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सरकार से बातचीत के लिए आज भर शंभू बॉर्डर पर इंतजार…

किसानों ने शंभू बॉर्डर पर जहां अपना बेस कैंप बनाया है, वह पंजाब के क्षेत्र में आता है. प्रदर्शनकारी किसानों ने आंसू गैस के गोलों को जूट के गीले बोरों से ढंककर धुएं से बचने का जुगाड़ निकाला. कई किसानों को पुलिस द्वारा सड़क पर लगाए गए लोहे के कीलों और कंटीले तारों को उखाड़ते देखा गया.

UB India News by UB India News
December 8, 2024
in कृषि, खास खबर
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किसान आंदोलन-13वां दिन, हरियाणा में इंटरनेट पर रोक हटी, ‘दिल्ली मार्च’ टलने के बाद पुलिस ने खोले सिंघू और टीकरी बॉर्डर
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पंजाब-हरियाणा सीमा पर पुलिस जवानों के साथ झड़प में कुछ किसानों के घायल होने के बाद  प्रदर्शनकारी किसानों ने शुक्रवार को दिल्ली तक अपना पैदल मार्च शनिवार तक के लिए स्थगित कर दिया. प्रदर्शनकारी किसानों को रोकने के लिए पुलिस की ओर से आंसू गैस के गोले छोड़े गए. किसान संघों संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के आह्वान के तहत, 101 किसानों के एक ‘जत्थे’ ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए कानूनी गारंटी सहित विभिन्न मांगों को लेकर सरकार पर दबाव डालने के लिए शंभू बॉर्डर से दोपहर 1 बजे दिल्ली के लिए पैदल मार्च शुरू किया.

किसान अपने मुद्दों के समाधान के लिए केंद्र पर बातचीत शुरू करने के लिए भी दबाव डाल रहे हैं. हरियाणा पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर किसानों को प्रदर्शन स्थल से कुछ मीटर की दूरी पर रोक दिया गया. शंभू बॉर्डर पर वाटर कैनन व्हिकल भी तैनात किया गया था. पुलिस ने किसानों को आगे नहीं बढ़ने के लिए कहा और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत अंबाला प्रशासन द्वारा लगाए गए निषेधाज्ञा आदेश का हवाला दिया. इसके तहत जिले में एक साथ पांच या अधिक लोगों के एक जगह पर एकत्रित होने पर प्रतिबंध है. किसानों ने बैरिकेड्स हटाकर जबरदस्ती आगे बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया.

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आंसू गैस से बचने के लिए किसानों ने निकाला जुगाड़

पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों को तितर-बितर करने और उन्हें शंभू में अपने विरोध स्थल पर वापस जाने के लिए मजबूर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े. बता दें कि किसानों ने शंभू बॉर्डर पर जहां अपना बेस कैंप बनाया है, वह पंजाब के क्षेत्र में आता है. प्रदर्शनकारी किसानों ने आंसू गैस के गोलों को जूट के गीले बोरों से ढंककर धुएं से बचने का जुगाड़ निकाला. कई किसानों को पुलिस द्वारा सड़क पर लगाए गए लोहे के कीलों और कंटीले तारों को उखाड़ते देखा गया. ‘सतनाम वाहेगुरु’ का जाप करते हुए और अपने संगठन के झंडे पकड़े हुए, ‘जत्था’ के कई किसानों ने बैरिकेड्स की शुरुआती परत को आसानी से पार कर लिया, लेकिन आगे नहीं बढ़ सके.

उनमें से कुछ को घग्गर नदी पर बने पुल के नीचे सुरक्षाकर्मियों द्वारा लगाई गई लोहे की जाली को धकेलते हुए देखा गया. प्रदर्शनकारियों में से एक टिन शेड की छत पर चढ़ गया जहां सुरक्षा बल तैनात थे. किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने पुलिस के साथ दिनभर की खींचतान के बाद शुक्रवार शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस किया. उन्होंने कहा कि आंसू गैस के गोले के कारण कम से कम आठ किसान घायल हो गए, जिनमें से दो गंभीर रूप से घायल हैं. उन्होंने किसानों के खिलाफ ज्यादती करने के लिए हरियाणा सरकार की आलोचना की. घायलों में किसान नेता सुरजीत सिंह फुल भी शामिल हैं. किसान नेताओं ने कहा कि घायलों को विरोध स्थल पर तैनात एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया.

किसानों ने की पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश

हरियाणा पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारी किसानों ने हंगामा किया और बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की.पुलिस ने कहा कि दिल्ली कूच करने पर अड़े ‘जत्थे’ में कोई जिम्मेदार किसान नेता दिखाई नहीं दे रहा था और कुछ प्रदर्शनकारी किसान व्यवहार में हिंसक थे. पुलिस ने कुछ तस्वीरें भी साझा कीं, जिनमें किसानों द्वारा किया जा रहा हंगामा दिख रहा है. अंबाला रेंज के आईजी सिबाश कबिराज ने कहा कि पंजाब के किसानों के दिल्ली जाने के आह्वान के मद्देनजर बॉर्डर पर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है. उन्होंने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से पूरी तैयारी की गई है.

हरियाणा पुलिस ने एक बयान में कहा, ‘किसानों के इस समूह में 101 से अधिक किसान शामिल थे, जिनमें कुछ हिंसक भी थे. उन्होंने बार-बार जंजीरें बांधकर पुलिस बैरिकेड्स को तोड़ने की पूरी कोशिश की और उत्पात मचाया. दिल्ली कूच के लिए निकले किसानों के जत्थे में कोई भी जिम्मेदार किसान नेता नजर नहीं आया. पुलिस प्रशासन ने संयम बरता और किसानों को बार-बार रुकने और कानून-व्यवस्था में खलल न डालने की चेतावनी दी. इस दौरान कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए पुलिस द्वारा उचित कार्रवाई की गई. किसी को भी कानून व्यवस्था अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी और जो कानून का पालन नहीं करेगा उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.’

केंद्र ने शंभू बॉर्डर को पाकिस्तान-चीन सीमा बना दिया

अंबाला रेंज आईजी सिबाश कबिराज ने कहा, ‘किसान संगठनों को पहले दिल्ली प्रशासन से अनुमति लेनी चाहिए और अंबाला प्रशासन को दिखाने के बाद दिल्ली मार्च करना चाहिए.’ किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान जत्थे में शामिल 101 किसानों को ‘मरजीवरस’ (किसी उद्देश्य के लिए मरने को तैयार व्यक्ति) कहा. पंढेर ने कहा, ‘कुछ किसानों की चोटों को देखते हुए हमने आज के लिए जत्था वापस बुला लिया है. हम सरकार से अपील करते हैं कि या तो हमसे बातचीत करें या हमें दिल्ली जाने की इजाजत दें. वे ऐसा व्यवहार कर रहे हैं मानो हम किसी दूसरे देश के दुश्मन हों. पंजाबियों और किसानों ने देश के लिए सबसे ज्यादा कुर्बानियां दी हैं. उन्होंने इस जगह (शंभू बॉर्डर) को पाकिस्तान या चीन की सीमा जैसा बना दिया है.’

किसानों के अगले कदम के बारे में पूछे जाने पर किसान नेता सरवन सिंह पंढेर नेता ने कहा कि ‘जत्था’ अब रविवार को दिल्ली के लिए रवाना होगा. उन्होंने कहा, ‘अगर (केंद्र की ओर से) बातचीत के लिए कोई प्रस्ताव आता है तो हम कल तक इंतजार करेंगे. अब, केंद्र बातचीत करना चाहता है या नहीं यह उनका फैसला होगा, हम चाहते हैं कि बातचीत हो. हम केंद्र के साथ कोई टकराव नहीं चाहते हैं और हम अपना (दिल्ली चलो) कार्यक्रम शांतिपूर्ण रखेंगे.’ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संवाददाताओं से कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए जो कदम उठाए हैं, किसी अन्य सरकार ने ऐसे कदम नहीं उठाए हैं. हम किसानों की शत-प्रतिशत फसल एमएसपी पर खरीद रहे हैं.

लोकतंत्र में शांतिपूर्वक अपनी बात कहने का अधिकार

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को कहीं भी आने-जाने या शांतिपूर्वक अपनी बात कहने का अधिकार है, लेकिन भाजपा सरकार किसानों से यह अधिकार छीनना चाहती है. कांग्रेस नेता ने कहा, ‘किसान सरकार की बात मानकर बिना ट्रैक्टर-ट्रॉली के दिल्ली जाने को तैयार हो गए. ऐसे में उन्हें रोकना पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है.’ हरियाणा की अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) सुमिता मिश्रा ने कहा कि अंबाला के अलावा, चार अन्य जिलों में भी धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो.

उन्होंने कहा कि हरियाणा-पंजाब सीमा के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं. किसानों के मार्च से कुछ समय पहले, हरियाणा सरकार ने शुक्रवार को अंबाला जिले के 11 गांवों में 9 दिसंबर तक मोबाइल इंटरनेट और बल्क एसएमएस सेवा निलंबित कर दी. सुमिता मिश्रा ने कहा, ‘हमने पंजाब सरकार को लिखा है कि उनकी तरफ से हमने 17-18 गांवों की पहचान की है, जहां हमने मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने की सिफारिश की है.’ बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 दिसंबर को एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पानीपत आने वाले हैं.

अब हमारे पैदल मार्च पर सरकार को आपत्ति क्यों: पंढेर

पत्रकारों से बात करते हुए, किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए केंद्र की आलोचना की. उन्होंने कहा, ‘हमारे खिलाफ बल प्रयोग किया गया. क्या आपने हमारे पास कोई हथियार देखा? हमें केंद्र द्वारा अर्धसैनिक बलों की तैनाती, ड्रोन और अन्य साजो-सामान जैसी व्यवस्थाओं के बारे में पता था. हम जानते थे कि हम आगे नहीं बढ़ पाएंगे. हम देश और दुनिया को दिखाना चाहते थे कि केंद्रीय मंत्रियों और राज्य भाजपा नेताओं ने पहले कहा था कि उन्हें किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मार्च करने पर आपत्ति है, लेकिन किसान इनके बिना भी दिल्ली आ सकते हैं. अब, जब हम पैदल मार्च कर रहे थे, तो आपत्ति क्या थी और उन्होंने हमें अनुमति क्यों नहीं दी?’

उन्होंने कहा, ‘मैंने कल कहा था कि अगर शांतिपूर्वक पैदल मार्च कर रहे जत्थे को रोका गया तो यह किसानों की नैतिक जीत होगी.’ पंढेर ने कहा कि किसानों ने अंबाला के अधिकारियों को अपनी मांगों को लेकर एक चार्टर सौंपा है, जिन्होंने उन्हें इसे आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया है. उन्होंने कहा कि किसान अब पंजाब के भाजपा नेताओं से केंद्र द्वारा उनके साथ किए गए व्यवहार के बारे में सवाल पूछेंगे. प्रदर्शनकारी किसानों ने इस साल 13 फरवरी और 21 फरवरी को भी दिल्ली की ओर मार्च करने का प्रयास किया था, लेकिन बॉर्डर पर तैनात जवानों ने रोक दिया था.

किसान एमएसपी के अलावा, कृषि ऋण माफी, किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए पेंशन, बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं, पुलिस मामलों (किसानों के खिलाफ) को वापस लेने और 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय की भी मांग कर रहे हैं. भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 को बहाल करना और 2020-21 में पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा देना भी उनकी मांगों का हिस्सा है.

 

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