा हिस्सा फार्मास्युटिकल उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, रत्न, और आभूषण का है. 2023 में भारत से अमेरिका को इन प्रमुख पांच उत्पादों का आयात $47 बिलियन से अधिक था.
भारत का अमेरिका पर निर्भरता
भारत का अमेरिका पर निर्भरता काफी ज्यादा है, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार अमेरिका है, जिसमें लगभग $120 बिलियन का व्यापार है, जबकि भारत अमेरिका के लिए दसवें स्थान पर है. इसके विपरीत, अमेरिका का मेक्सिको, कनाडा और चीन के साथ व्यापार $2 ट्रिलियन से ज्यादा है.
जब ट्रंप ने मेक्सिको और कनाडा पर 25% टैरिफ़ लगाने का प्रस्ताव दिया और चीन पर 10% टैरिफ़ पहले से लागू किया, तो यह संकेत मिला कि भारत को इन देशों के मुकाबले फायदा हो सकता है. भारतीय कंपनियां ज्यादा तकनीकी उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और आभूषण अमेरिका को निर्यात कर सकती हैं, जिससे भारत को अमेरिकी बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिल सकता है.
भारत-अमेरिका व्यापार का भविष्य
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार का भविष्य बहुत आशाजनक दिखाई देता है. दोनों देश व्यापारिक और कूटनीतिक मामलों में सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार हैं. दोनों देशों के नेताओं का मानना है कि उन्हें चीन की बढ़ती आर्थिक ताकत के सामने एकजुट होकर काम करना होगा.
2024 में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार $129.2 बिलियन तक पहुंच चुका है, जो कि एक रिकॉर्ड है. अगर दोनों देश अपनी व्यापारिक नीतियों में बदलाव करते हैं और एक दूसरे के हितों का ध्यान रखते हैं, तो यह व्यापारिक साझेदारी और मजबूत हो सकती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच आने वाले समय में और भी उच्च स्तरीय बातचीत हो सकती है, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को और बल मिलेगा.
अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक रिश्तों में उतार-चढ़ाव आते रहते है. ट्रंप की व्यापार नीतियां खासकर टैरिफ़, भारत के लिए एक चुनौती बन सकती हैं, लेकिन यह भी सच है कि भारत इस मौके को अपने फायदे में बदलने के लिए तैयार है. अमेरिका के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए भारत ने कई कदम उठाए हैं और आगे भी यह उम्मीद की जा रही है कि दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे.
भारत-अमेरिका का व्यापार अब सिर्फ आर्थिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों की सुरक्षा और कूटनीतिक साझेदारी का अहम हिस्सा बन चुका है. आने वाले समय में, इन दोनों देशों के रिश्तों में और भी संभावनाएँ दिख सकती हैं, खासकर जब वे चीन की बढ़ती आर्थिक ताकत को चुनौती देने के लिए एकजुट हो सकते हैं.







