आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर स्टारडम हासिल करना किसी सपना साकार करने जैसा लगता है. सोशल मीडिया का जादू अब हर किसी के सिर चढ़कर बोल रहा है. यहां हर किसी को स्टार बनने का मौका मिलता है, लेकिन इस चमक-धमक की दुनिया के पीछे एक अंधेरी सच्चाई भी छुपी होती है. जहां सफलता की ओर एक कदम बढ़ाने के लिए लाखों लोग अपनी किस्मत आज़माते हैं, वहीं कई बार यह दौड़ उन्हें नुकसान, कर्ज और टूटे हुए सपनों के दलदल में धकेल देती है.
सोशल मीडिया स्टारडम की यह कहानी सिर्फ ग्लैमर और सफलता तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसमें छिपी होती है मेहनत, संघर्ष और कई बार असफलता की भी गहरी परतें.
सोशल मीडिया स्टार बनने का आकर्षण इतना प्रबल है कि कई लोग अपनी पूरी जिंदगी की जमा पूंजी और बचत इस सपने में डाल देते हैं. हालांकि, जो हकीकत सामने आती है वह इस चमक-धमक से कहीं ज्यादा कड़वी है.
सवाल- किस तरह की कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं इन्फ्लुएंसर
जवाब- सोशल मीडिया पर स्टार बनने की राह में बहुत सारी कठिनाइयां और वित्तीय समस्याएं होती हैं, जो आमतौर पर पर्दे के पीछे छिपी रहती हैं. इन्फ्लुएंसर बनने के लिए जो निवेश करना पड़ता है, वह एक आम आदमी के लिए भारी पड़ सकता है.
2023 में इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग प्लेटफॉर्म “लेटर” ने एक सर्वेक्षण किया जिसके अनुसार कंटेंट क्रिएटर्स बनने की इच्छा रखने वाला व्यक्ति पहले साल में औसतन $10,000 से $15,000 तक का खर्च करते हैं. ये खर्च महंगे कैमरा गियर, लाइटिंग सेटअप, ऑडियो उपकरण, कंप्यूटर हार्डवेयर, और वेबसाइट होस्टिंग तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इनमें स्टूडियो रेंटल, वार्डरोब, प्रॉप्स, ट्रैवल और सोशल मीडिया प्रचार जैसी अन्य चीजें भी शामिल होती हैं.
इस निवेश का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा कंटेंट बनाना होता है जो सोशल मीडिया के प्लेटफार्म्स पर वायरल हो जाए और आपको लाखों फॉलोअर्स और सैकड़ों ब्रांड डील्स मिल जाएं. हालांकि, असलियत यह है कि ज्यादातर इन्फ्लुएंसर अपने इस सपने को पूरा कर ही नहीं पाते हैं. वे अपनी शुरुआती लागतों को कवर करने के लिए कर्ज लेने तक मजबूर हो जाते हैं. क्रेडिट कार्ड पर खर्च करना, व्यक्तिगत लोन लेना और यहां तक कि स्टूडियो के लिए लोन लेना एक सामान्य प्रैक्टिस बन चुकी है.
सवाल – क्यों कर्ज में डूब रहे हैं कई सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर
जवाब- भारत में ऐसे कई इन्फ्लुएंसर्स हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया को करियर बनाने के लिए इसमें अपनी पूरी मेहनत और बचत झोंक दी, लेकिन उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा. न्यूज रील की एक रिपोर्ट के अनुसार मुंबई के एक फैशन इन्फ्लुएंसर, रोहित मेहरा ने अपनी IT जॉब छोड़कर 22 लाख रुपये (लगभग $26,500) का निवेश किया था. उन्होंने कैमरा उपकरण, डिजाइनर कपड़े, स्टूडियो रेंटल और मार्केटिंग पर खर्च किया, लेकिन उनकी मासिक आय केवल 40,000 रुपये ($480) तक पहुंच पाई. अंत में उन्हें अपने ज्यादातर गैजेट बेचने पड़े और आईटी कंसल्टिंग में वापस लौटना पड़ा.
ठीक ऐसी ही कहानी दिल्ली की प्रिय शर्मा की है. प्रिया ने अपनी पूरी बचत 15 लाख रुपये और अतिरिक्त 10 लाख रुपये का कर्ज लेकर अपनी लाइफस्टाइल व्लॉग को शुरू किया था. उन्होंने 2 साल में 80,000 फॉलोअर्स हासिल किए, लेकिन उनकी मासिक आय केवल 20,000 रुपये तक सिमट कर रह गई.
इसके अलावा, बैंगलोर के अमित कुमार ने अपने टेक रिव्यू चैनल पर 35 लाख रुपये खर्च किए थे, लेकिन बाद में नए तकनीकी उत्पादों को खरीदने और उनकी समीक्षा करने की लागत के कारण उन्हें भारी कर्ज का सामना करना पड़ा और उन्होंने 2023 में अपना चैनल बंद कर दिया.
सवाल – कितना मुश्किल है सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर बनना?
जवाब- सोशल मीडिया पर सफलता पाने का रास्ता इतना आसान नहीं है जितना नजर आता है. पिछले कुछ सालों में इन प्लेटफॉर्म्स पर बढ़े क्रिएटर्स ने प्रतियोगिता को भी बढ़ा दिया है. एक तरफ जहां इन्फ्लुएंसर प्लेटफॉर्म्स के लिए हमेशा कुछ न कुछ नया करने की जरूरत होती है, तो वहीं दूसरी तरफ ये प्लेटफॉर्म एल्गोरिदम में बदलाव कर अपने उपयोगकर्ताओं को कुछ न कुछ नया करने पर मजबूर करते रहते हैं.
इन बदलावों का सबसे बुरा असर मिड-टियर इन्फ्लुएंसर्स पर पड़ता है. साल 2023 में इंस्टाग्राम के एल्गोरिदम ने मिड-टियर इन्फ्लुएंसर्स के एंगेजमेंट में 45% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे कई कंटेंट क्रिएटर्स के लिए उनके निवेश को वसूल करना और भी मुश्किल हो गया था. यही स्थिति टिकटॉक और यूट्यूब पर भी देखने को मिलती है, जहां सिर्फ बड़े इन्फ्लुएंसर्स को ही पर्याप्त व्यूज और ब्रांड डील्स मिलती हैं.
इतना ही नहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अब पहले जैसा आसान तरीका नहीं रहा जहां छोटे इन्फ्लुएंसर भी आसानी से पैसे कमा सकते थे. ब्रांड्स की कम होती इंगेजमेंट और बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने छोटे इन्फ्लुएंसर्स के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं. उदाहरण के तौर पर, यूट्यूब पर केवल 3% चैनल ऐसे हैं जो महीने में $100 से ज्यादा कमा पाते हैं, जबकि इंस्टाग्राम पर बहुत कम इन्फ्लुएंसर हैं, जो साल में $100,000 या उससे अधिक की कमाई कर पाते हैं. इसका मतलब यह है कि अब छोटे इन्फ्लुएंसर्स के लिए सोशल मीडिया से पैसे कमाना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है.
कर्ज और वित्तीय कठिनाइयों का सामना करने वाले इन्फ्लुएंसर
सोशल मीडिया पर करियर बनाने की राह इतनी आसान नहीं है. ज्यादातर इन्फ्लुएंसर को केवल कमाई की उम्मीद होती है, लेकिन वो ये नहीं समझ पाते कि उनके खर्च कहीं ज्यादा हो सकते हैं. अधिकतर इन्फ्लुएंसर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से अपनी आय के स्रोत की सही योजना नहीं बनाते, जिसके कारण वे कर्ज के जाल में फंस जाते हैं. कुछ तो ऐसे इन्फ्लुएंसर भी हैं जिन्होंने अपना पूरा घर तक बेच दिया या फिर भारी कर्ज चुकाने के लिए दिवालियापन का सामना किया.
सिंगापुर की सारा चेन, जो एक लाइफस्टाइल इन्फ्लुएंसर थीं, ने $112,000 का निवेश किया था, जिसमें लक्ज़री होटल में ठहरने, डिजाइनर कपड़े और प्रीमियम कैमरा उपकरण शामिल थे। लेकिन उनकी मासिक आय कभी भी $1,500 से अधिक नहीं हुई और उन्हें 2022 में दिवालियापन का सामना करना पड़ा.
ब्रिटेन के जेम्स मॉरिस और ऑस्ट्रेलिया की एम्मा थॉम्पसन की भी कहानियां कुछ ऐसी ही हैं. जेम्स ने अपनी टेक रिव्यू चैनल पर £75,000 ($95,000) खर्च किए थे, लेकिन वह इसे वसूल नहीं कर पाए. वहीं एम्मा ने AUD 180,000 ($120,000) खर्च किए थे, लेकिन एल्गोरिदम बदलाव के कारण उनका एंगेजमेंट कम हो गया और वे भारी कर्ज में फंस गईं.
अन्य प्लेटफॉर्म के आंकड़े भी निराशाजनक
यूट्यूब पर, 1,000 से 10,000 सब्सक्राइबर्स वाले केवल 3% चैनल $100 से अधिक मासिक आय प्राप्त करते हैं, और ज्यादातर कंटेंट 1,000 से कम व्यूज प्राप्त करते हैं. वहीं 1 मिलियन सब्सक्राइबर्स वाले चैनल, जो आमतौर पर $60,000 वार्षिक या उससे अधिक कमाते हैं, वे 0.1% से भी कम होते हैं.
इंस्टाग्राम पर, 97.5% अकाउंट्स के पास 10,000 से कम फॉलोअर्स होते हैं, और केवल 0.25% इन्फ्लुएंसर $100,000 या उससे अधिक सालाना कमाते हैं. एंगेजमेंट दरें भी 2019 में 4.7% से घटकर 2023 में 2.88% हो गई हैं, जिससे मिड-टियर क्रिएटर्स के लिए मोनेटाइजेशन और भी कठिन हो गया है.
टिकटॉक, जिसे भारत और अन्य देशों में बैन किया गया है और जो वायरल सफलता का प्लेटफॉर्म माना जाता है, यह दर्शाता है कि केवल 1% क्रिएटर्स क्रिएटर फंड से $5,000 मासिक कमाते हैं, और 82.1% कभी भी कोई पैसे नहीं कमाते. औसत भुगतान प्रति 1,000 व्यूज लगभग $0.02 से $0.04 है, जो उत्पादन लागत को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होता.

इन्फ्लुएंसर बनने का सच्चा गणित
सोशल मीडिया पर इन्फ्लुएंसर बनने का ख्वाब देखने वाले युवाओं को यह समझना जरूरी है कि केवल अच्छे कंटेंट से ही सफलता नहीं मिलती. इसके साथ-साथ वित्तीय योजना, सही निवेश, और कड़ी मेहनत की भी जरूरत होती है. बहुत से इन्फ्लुएंसर “संकट की घड़ी” में अपनी पूरी बचत और कर्ज का सहारा लेते हैं, लेकिन बिना रणनीति और सोच-समझकर निवेश किए यह जोखिम बहुत ज्यादा हो जाता है.
यहां तक कि कई इन्फ्लुएंसर जो बड़ी उम्मीदों के साथ इस करियर में आए थे, उन्हें अपनी पुरानी नौकरी से $30,000 से $50,000 की संभावित आय भी गंवानी पड़ी, साथ ही स्वास्थ्य बीमा और पेंशन जैसी लाभ भी उनके निजी खर्चे बन गए.
स्मार्ट तरीके से सफलता की ओर बढ़ें
इन्फ्लुएंसर बनने की राह में जोखिमों से बचने के लिए कुछ स्मार्ट कदम उठाए जा सकते हैं. सबसे पहले तो यह जरूरी है कि इन्फ्लुएंसर अपनी सोशल मीडिया यात्रा को एक साइड प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करें, ताकि अगर पहले साल में सफलता नहीं मिली, तो उन्हें वित्तीय संकट का सामना न करना पड़े. शुरुआती समय में कम इक्यूपमेंट के साथ काम शुरू करें.
इसके अलावा, इन्फ्लुएंसर को अपनी आय और खर्चों का सही हिसाब रखना चाहिए. इमरजेंसी फंड्स और सही तरीके से टैक्सेस का भुगतान करना भी जरूरी है. “संकट लागत” (Sunk Cost Fallacy) से बचना चाहिए, यानी जिस राशि को आप पहले ही खर्च कर चुके हैं, उसे देखकर और अधिक खर्च करने का लालच नहीं करना चाहिए.







